एपल के 50 साल: जब माइक्रोसॉफ्ट ने डूबती कंपनी को थामा, 1997 की वह डील जिसने सब कुछ बदल दिया

आज दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में गिनी जाने वाली एपल एक समय पर दिवालिया होने के कगार पर खड़ी थी। साल 1997 में माइक्रोसॉफ्ट के साथ हुई एक असामान्य साझेदारी ने एपल को नई जिंदगी दी और यहीं से उसकी वापसी की कहानी शुरू हुई। आइए जानते हैं एपल के 50 साल के इस सफर के बारे में।

वह समय जब हालात बेहद खराब थे

एपल आज अपनी 50वीं सालगिरह मना रहा है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब यह कंपनी अपने अस्तित्व को बचाने के लिए जूझ रही थी। 1997 में स्थितियां इतनी गंभीर हो गई थीं कि कंपनी को तुरंत स्थिरता की आवश्यकता थी। तभी वापसी कर चुके स्टीव जॉब्स ने अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी माइक्रोसॉफ्ट से हाथ मिलाने का चौंकाने वाला फैसला लिया।

मैकवर्ल्ड की डील ने बदली एपल की दिशा

6 अगस्त 1997 को मैकवर्ल्ड बोस्टन इवेंट में स्टीव जॉब्स ने माइक्रोसॉफ्ट के साथ पांच साल की एक डील की घोषणा की। यह खबर सुनकर सभी हैरान रह गए। उसी दौरान माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्क्रीन पर दिखाई दिए और इस साझेदारी की पुष्टि की।

इस समझौते में क्या था खास?

इस समझौते के तहत कई महत्वपूर्ण बातें तय हुईं:

  • माइक्रोसॉफ्ट ने एपल में 150 मिलियन डॉलर का निवेश किया। यह निवेश बिना वोटिंग अधिकार वाले शेयरों के रूप में था, जिससे एपल पर नियंत्रण उसके पास ही रहा।
  • माइक्रोसॉफ्ट ने मैक के लिए अपने Office सॉफ्टवेयर को कम से कम पांच साल तक जारी रखने का वादा किया। उस समय Office व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के लिए बेहद जरूरी था।
  • एपल ने अपने उपकरणों में Internet Explorer को डिफॉल्ट ब्राउजर बनाने पर सहमति दी।
  • दोनों कंपनियों ने पेटेंट विवादों को खत्म कर तकनीक साझा करने का फैसला किया।

यह डील क्यों थी इतनी अहम?

यह डील एपल के लिए जीवन रेखा साबित हुई। इससे कंपनी को आर्थिक सहारा मिला और बाजार में उसके प्रति भरोसा भी बढ़ा। Office की उपलब्धता ने एपल को पेशेवर उपयोगकर्ताओं के बीच लोकप्रिय बनाए रखा। माइक्रोसॉफ्ट को भी इसका लाभ हुआ, क्योंकि इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बनी रही और उसके सॉफ्टवेयर मैक उपयोगकर्ताओं तक पहुंचते रहे।

एपल की वापसी की शुरुआत

यह डील सिर्फ मदद नहीं थी, बल्कि एक रणनीतिक कदम था। स्टीव जॉब्स का लक्ष्य माइक्रोसॉफ्ट को हराना नहीं, बल्कि एपल को फिर से खड़ा करना था। इसके बाद एपल ने iMac, iPod और iPhone जैसे उत्पाद लॉन्च किए, जिन्होंने कंपनी की दिशा ही बदल दी। 1997 की यह साझेदारी टेक इतिहास की सबसे अनोखी घटनाओं में से एक मानी जाती है, जिसने दिखाया कि सही समय पर लिया गया फैसला किसी भी कंपनी की किस्मत बदल सकता है।