आर्टेमिस-2 ने चांद के नज़दीक से भेजे अद्भुत नज़ारे, देखिए तस्वीरें
पचास साल के लंबे अंतराल के बाद मानवता एक बार फिर चंद्रमा के करीब पहुंची है। नासा के आर्टेमिस-2 मिशन ने चांद की सतह के बेहद पास से गुज़रते हुए ऐसे अद्भुत वीडियो और तस्वीरें पृथ्वी पर भेजी हैं, जिन्होंने दुनिया को हैरान कर दिया है। इन छवियों में चांद के गड्ढे, पहाड़ियां और घाटियां इतनी साफ़ दिखाई दे रही हैं, मानो कोई विमान किसी पर्वत श्रृंखला के ऊपर से उड़ रहा हो। इस मिशन ने उस ऐतिहासिक पल को फिर से जीवंत कर दिया है जब आधी सदी पहले इंसान पहली बार चंद्रमा के इतने करीब पहुंचा था।
चांद के उस पार 40 मिनट का सन्नाटा
इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान एक ऐसा क्षण भी आया जब पूरी दुनिया ने सांस रोक ली थी। जब ओरियन कैप्सूल चंद्रमा के उस हिस्से के पीछे चला गया जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता, तो नासा के गहरे अंतरिक्ष संचार नेटवर्क से उसका संपर्क पूरी तरह टूट गया। यह करीब 40 मिनट का ब्लैकआउट मिशन का एक नियोजित लेकिन सबसे चुनौतीपूर्ण चरण था। जैसे ही यान चांद के दूसरी ओर से निकला और सिग्नल वापस आने शुरू हुए, वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष प्रेमियों में जश्न का माहौल छा गया। एक जाने-माने उद्यमी ने इस पल पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इंसान का एक बार फिर चांद की कक्षा में होना एक सपने के सच होने जैसा है।
इतिहास में दर्ज होगा यह मिशन
आर्टेमिस-2 मिशन केवल एक तकनीकी कामयाबी नहीं है, बल्कि यह मानवीय साहस और जिज्ञासा की एक नई कहानी लिख रहा है। 1970 के दशक के अपोलो-13 मिशन के बाद यह पहली बार है जब इंसान फिर से चंद्रमा के चक्कर में पहुंचा है। ये तस्वीरें न सिर्फ वैज्ञानिक प्रगति का सबूत हैं, बल्कि यह भी दिखाती हैं कि अंतरिक्ष में हमारी पहुंच पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो चुकी है। इन नज़ारों ने लोगों के मन में ब्रह्मांड के प्रति उत्साह और जिज्ञासा को एक नई आग दी है।
अपोलो-13 का रिकॉर्ड टूटा
आर्टेमिस-2 ने चंद्रमा का चक्कर लगाने के बाद अब पृथ्वी की ओर वापसी शुरू कर दी है। इस फ्लाईबाय के दौरान अंतरिक्ष यान चांद की सतह से महज 6,545 किलोमीटर की दूरी पर था। इस मिशन ने अपोलो-13 द्वारा 50 साल पहले बनाए गए दूरी के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है। साल 1970 में अपोलो-13 मिशन ने पृथ्वी से 4,00,171 किलोमीटर की दूरी तय की थी, जबकि आर्टेमिस-2 ने 4,06,771 किलोमीटर की दूरी तय कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
क्या है आर्टेमिस-2 मिशन?
आर्टेमिस-2, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत ओरियन अंतरिक्ष यान की पहली मानवयुक्त उड़ान है। यह चंद्रमा पर उतरने वाला मिशन नहीं है, बल्कि यह एक चंद्र परिक्रमा मिशन है, जिसमें अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाकर बिना सतह पर उतरे पृथ्वी पर वापस लौटेंगे। नासा का चंद्रमा पर अंतिम मिशन अपोलो-17 था, जिसे दिसंबर 1972 में लॉन्च किया गया था।
आर्टेमिस-2 मिशन को 1 अप्रैल, 2026 को अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट के ज़रिए लॉन्च किया गया था। करीब 10 दिनों के इस मिशन के बाद 10 अप्रैल को ओरियन अंतरिक्ष यान प्रशांत महासागर में उतरकर पृथ्वी पर लौटेगा।
इस मिशन को चार अंतरिक्ष यात्री अंजाम दे रहे हैं:
- रीड वाइजमैन (कमांडर)
- विक्टर ग्लोवर
- क्रिस्टिना कोच
- कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसेन