बजट 2026: सेमीकंडक्टर के लिए ‘मिशन 2.0’ की घोषणा, इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को 40,000 करोड़ का प्रोत्साहन
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026 पेश करते हुए देश के आर्थिक विकास को गति देने के लिए सात प्रमुख क्षेत्रों में विनिर्माण को बढ़ावा देने की घोषणा की। इस दौरान सेमीकंडक्टर क्षेत्र को लेकर एक महत्वपूर्ण रणनीति सामने रखी गई। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर मिशन के पहले चरण के तहत देश में इस क्षेत्र की क्षमताओं का विस्तार हुआ है। अब इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए मिशन के दूसरे चरण, ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ की शुरुआत की जा रही है। इसके साथ ही उद्योग-केंद्रित अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्रों पर विशेष जोर दिए जाने की भी बात कही गई।
इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण को बड़ा समर्थन
केंद्र सरकार देश में इलेक्ट्रॉनिक्स घटकों के विनिर्माण को मजबूती देना चाहती है। बजट 2026 में इस क्षेत्र के लिए एक बड़ी घोषणा की गई है। वित्त मंत्री ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना में निर्धारित लक्ष्य से पहले ही निवेश दोगुना हो चुका है। इस सफलता को देखते हुए बजट में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण योजना के तहत खर्च को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस कदम से देश में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।
दुर्लभ खनिजों में आत्मनिर्भरता की ओर कदम
इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों और सेमीकंडक्टर के उत्पादन के लिए दुर्लभ खनिज (रेयर अर्थ मिनरल्स) अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। फिलहाल भारत अपनी इन खनिजों की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा चीन से आयात करता है। इस निर्भरता को कम करने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए बजट 2026 में एक और बड़ा एलान किया गया है।
सरकार ने वर्ष 2025 में दुर्लभ खनिजों के लिए एक विशेष योजना शुरू की थी। अब इस दिशा में आगे बढ़ते हुए बजट में दुर्लभ खनिज कॉरिडोर स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत खनिज संपन्न राज्यों को सहायता प्रदान की जाएगी। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में इन कॉरिडोर की स्थापना का उल्लेख किया। इस पहल से न केवल दुर्लभ खनिजों की घरेलू उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को भी मजबूत आधार मिलेगा।
बजट 2026 में सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए बढ़ा हुआ कोष और दुर्लभ खनिज कॉरिडोर जैसी घोषणाएं भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। इन कदमों से देश में शोध, नवाचार और विनिर्माण को गति मिलने की उम्मीद है, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति और मजबूत होगी।