अक्षय तृतीया 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया के नाम से जाना जाता है। इसे आखा तीज भी कहा जाता है। वैदिक शास्त्रों के अनुसार यह एक अत्यंत शुभ अवसर है। इस दिन कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। यह दिन विवाह, मांगलिक कार्यों और खरीदारी के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर किया गया कोई भी शुभ कार्य अक्षय फल प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त ऐसा माना जाता है कि इस दिन खरीदारी करने से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं कि इस वर्ष अक्षय तृतीया कब है, इसकी पूजा विधि और महत्व क्या है।

अक्षय तृतीया तिथि

  • वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि आरंभ: 19 अप्रैल, प्रातः 10:50 बजे से
  • तृतीया तिथि समाप्त: 20 अप्रैल, प्रातः 7:28 बजे
  • अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जाएगी।

अक्षय तृतीया पूजा विधि

अक्षय तृतीया के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के पूजा स्थल को पवित्र गंगाजल से शुद्ध करें।

एक चौकी या आसन पर लाल अथवा पीला वस्त्र बिछाएं और उस पर देवी लक्ष्मी तथा भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। अपने हाथों में जल, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत रखने का संकल्प लें।

तत्पश्चात, देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमाओं पर रोली, चंदन का लेप, हल्दी और कुमकुम का तिलक लगाएं। भगवान विष्णु को पीले पुष्प अर्पित करें और देवी लक्ष्मी को कमल अथवा गुलाबी रंग के पुष्प चढ़ाएं।

पूजा स्थल पर अगरबत्ती जलाएं और घी का दीपक प्रज्वलित करें। नैवेद्य के रूप में भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को जौ या गेहूं का सत्तू, फल, मिठाइयां और भीगे हुए चने अर्पित करें।

‘विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। अक्षय तृतीया से जुड़ी पवित्र कथा को सुनें अथवा पढ़ें। अंत में, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करके पूजा का समापन करें।

अपनी सामर्थ्य और क्षमता के अनुसार गरीबों, ब्राह्मणों अथवा जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, जल, फल, सोना या चांदी का दान करें।

अक्षय तृतीया का महत्व

अक्षय तृतीया के दिन किया गया कोई भी पुण्य कार्य ‘अक्षय’ फल देता है। इस दिन व्यक्ति को दान, ध्यान, गंगा स्नान और पूजा-पाठ जैसे कार्यों में संलग्न रहना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किसी भी नए कार्य की शुरुआत करने से समृद्धि आती है।

पुराणों में उल्लेख है कि अक्षय तृतीया के दिन ही गंगा मां स्वर्ग से मृत्युलोक में अवतरित हुई थीं। यह दिन नए युग की शुरुआत का भी प्रतीक है। धार्मिक मान्यता है कि सत्य, त्रेता और द्वापर युग इन सभी की शुरुआत अक्षय तृतीया के दिन ही हुई थी। हर साल इस पवित्र दिन पर उत्तराखंड में गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट खोले जाते हैं, जिसके साथ ही चार धाम यात्रा की पूर्ण रूप से शुरुआत हो जाती है।

यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है।