एंथ्रोपिक का AI मॉडल माइथोस: अमेरिकी गोपनीय सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल
एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी एंथ्रोपिक के उन्नत AI मॉडल माइथोस ने परीक्षण के दौरान अमेरिका के अत्यधिक संवेदनशील और गोपनीय कंप्यूटर सिस्टम में कई सुरक्षा खामियों को मात्र कुछ घंटों में उजागर कर दिया। इस घटना ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर AI के संभावित प्रभाव और सरकारी नियंत्रण की आवश्यकता पर एक नई बहस छेड़ दी है।
प्रोजेक्ट ग्लासविंग के तहत हुआ परीक्षण
यह परीक्षण एंथ्रोपिक के ‘प्रोजेक्ट ग्लासविंग’ नामक कार्यक्रम के अंतर्गत किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य यह समझना है कि भविष्य के शक्तिशाली AI मॉडल दुनिया के महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर और डिजिटल बुनियादी ढांचे के लिए कितना बड़ा खतरा पैदा कर सकते हैं। कंपनी का मानना है कि ऐसे AI मॉडल सार्वजनिक सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए उनकी क्षमताओं का पहले से परीक्षण करना आवश्यक है।
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह परीक्षण एंथ्रोपिक और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के सहयोग से किया गया था। परीक्षण के नतीजे हैरान करने वाले थे – माइथोस ने बहुत ही कम समय में सिस्टम की कई कमजोरियों को पहचान लिया। हालांकि, एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि खामियां ढूंढने का मतलब यह नहीं है कि AI ने उन कमजोरियों का फायदा उठाकर सिस्टम को हैक कर लिया या कोई नुकसान पहुंचाया।
सीनेट में उठा मामला
इस चौंकाने वाली घटना की गूंज अमेरिकी संसद तक पहुंच गई है। 11 जून को सीनेट की बैंकिंग, हाउसिंग और शहरी मामलों की समिति की सुनवाई के दौरान, वर्जीनिया के डेमोक्रेटिक सीनेटर मार्क वार्नर ने इस परीक्षण का जिक्र किया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस AI टूल ने लगभग सभी गोपनीय सिस्टम को हफ्तों में नहीं, बल्कि सिर्फ घंटों में भेद दिया। सीनेटर वार्नर ने यह जानकारी नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी और यूएस साइबर कमांड के प्रमुख जनरल जोशुआ रुड के हवाले से दी। हालांकि, जब इस गंभीर मुद्दे पर एनएसए और एंथ्रोपिक से टिप्पणी मांगी गई, तो दोनों ने ही कोई बयान देने से इनकार कर दिया।
प्रशासन और एंथ्रोपिक के बीच बढ़ता तनाव
भले ही एंथ्रोपिक ने अमेरिकी एजेंसियों के साथ मिलकर यह परीक्षण किया हो, लेकिन इस कैलिफोर्नियाई कंपनी और ट्रंप प्रशासन के बीच संबंध तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। एक ओर एंथ्रोपिक इस बात को लेकर चिंतित है कि अमेरिकी सेना उनके AI का इस्तेमाल किस तरह करेगी, वहीं दूसरी ओर सरकार ने कंपनी के कुछ मॉडल्स पर कड़ी पाबंदियां लगा दी हैं।
इस महीने की शुरुआत में, प्रशासन ने एक निर्देश जारी कर एंथ्रोपिक को अपने सबसे नए AI मॉडल्स – फेबल 5 और माइथोस 5 – के इस्तेमाल से विदेशी नागरिकों को रोकने का आदेश दिया था। यह ध्यान देने योग्य है कि एंथ्रोपिक ने ‘फेबल’ को आम जनता के लिए जारी कर दिया था, जो माइथोस का एक सीमित संस्करण है। लेकिन साइबर सुरक्षा को लेकर गहरी चिंताओं के कारण ‘माइथोस’ तक पहुंच को बेहद प्रतिबंधित रखा गया है।
सरकार का नया फरमान और कंपनी की प्रतिक्रिया
यह कड़ा निर्देश राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित एक कार्यकारी आदेश के ठीक 10 दिन बाद आया। इस आदेश के तहत एक नया ढांचा तैयार किया गया है, जिसमें सबसे उन्नत AI सिस्टम को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने से पहले संघीय सरकार उनके राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों की जांच करेगी। हालांकि, यह आदेश AI डेवलपर्स के लिए स्वैच्छिक है, लेकिन इसका प्रभाव काफी व्यापक माना जा रहा है।
सरकारी फरमान के आगे झुकते हुए, एंथ्रोपिक ने प्रशासन के निर्देशों का पालन करने के लिए अपने सभी ग्राहकों के लिए इन मॉडल्स को बंद कर दिया है। लेकिन कंपनी ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए स्पष्ट किया है कि सुरक्षा चिंताओं को लेकर सरकार द्वारा उठाए गए ये कदम पूरी तरह से अनावश्यक थे। कंपनी का मानना है कि इस तरह के कदम नवाचार को बाधित कर सकते हैं और AI के विकास को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
यह घटनाक्रम AI तकनीक के दोहरे उपयोग को उजागर करता है – एक ओर यह सुरक्षा खामियों को पहचानने में मददगार हो सकता है, वहीं दूसरी ओर इसका दुरुपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा भी बन सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और AI कंपनियों के बीच यह तनाव किस दिशा में जाता है और AI के सुरक्षित उपयोग के लिए क्या नए नियम बनाए जाते हैं।