एआई समिट 2026: भारत का डेटा योगदान अमेरिका से 33% अधिक, अमिताभ कांत का बड़ा बयान
नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दूसरे दिन एक महत्वपूर्ण चर्चा हुई। पूर्व नीति आयोग सीईओ अमिताभ कांत ने इस मौके पर कहा कि भारत वैश्विक एआई इकोसिस्टम में अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत चैटजीपीटी जैसे लोकप्रिय एआई प्लेटफॉर्म को अमेरिका की तुलना में 33 प्रतिशत अधिक डेटा प्रदान कर रहा है। यह आंकड़ा डिजिटल दुनिया में भारत के बढ़ते प्रभाव को साफ दर्शाता है।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई की चुनौती
अमिताभ कांत ने अपने संबोधन में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि डीपीआई का मजबूत ढांचा नहीं होगा, तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता दुनिया भर में असमानता को और बढ़ा सकती है। उनके अनुसार, विकासशील देशों से पहले से ही भारी मात्रा में डेटा वैश्विक एआई मॉडलों को प्रशिक्षित करने में उपयोग हो रहा है। यह डेटा इन मॉडलों को बेहतर बना रहा है, लेकिन इसका लाभ अक्सर इन देशों को नहीं मिल पाता।
स्वदेशी एआई मॉडल की आवश्यकता
कांत ने स्पष्ट कहा कि भारत को अपने डेटा के आधार पर खुद के एआई मॉडल विकसित करने चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि विदेशी प्लेटफॉर्म पर निर्भरता भारत को उन्हीं महंगे उत्पादों पर आश्रित बना सकती है, जो उसके नागरिकों के डेटा से तैयार किए गए हैं। उनके अनुसार, घरेलू डेटा सेट पर प्रशिक्षित स्वदेशी मॉडल न केवल किफायती होंगे, बल्कि रणनीतिक स्वायत्तता भी सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ का डेटा मॉडलों को बेहतर बना रहा है, लेकिन ये मॉडल बाद में उन्हीं देशों को महंगे उत्पाद बेचेंगे।
एआई से बढ़ सकती हैं असमानताएं
पूर्व नीति आयोग सीईओ ने एआई के केंद्रीकरण से उत्पन्न खतरों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यदि एआई तकनीक कुछ चुनिंदा लोगों या देशों के हाथों में सीमित रही, तो सामाजिक और आर्थिक असमानताएं और गहरी हो जाएंगी। उन्होंने सुझाव दिया कि गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों तक एआई की पहुंच सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए। कांत के अनुसार, एआई को विशेष रूप से ग्लोबल साउथ में विकास लक्ष्यों की पूर्ति के लिए काम करना चाहिए, जहां यह स्वास्थ्य, शिक्षा और शासन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
भारत मंडपम में वैश्विक भागीदारी
16 से 20 फरवरी तक चलने वाला यह सम्मेलन भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है। इसे ग्लोबल साउथ में आयोजित पहला बड़ा वैश्विक एआई समिट माना जा रहा है। इसके साथ ही ‘एआई इम्पैक्ट एक्सपो’ भी लगाया गया है, जिसमें दुनिया भर की टेक कंपनियां, स्टार्टअप, शोध संस्थान, केंद्रीय मंत्रालय और राज्य सरकारें भाग ले रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार शाम इस एक्सपो का उद्घाटन किया और विभिन्न स्टॉल पर जाकर स्टार्टअप्स और कंपनियों से बातचीत की। इस प्रदर्शनी में 600 से अधिक उभरते स्टार्टअप और 13 देशों के पवेलियन शामिल हैं। इन देशों में ऑस्ट्रेलिया, जापान, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, सर्बिया, एस्टोनिया, ताजिकिस्तान और अफ्रीका के प्रतिनिधि शामिल हैं।
फ्रांस के राष्ट्रपति की भागीदारी
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपनी पत्नी ब्रिजिट मैक्रों के साथ मुंबई पहुंच चुके हैं और 19 फरवरी तक भारत दौरे पर रहेंगे। मुंबई में कार्यक्रमों के बाद वह दिल्ली पहुंचकर एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेंगे। उनकी मौजूदगी इस सम्मेलन के वैश्विक महत्व को और बढ़ा देती है।
भारी जनभागीदारी की उम्मीद
इस समिट को लेकर आम जनता में भी काफी उत्साह देखा जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, 2.5 लाख से अधिक विजिटर्स और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन के बाद 17 फरवरी से इस कार्यक्रम को आम लोगों के लिए भी खोल दिया गया है, जिससे अधिक से अधिक लोग एआई तकनीक को करीब से देख और समझ सकें।