त्रिपुरा के हर ब्लॉक में खुलेंगे एकलव्य आवासीय विद्यालय, आदिवासी शिक्षा को मिलेगी मजबूती

त्रिपुरा सरकार ने राज्य के आदिवासी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने संकेत दिया है कि राज्य के सभी 58 विकास खंडों में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) स्थापित किए जाएंगे। इस कदम का उद्देश्य दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अनुसूचित जनजाति के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं से जोड़ना है।

केंद्र सरकार की योजना से मिल रहा सहयोग

मुख्यमंत्री ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बताया कि यह पूरी परियोजना केंद्र सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समुदाय के बच्चों को एक उन्नत शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना और उन्हें उच्च शिक्षा के लिए तैयार करना है। एकलव्य स्कूलों के माध्यम से इन छात्रों को न केवल पढ़ाई बल्कि आवासीय सुविधाओं का भी लाभ मिलेगा, जिससे वे अपनी पढ़ाई पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

2018 के बाद बड़ा बदलाव

मुख्यमंत्री माणिक साहा ने बताया कि वर्ष 2018 में भाजपा सरकार के सत्ता में आने से पहले त्रिपुरा में केवल चार एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय थे। सत्ता संभालने के बाद केंद्र सरकार ने राज्य के लिए 21 नए ईएमआरएस को मंजूरी दी। वर्तमान समय में इनमें से 12 स्कूल पूरी तरह से संचालित हो रहे हैं, जबकि दो और स्कूल मार्च 2026 तक शुरू हो जाएंगे। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य सरकार आदिवासी शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से काम कर रही है।

हर ब्लॉक में स्कूल खोलने की मंशा

सीएम साहा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का लक्ष्य हर ब्लॉक में एक एकलव्य स्कूल खोलना है, ताकि आदिवासी छात्रों को अपने ही क्षेत्र में आवासीय और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। उन्होंने बताया कि हाल ही में दिल्ली दौरे के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार से ईएमआरएस स्थापना से जुड़े नियमों में ढील देने का अनुरोध किया है। इससे राज्य के अधिक से अधिक क्षेत्रों में ये स्कूल खोले जा सकेंगे और दूरदराज के गांवों के बच्चों को भी इस योजना का लाभ मिलेगा।

गाइडलाइंस में ढील की जरूरत

मौजूदा नियमों के अनुसार, किसी भी ब्लॉक में एकलव्य स्कूल खोलने के लिए वहां कम से कम 50 प्रतिशत जनजातीय आबादी और न्यूनतम 20 हजार जनजातीय लोगों का होना अनिवार्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने केंद्र सरकार से इन शर्तों में ढील देने की जोरदार मांग की है, ताकि त्रिपुरा के हर कोने में इन स्कूलों की स्थापना संभव हो सके। उन्हें उम्मीद है कि केंद्र सरकार इस मांग पर सकारात्मक विचार करेगी, जिससे राज्य में आदिवासी शिक्षा के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ सकेगा।