केंद्रीय बजट 2026: शिक्षा क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों का निवेश और बदलाव

केंद्रीय बजट 2026 में शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले निवेश को लेकर देशभर में चर्चा है। वित्त मंत्री 1 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगी, जिसमें शिक्षा और उच्च शिक्षा से जुड़ी कई घोषणाएं होने की उम्मीद है। आइए, पिछले पांच वर्षों के शिक्षा बजट का विश्लेषण करके समझते हैं कि इस दौरान कितना निवेश हुआ, किन योजनाओं को प्राथमिकता मिली और क्या-क्या बड़े बदलाव देखने को मिले।

वर्ष 2021-22: नई शिक्षा नीति की नींव

वित्तीय वर्ष 2021-22 में शिक्षा मंत्रालय को 93,224 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो पिछले वर्ष के वास्तविक खर्च से 2.1 प्रतिशत अधिक था। इस बजट की सबसे बड़ी खासियत राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत किए गए ऐलान थे। सरकार ने नए स्कूल खोलने और लेह में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की घोषणा की, जिसका उद्देश्य स्कूली और उच्च शिक्षा तक पहुंच को व्यापक बनाना था।

स्कूली शिक्षा के लिए 54,874 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया, जो पिछले वर्ष के खर्च से 2.2 प्रतिशत अधिक था। वहीं, उच्च शिक्षा के लिए 38,351 करोड़ रुपये आवंटित हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इस बजट ने शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया।

वर्ष 2022-23: बजट में उल्लेखनीय वृद्धि

वित्तीय वर्ष 2022-23 में शिक्षा मंत्रालय का बजट बढ़कर 1.04 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह पिछले वर्ष के संशोधित खर्च से 18.5 प्रतिशत अधिक था। इस बजट का मुख्य लक्ष्य शिक्षा क्षेत्र में सुधार लाना और छात्रों की पहुंच बढ़ाना था।

स्कूली शिक्षा के लिए 63,449.37 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान से 22.1 प्रतिशत ज्यादा थे। उच्च शिक्षा के लिए 40,828 करोड़ रुपये का बजट रखा गया, जो 13.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इस दौरान मॉडल स्कूलों की स्थापना, शिक्षक प्रशिक्षण और चुनिंदा संस्थानों में छात्रवृत्ति योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया।

वर्ष 2023-24: समग्र शिक्षा पर जोर

वित्तीय वर्ष 2023-24 में शिक्षा मंत्रालय को 1,12,899 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो पिछले साल की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक था। यह राशि सरकार के कुल अनुमानित खर्च का 2.9 प्रतिशत थी। इस बजट में समग्र शिक्षा अभियान के लिए 37,453 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया, जिससे स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने की कोशिश की गई।

स्कूली शिक्षा के लिए 68,805 करोड़ रुपये आवंटित हुए, जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान से 16.5 प्रतिशत अधिक थे। उच्च शिक्षा के लिए 44,095 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया, जो 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इस बजट में एकलव्य स्कूलों में 38,000 से अधिक शिक्षकों की भर्ती की घोषणा भी शामिल थी, जिससे आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा मिला।

वर्ष 2024-25: कौशल विकास और रोजगार पर फोकस

वित्तीय वर्ष 2024-25 में शिक्षा मंत्रालय ने स्किल इंडिया मिशन के तहत 1.4 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण और कौशल विकास का लाभ पहुंचाया। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़े विस्तार की योजना बनाई गई, जिसमें 7 नए आईआईटी, 16 आईआईआईटी, 15 एम्स और 7 आईआईएम खोलना शामिल था।

इस बजट का उद्देश्य केवल शिक्षा तक पहुंच बढ़ाना ही नहीं था, बल्कि युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करना भी था। शिक्षा और कौशल विकास को जोड़कर एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया गया, जिससे छात्रों को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार किया जा सके।

वर्ष 2025-26: निरंतर वृद्धि की राह

केंद्रीय बजट 2025-26 में शिक्षा के लिए 1,28,650.05 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 6.65 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। पिछले वर्ष शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास के लिए कुल 1.48 लाख करोड़ रुपये का आवंटन हुआ था, जिसमें से लगभग 1.21 लाख करोड़ रुपये स्कूली और उच्च शिक्षा के लिए निर्धारित थे।

पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो शिक्षा बजट में लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2021-22 में 93,224 करोड़ रुपये से लेकर 2025-26 में 1,28,650 करोड़ रुपये तक का सफर शिक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस दौरान नई शिक्षा नीति को लागू करने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है।

शिक्षा बजट में हुई यह वृद्धि देश के युवाओं को बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। आने वाले बजट में भी शिक्षा क्षेत्र को और अधिक संसाधन मिलने की उम्मीद है, जिससे भारत को ज्ञान और कौशल का वैश्विक केंद्र बनाने में मदद मिलेगी।