सोशल मीडिया की जवाबदेही: सामाजिक विश्वास और सौहार्द पर केंद्रीय मंत्री का बयान

केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि इन ऑनलाइन माध्यमों का मूल्यांकन केवल तकनीकी सुविधा के आधार पर नहीं, बल्कि समाज पर उनके प्रभाव के संदर्भ में किया जाना चाहिए। मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि हजारों वर्षों में विकसित हुए सामाजिक भरोसे और आपसी सौहार्द पर इन प्लेटफॉर्म्स के प्रभाव का स्पष्ट आकलन आवश्यक है।

भरोसे और सामाजिक ताने-बाने पर सवाल

एक विशेष साक्षात्कार में वैष्णव ने कहा कि हालिया आर्थिक सर्वेक्षण ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर किया है। सोशल मीडिया आज सूचना, संपर्क और सीखने का एक प्रमुख साधन बन गया है, लेकिन इसके लाभ तभी सार्थक हैं जब सामग्री विश्वसनीय हो और प्लेटफॉर्म अपनी जिम्मेदारी को समझें। मंत्री ने स्पष्ट रूप से पूछा कि क्या ये मंच समाज में विश्वास बढ़ा रहे हैं या तनाव और संघर्ष को जन्म दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह जांचना आवश्यक है कि प्लेटफॉर्म्स समाज में मूल्य जोड़ रहे हैं या सामाजिक ढांचे को कमजोर कर रहे हैं।

बच्चों पर बढ़ते नकारात्मक प्रभाव की चिंता

मंत्री ने विशेष रूप से बच्चों पर सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद सामग्री कितनी भरोसेमंद है और निर्धारित नियमों के तहत आवश्यक जांच-पड़ताल हो रही है या नहीं। यह मुद्दा सरकार के उस रुख से जुड़ा है जिसमें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के कारण बच्चों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को लेकर गहरी चिंता जताई गई है।

आर्थिक सर्वेक्षण की सिफारिशें

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के लिए उम्र-आधारित पहुंच निर्धारित करने का सुझाव दिया गया है। सर्वेक्षण में सोशल मीडिया की लत से बचाने के लिए ऑनलाइन शिक्षा को सीमित करने की भी बात कही गई है। इसमें यह भी सिफारिश की गई है कि स्कूलों को बच्चों की डिजिटल आदतों को सुधारने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। शिक्षा के लिए सरल उपकरणों को बढ़ावा देने की बात कही गई है, ताकि बच्चे हानिकारक सामग्री से दूर रह सकें। सर्वेक्षण में सोशल मीडिया, सट्टेबाजी ऐप्स, ऑटो-प्ले सुविधाओं और लक्षित विज्ञापनों के लिए सख्त आयु सत्यापन और उम्र के अनुसार सेटिंग्स लागू करने की सिफारिश की गई है।

राज्य स्तर पर चर्चा और वैश्विक परिप्रेक्ष्य

सर्वेक्षण जारी होने के बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने बताया कि आंध्र प्रदेश और गोवा सरकारें उम्र-आधारित ऑनलाइन पहुंच के लिए नीति पर विचार कर रही हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में केवल सरकारी नीति ही नहीं, बल्कि समाज, स्कूल और माता-पिता की भूमिका भी अहम है। ऑस्ट्रेलिया की तरह बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर कानून बनाने के सवाल पर नागेश्वरन ने कहा कि उन्हें भारत सरकार की किसी ठोस योजना की जानकारी नहीं है।

प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही पर कानूनी कदम

पिछले महीने अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट कहा था कि सोशल मीडिया कंपनियों को अपनी सामग्री की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि संसदीय स्थायी समिति पहले ही प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने के लिए सख्त कानून की सिफारिश कर चुकी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की संसदीय समिति ने भी फर्जी खबरों और गलत सूचना को रोकने के लिए सोशल मीडिया और मध्यस्थ प्लेटफॉर्म्स को अधिक जवाबदेह बनाने की सिफारिश की है।