बीएचयू में शैक्षिक लिंगानुपात: इंजीनियरिंग में पिछड़ रही हैं छात्राएं, कला और चिकित्सा में आगे

वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में लैंगिक असमानता का एक दिलचस्प पैटर्न देखने को मिलता है। जहां एक ओर इंजीनियरिंग जैसे पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान क्षेत्रों में छात्राओं की संख्या बेहद कम है, वहीं मंच कला और डेंटल जैसे विषयों में वे छात्रों से कहीं आगे हैं। यह आंकड़ा विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा के प्रति छात्राओं की बदलती प्राथमिकताओं को उजागर करता है।

इंजीनियरिंग में कम भागीदारी

आईआईटी बीएचयू के आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां कुल 9,354 तकनीकी छात्रों में से केवल 2,018 छात्राएं हैं। अकेले बीटेक कार्यक्रम की बात करें तो कुल 1,528 सीटों में से छात्राओं की संख्या बेहद सीमित है। कैंपस प्लेसमेंट के दौरान 1,233 छात्रों को नौकरी के प्रस्ताव मिले, जिनमें से केवल 246 छात्राएं थीं। यह आंकड़ा बताता है कि इंजीनियरिंग में छात्राओं की संख्या छात्रों की तुलना में लगभग चार गुना कम है। दिलचस्प बात यह है कि यह स्थिति केवल बीएचयू तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के सभी आईआईटी में छात्राओं का औसत प्रतिशत महज 20 फीसदी ही है। 2025 में सभी आईआईटी की 18,188 सीटों में से केवल 3,664 छात्राओं ने दाखिला लिया था।

जहां छात्राएं आगे हैं

इसके विपरीत, बीएचयू के कुछ संकाय ऐसे हैं जहां छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है। दंत विज्ञान संकाय में 76 छात्रों के मुकाबले 106 छात्राएं अध्ययनरत हैं। वहीं, संगीत एवं मंच कला संकाय में 575 छात्राएं पढ़ाई कर रही हैं, जो छात्रों की तुलना में डेढ़ गुना अधिक है। यह दर्शाता है कि रचनात्मक और स्वास्थ्य से जुड़े क्षेत्रों में लड़कियों की रुचि अधिक है।

समग्र लिंगानुपात

बीएचयू और उससे संबद्ध महिला महाविद्यालय (एमएमवी) को मिलाकर भी स्थिति संतुलित नहीं है। विश्वविद्यालय में कुल 26 हजार विद्यार्थियों में से 16 हजार छात्र और केवल 9 हजार छात्राएं हैं। यानी छात्राओं की संख्या छात्रों की तुलना में डेढ़ गुना कम है। यह अंतर तब और चौंकाने वाला हो जाता है जब एमएमवी की 2,572 छात्राओं को भी इसी आंकड़े में शामिल किया जाता है।

सबसे अधिक और सबसे कम अंतर वाले संकाय

बीएचयू के कुछ संकायों में लैंगिक असमानता बेहद गंभीर है। संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में 729 छात्रों के मुकाबले केवल 31 छात्राएं हैं, यानी यहां छात्राएं 22 गुना कम हैं। इसी तरह विधि संकाय में 1,100 छात्रों के सामने 215 छात्राएं, कृषि विज्ञान में 879 छात्रों के मुकाबले 351 छात्राएं, कला संकाय में 4,500 छात्रों की तुलना में 1,350 छात्राएं, और सामाजिक विज्ञान संकाय में 2,137 छात्रों के सामने 539 छात्राएं हैं।

वहीं, कुछ संकायों में लैंगिक अंतर अपेक्षाकृत कम है। पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान में 63 छात्रों के मुकाबले 47 छात्राएं, आयुर्वेद संकाय में 271 छात्रों के सामने 207 छात्राएं, दृश्य कला संकाय में 360 छात्रों की तुलना में 234 छात्राएं, शिक्षा संकाय में 457 छात्रों के मुकाबले 226 छात्राएं, और मेडिसिन संकाय में 750 छात्रों के सामने 520 छात्राएं अध्ययनरत हैं।