कान की समस्या कैसे बिगाड़ सकती है शरीर का संतुलन? अलका याग्निक के मामले ने उठाए अहम सवाल
जून 2026 में पद्म पुरस्कार समारोह के दौरान मशहूर गायिका अलका याग्निक की व्हीलचेयर पर बैठकर बाहर निकलने की तस्वीरों ने हर किसी का ध्यान खींचा। जहां एक तरफ पूरा हॉल उनके सम्मान में तालियां बजा रहा था, वहीं दूसरी तरफ लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा था कि क्या उनकी सुनने की समस्या अब उनके चलने-फिरने और शरीर के संतुलन को भी प्रभावित कर रही है? यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि कानों की सेहत को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
बता दें कि अलका याग्निक पिछले कुछ समय से ‘सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस’ नामक बीमारी से जूझ रही हैं। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें कान के अंदर मौजूद सुनने वाली नाजुक नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। हालांकि, गायिका ने खुद स्पष्ट किया कि व्हीलचेयर का उपयोग केवल लंबे समारोह के बाद हुई थकान के कारण किया गया था, न कि किसी गंभीर बीमारी के चलते। इसके बावजूद, इस घटना ने एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मुद्दे को उजागर किया है: कानों का सीधा संबंध शरीर के संतुलन से होता है।
कान: सिर्फ सुनने का अंग नहीं
हम अक्सर यह मान लेते हैं कि कान का काम केवल आवाज सुनना है, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल और महत्वपूर्ण है। कान के भीतरी हिस्से में एक बेहद संवेदनशील ‘वेस्टिब्युलर सिस्टम’ मौजूद होता है। यह प्रणाली हमारे शरीर को यह बताने का काम करती है कि हम इस समय खड़े हैं, बैठे हैं, झुके हुए हैं या चल रहे हैं।
यह वेस्टिब्युलर सिस्टम हमारी आंखों, मांसपेशियों और मस्तिष्क के साथ मिलकर एक जटिल नेटवर्क बनाता है, जो हमारे शरीर को संतुलित रखता है। जब हम चलते हैं, दौड़ते हैं या सीढ़ियां चढ़ते हैं, तो कान का यह हिस्सा तुरंत मस्तिष्क को संकेत भेजता है। मस्तिष्क इन संकेतों को आंखों और पैरों से मिलने वाली जानकारी से मिलान करता है और शरीर को स्थिर रखता है।
सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस क्या है?
अलका याग्निक को जिस बीमारी का सामना करना पड़ रहा है, वह सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस है। यह समस्या तब उत्पन्न होती है जब:
- भीतरी कान में मौजूद सूक्ष्म हेयर सेल्स क्षतिग्रस्त हो जाती हैं
- कान से मस्तिष्क तक ध्वनि पहुंचाने वाली तंत्रिकाएं प्रभावित हो जाती हैं
सामान्य स्थिति में ध्वनि तरंगें कान के पर्दे और मध्य कान से गुजरकर कोक्लिया तक पहुंचती हैं। यहां मौजूद हेयर सेल्स इन तरंगों को विद्युत संकेतों में बदलकर मस्तिष्क तक भेजती हैं, जिससे हमें आवाज सुनाई देती है। यदि ये हेयर सेल्स नष्ट हो जाएं, तो वे दोबारा नहीं बनते। इस कारण से अधिकांश मामलों में यह समस्या स्थायी मानी जाती है।
कान की समस्या और शरीर का असंतुलन
हर सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस वाले व्यक्ति में संतुलन बिगड़ने की समस्या नहीं होती, लेकिन यदि भीतरी कान का संतुलन तंत्र भी प्रभावित हो जाए, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, कान की समस्या के शिकार कई लोगों को निम्नलिखित दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है:
- बार-बार चक्कर आना
- चलते समय लड़खड़ाना
- असंतुलन महसूस होना
- बार-बार गिरने का खतरा
- सहारे या व्हीलचेयर की आवश्यकता पड़ना
जब भीतरी कान का यह हिस्सा बीमारी, संक्रमण, सूजन या नसों की क्षति के कारण प्रभावित होता है, तो मस्तिष्क को गलत या अधूरी जानकारी मिलने लगती है। इसके कारण व्यक्ति को ऐसा महसूस हो सकता है कि कमरा घूम रहा है या जमीन हिल रही है।
सुनने की क्षमता और स्थानिक जागरूकता
हमारी जगह और दिशा का अंदाजा लगाने में कानों की स्वस्थ सुनने की क्षमता अहम भूमिका निभाती है। दिमाग आवाज का इस्तेमाल करके हमारे आसपास के माहौल का मानसिक नक्शा बनाता है और हमें हमारी स्थिति का एहसास कराता है। जब सुनने की क्षमता कम हो जाती है, तो व्यक्ति उन आवाजों या संकेतों को नहीं सुन पाता जो जगह का अंदाजा लगाने के लिए जरूरी होते हैं। इससे मस्तिष्क के लिए शरीर को पैरों पर स्थिर रखना मुश्किल हो जाता है और संतुलन बनाए रखना कठिन हो जाता है।
मानसिक ऊर्जा का अतिरिक्त खर्च
जब सुनने की क्षमता कम हो जाती है, तो बातचीत समझने और आवाज को प्रोसेस करने के लिए हमारे दिमाग को काफी अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इसके लिए बहुत ज्यादा मानसिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिसे ‘कॉग्निटिव लोड’ कहा जाता है। इस अतिरिक्त मेहनत के कारण शरीर का तालमेल और संतुलन बनाए रखने जैसी चीजों के लिए दिमाग के पास कम संसाधन बचते हैं। नतीजतन, गिरने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
कानों की समस्या के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, कानों में सुनने की समस्या और संतुलन बिगड़ने के कई कारण हो सकते हैं:
- उम्र बढ़ने के साथ स्वाभाविक गिरावट
- अत्यधिक तेज आवाज के लंबे समय तक संपर्क में रहना
- वायरल संक्रमण
- सिर में चोट लगना
- आनुवंशिक कारण
यह समझना महत्वपूर्ण है कि कानों की छोटी-छोटी समस्याएं भी समय के साथ बड़ी परेशानी का कारण बन सकती हैं। अलका याग्निक के मामले ने भले ही यह स्पष्ट कर दिया हो कि उनकी व्हीलचेयर का उपयोग थकान के कारण था, लेकिन इस घटना ने आम लोगों को यह संदेश जरूर दिया है कि कानों की सेहत को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
यदि आपको या आपके किसी परिचित को लगातार चक्कर आना, चलने में अस्थिरता या सुनने में कमी जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो बिना देर किए किसी विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर इलाज और सावधानी से कई गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।