फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी पर महाकाल स्वरूप में सजे बाबा गरीब नाथ, भक्तों संग खेली रंग-गुलाल व फूलों की होली
मुजफ्फरपुर जिले के तिरहुत प्रमंडल में स्थित बाबा गरीब नाथ धाम में फाल्गुन माह के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी तिथि पर एक विशेष आयोजन किया गया। इस दिन बाबा गरीब नाथ के साथ होली खेलने की परंपरा निभाई गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्रित हुए। पूरे मंदिर में भक्तिमय माहौल छाया रहा और जयघोष से परिसर गूंजता रहा।
महाकाल स्वरूप में भव्य श्रृंगार
होली उत्सव से पहले बाबा गरीबनाथ का विशेष श्रृंगार किया गया। इसमें रंग-बिरंगे पुष्पों, भस्म और गुलाल का उपयोग हुआ। बाबा को उज्जैन के महाकालेश्वर स्वरूप में सजाया गया, जो देखने में अत्यंत भव्य था। महाश्रृंगार के बाद महा पूजा और महा आरती का आयोजन हुआ। इसके बाद उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। बाबा के इस अलौकिक रूप और अनोखे आयोजन को देखकर भक्त भाव-विभोर हो गए।
महाकाल दल की सहभागिता
इस अवसर पर महाकाल दल के सदस्यों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया। आरती और पूजन के बाद भक्तों ने बाबा गरीब नाथ के साथ रंग, गुलाल और पुष्पों से होली खेली। मंदिर परिसर में भक्ति और उत्सव का संगम देखने को मिला। आयोजन के दौरान धार्मिक परंपराओं और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा गया।
प्रधान पुजारी ने बताया परंपरा का महत्व
बाबा गरीबनाथ धाम के प्रधान पुजारी पंडित विनय पाठक ने इस परंपरा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रंगभरी एकादशी के बाद बाबा के साथ होली खेलने की परंपरा है। सबसे पहले बाबा गरीबनाथ जी का दूध, दही, घी, शक्कर और गंगा जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद महाश्रृंगार किया गया, जिसमें विभिन्न प्रकार के पुष्प, रंग, गुलाल और भस्म का उपयोग हुआ। उनके अनुसार इस आयोजन का मुख्य भाव यह है कि भक्त और भगवान के बीच कोई भेद न रहे।
भक्तों में उत्साह और श्रद्धा
रंगों के इस पर्व पर बाबा के साथ होली खेलने को श्रद्धालु विशेष आस्था से जोड़ते हैं। भक्तों का मानना है कि बाबा गरीब नाथ के साथ रंग-गुलाल खेलना उनकी असीम कृपा का प्रतीक है। इससे जीवन में खुशियों के रंग भरते हैं। आयोजन के दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्तिभाव और उल्लास से सराबोर रहा।