एनसीईआरटी की किताब में आपातकाल का अध्याय: भाजपा ने दिया समर्थन, कहा- इतिहास से सीख लेना जरूरी

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में आपातकाल से संबंधित एक नया अध्याय शामिल किए जाने के फैसले का पुरजोर समर्थन किया है। पार्टी का मानना है कि भारतीय लोकतंत्र के इस संवेदनशील दौर को नई पीढ़ी के सामने रखना आवश्यक है, ताकि वे लोकतांत्रिक मूल्यों की अहमियत समझ सकें और भविष्य में ऐसी किसी भी स्थिति की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

एनसीईआरटी ने पहली बार कक्षा 9 की नई पाठ्यपुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में आपातकाल पर एक विस्तृत खंड जोड़ा है। इस खंड में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आने वाली सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। पुस्तक में यह उल्लेख किया गया है कि उस दौरान अधिकांश मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था, जिससे देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई थी।

कांग्रेस पर भाजपा का निशाना: सच से क्यों डरती है पार्टी?

पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आपातकाल की चर्चा से इसलिए कतराती है, क्योंकि इस विषय को उठाते ही कई असुविधाजनक सवाल सामने आ जाते हैं। प्रसाद ने कहा कि युवा पीढ़ी को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उस कालखंड में वास्तव में क्या हुआ था। उन्होंने सवाल उठाया कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण को क्यों गिरफ्तार किया गया? जबरन नसबंदी अभियान क्यों चलाया गया? और उस समय लोकतांत्रिक संस्थाओं के साथ किस तरह का व्यवहार किया गया? उनके अनुसार, कांग्रेस के पास इन सवालों का कोई संतोषजनक जवाब नहीं है, और इसीलिए वह इस अध्याय के विरोध में है।

भाजपा प्रवक्ता का बयान: 1975 का दिन था लोकतंत्र के लिए अंधकारमय

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि 25 जून 1975 का दिन भारतीय लोकतंत्र और संविधान के इतिहास का सबसे काला दिन था। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बने रहने की राजनीति के चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने देश पर आपातकाल थोप दिया था। पूनावाला ने कहा कि उस दौरान संसद, न्यायपालिका, मीडिया और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर व्यापक दबाव बनाया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि मौलिक अधिकारों को पूरी तरह निलंबित कर दिया गया था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कठोर अंकुश लगा दिया गया था।

शिक्षा का उद्देश्य: छात्रों को इतिहास से मिलेगी सीख

भाजपा नेताओं ने एक स्वर में कहा कि एनसीईआरटी का यह कदम छात्रों को देश के लोकतांत्रिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील दौर से रूबरू कराएगा। उनका मानना है कि आपातकाल जैसी घटनाओं के बारे में पढ़कर छात्र लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं के महत्व को और गहराई से समझ पाएंगे। पूनावाला ने कहा कि इतिहास के इस अध्याय को याद रखना जरूरी है, लेकिन इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा पैदा न हों। यह शिक्षा का ही उद्देश्य है कि वह छात्रों को इतिहास से सीख लेने और बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए प्रेरित करे।

कांग्रेस के विरोध पर भाजपा का पलटवार

भाजपा ने कांग्रेस द्वारा इस अध्याय को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने पर उठाई जा रही आपत्तियों पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि यदि कांग्रेस वास्तव में संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करती है, तो उसे इस विषय को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाए जाने का स्वागत करना चाहिए, न कि इसका विरोध। भाजपा नेताओं ने यह भी याद दिलाया कि आपातकाल के खिलाफ जयप्रकाश नारायण, मुलायम सिंह यादव और लालू प्रसाद यादव जैसे कई नेताओं ने सक्रिय संघर्ष किया था। उन्होंने यह टिप्पणी करते हुए कटाक्ष किया कि आज उन्हीं नेताओं से जुड़े कई राजनीतिक दल कांग्रेस के साथ खड़े नजर आते हैं, जो विडंबना से कम नहीं है।

क्या था आपातकाल का दौर?

यह ऐतिहासिक तथ्य है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लागू कर दिया था, जो 21 मार्च 1977 तक लगभग 21 महीने प्रभावी रहा। इस अवधि को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में सबसे विवादास्पद और चुनौतीपूर्ण दौरों में से एक माना जाता है। एनसीईआरटी की नई पाठ्यपुस्तक में इसी अवधि के दौरान हुए घटनाक्रमों, उनके कारणों और भारतीय राजनीति एवं समाज पर उनके दीर्घकालिक प्रभावों को विस्तार से शामिल किया गया है, ताकि विद्यार्थी इस कालखंड को एक शैक्षणिक दृष्टिकोण से समझ सकें।