बीफार्म पाठ्यक्रम में 12 वर्षों के बाद सबसे बड़ा सुधार, अब पढ़ाई जाएगी पायथन प्रोग्रामिंग
फार्मेसी शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ है। फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने बैचलर ऑफ फार्मेसी (बी.फार्म) के पाठ्यक्रम में पिछले 12 वर्षों के बाद सबसे बड़ा संशोधन किया है। नए पाठ्यक्रम में आधुनिक तकनीकों को प्रमुखता से शामिल किया गया है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और पायथन प्रोग्रामिंग जैसे विषय शामिल हैं। इस बदलाव का उद्देश्य छात्रों को उद्योग की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।
नए पाठ्यक्रम की मुख्य विशेषताएं
नए सिलेबस को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत तैयार किया गया है। इसमें केवल किताबी ज्ञान पर ध्यान केंद्रित नहीं किया गया है, बल्कि छात्रों में वैज्ञानिक सोच, नैदानिक समझ और तकनीकी नवाचार की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया गया है। पीसीआई के अध्यक्ष के अनुसार, बदलते स्वास्थ्य क्षेत्र और डिजिटल तकनीकों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यह आवश्यक हो गया था कि फार्मासिस्टों को नई पीढ़ी की तकनीकों से सुसज्जित किया जाए।
पहले सेमेस्टर से डिजिटल शिक्षा की शुरुआत
नए पाठ्यक्रम में डिजिटल शिक्षा को पहले सेमेस्टर से ही शामिल कर लिया गया है। छात्रों को शुरुआती सेमेस्टर में ‘फार्मास्युटिकल साइंसेज के लिए पायथन प्रोग्रामिंग की बुनियादी बातें’ पढ़ाई जाएंगी। दूसरे सेमेस्टर में एप्लाइड बायोस्टैटिस्टिक्स और डेटा एनालिटिक्स जैसे विषय होंगे, जबकि तीसरे सेमेस्टर में मशीन लर्निंग की जानकारी दी जाएगी। छठे सेमेस्टर में फार्मास्युटिकल साइंसेज में एआई के अनुप्रयोग, सातवें सेमेस्टर में क्लिनिकल एप्लीकेशन में एआई और आठवें सेमेस्टर में एआई से जुड़े नैतिक पहलुओं और उनके व्यावहारिक प्रयोगों को पढ़ाया जाएगा।
छात्रों को मिलेंगे अधिक विकल्प
नए पाठ्यक्रम में छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार विषय चुनने की स्वतंत्रता दी गई है। वे स्किल एनहांसमेंट कोर्स (एसईसी), एबिलिटी एनहांसमेंट कोर्स (एईसी) और वैल्यू एडेड कोर्स (वीएसी) के माध्यम से अपने करियर को आकार दे सकेंगे। इनमें ग्रीन केमिस्ट्री, मेडिकल डिवाइस, साइंटिफिक राइटिंग, ड्रग स्टोर मैनेजमेंट, कंप्यूटर एडेड ड्रग डिजाइन, प्रोफेशनल स्किल्स, क्लीनिंग वैलिडेशन और इम्प्योरिटी प्रोफाइलिंग जैसे विविध विषय शामिल हैं।
इंटर्नशिप और शोध परियोजनाएं अनिवार्य
नए पाठ्यक्रम के तहत छात्रों को दो चरणों में इंटर्नशिप पूरी करनी होगी। इसके लिए कम से कम 240 घंटे का प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है। यह प्रशिक्षण फार्मास्यूटिकल, कॉस्मेटिक्स, मेडिकल डिवाइस, फूड इंडस्ट्री, अस्पताल और सामुदायिक फार्मेसी जैसे क्षेत्रों में प्राप्त किया जा सकेगा। इसके अलावा, सातवें और आठवें सेमेस्टर में शोध परियोजनाएं भी अनिवार्य होंगी, जिनके माध्यम से छात्रों को अनुसंधान और नवाचार से जोड़ा जाएगा।
मूल्यांकन प्रणाली में बड़ा बदलाव
नए सिलेबस में मूल्यांकन प्रणाली को भी पूरी तरह से बदल दिया गया है। अब केवल अंतिम परीक्षा के आधार पर अंक नहीं दिए जाएंगे, बल्कि पूरे सेमेस्टर के दौरान किए गए असाइनमेंट, क्विज, ग्रुप डिस्कशन, फील्ड वर्क और सेशनल टेस्ट भी अंतिम परिणाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यह प्रणाली छात्रों के समग्र विकास को प्रोत्साहित करेगी।
उपस्थिति और फील्ड विजिट के नए नियम
छात्रों के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। उपस्थिति के आधार पर अतिरिक्त अंक भी दिए जाएंगे, जबकि 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति होने पर अंक नहीं मिलेंगे। साथ ही, प्रत्येक फार्मेसी संस्थान को छात्रों के लिए हर वर्ष कम से कम एक औद्योगिक या फील्ड विजिट आयोजित करनी होगी। संस्थानों को गांव या वार्ड गोद लेकर सामुदायिक सेवा, दवा उपयोग जागरूकता अभियान और मरीज परामर्श जैसी गतिविधियां भी संचालित करनी होंगी।
सेमेस्टर रिपीट करने की बाध्यता समाप्त
एक महत्वपूर्ण बदलाव यह भी किया गया है कि यदि कोई छात्र किसी सेमेस्टर में फेल हो जाता है, तो उसे उस सेमेस्टर को दोबारा नहीं पढ़ना पड़ेगा। वह अगले सेमेस्टर की पढ़ाई जारी रख सकेगा, हालांकि उसे फेल सेमेस्टर की परीक्षा फिर से देनी होगी। इससे छात्रों का समय और शैक्षणिक वर्ष बर्बाद होने से बचेगा।
क्रेडिट प्रणाली में बदलाव
नई च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) व्यवस्था के तहत बी.फार्म डिग्री प्राप्त करने के लिए छात्रों को कम से कम 193 क्रेडिट अर्जित करने होंगे। इसमें थ्योरी, प्रैक्टिकल, इंटर्नशिप और प्रोजेक्ट सभी को क्रेडिट के रूप में मान्यता दी गई है। यह प्रणाली छात्रों को अपनी पढ़ाई में अधिक लचीलापन प्रदान करेगी।
नवाचार और उद्यमिता पर जोर
नए सिलेबस में इनोवेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम विषय को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नवाचार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। इससे छात्र फार्मेसी क्षेत्र में नए व्यवसाय शुरू कर सकेंगे और नई तकनीकों का विकास कर सकेंगे।