उच्च शिक्षा में ऐतिहासिक उछाल: नामांकन 4.5 करोड़ के पार, महिलाओं की भागीदारी ने तोड़े रिकॉर्ड
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) 2022-23 और 2023-24 की रिपोर्ट में देश के उच्च शिक्षा परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में उच्च शिक्षा में छात्रों की कुल संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई है, जो अब 4.5 करोड़ तक पहुंच गई है। सबसे उल्लेखनीय पहलू महिला छात्रों, अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों के नामांकन में हुई अभूतपूर्व वृद्धि है।
AISHE सर्वेक्षण: उच्च शिक्षा का व्यापक दस्तावेज
AISHE एक राष्ट्रीय स्तर का सर्वेक्षण है, जो देशभर के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों से डेटा एकत्र करता है। यह सर्वेक्षण संस्थानों द्वारा एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी प्रस्तुत करने पर आधारित है। इस डेटा में छात्र नामांकन, शिक्षकों और कर्मचारियों की संख्या, संस्थानों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाएं, परीक्षा परिणाम और अन्य शैक्षणिक-प्रशासनिक जानकारी शामिल होती है। सरकार इन आंकड़ों का उपयोग शिक्षा नीति निर्माण, योजनाओं की प्रभावशीलता की निगरानी और भविष्य की रणनीतियां तय करने के लिए करती है।
सर्वेक्षण में भागीदारी: 90 प्रतिशत से अधिक संस्थान शामिल
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों शैक्षणिक वर्षों में उच्च शिक्षण संस्थानों की भागीदारी बेहद उत्साहजनक रही।
- शैक्षणिक वर्ष 2022-23 में कुल 60,380 पंजीकृत संस्थानों में से 56,180 ने सर्वेक्षण में भाग लिया, जो 90 प्रतिशत से अधिक है।
- शैक्षणिक वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा और बेहतर हुआ, जहां 64,756 पंजीकृत संस्थानों में से 59,533 ने अपना डेटा प्रस्तुत किया, जो फिर से 90 प्रतिशत से अधिक की भागीदारी दर्शाता है।
नामांकन में दशकीय वृद्धि: 3.42 करोड़ से 4.50 करोड़ तक का सफर
पिछले दस वर्षों में उच्च शिक्षा में नामांकन की दर में लगातार सुधार हुआ है। यह वृद्धि देश में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता और सरकारी प्रयासों को दर्शाती है।
- 2014-15 में कुल नामांकन 3.42 करोड़ था, जो 2023-24 में बढ़कर 4.50 करोड़ हो गया।
- इस एक दशक में कुल नामांकन में 31.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
महिला शिक्षा का उभार: लड़कियों ने बनाया नया कीर्तिमान
रिपोर्ट का सबसे उत्साहजनक पहलू महिला छात्राओं के बढ़ते नामांकन का है। यह आंकड़ा बताता है कि देश में बेटियों की शिक्षा के प्रति सोच में बड़ा बदलाव आया है।
- 2014-15 की तुलना में 2023-24 में छात्राओं के नामांकन में 42.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
- 2023-24 में छात्राओं की संख्या बढ़कर 2.24 करोड़ तक पहुंच गई है, जबकि 2014-15 में यह 1.58 करोड़ थी।
सामाजिक न्याय की ओर कदम: एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की बढ़ती भागीदारी
सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्रों की उच्च शिक्षा में भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो एक समावेशी शिक्षा प्रणाली की ओर बढ़ता कदम है।
- अनुसूचित जाति (SC): 2023-24 में एससी छात्रों का नामांकन बढ़कर 69.72 लाख हो गया, जो 2014-15 की तुलना में 51.4 प्रतिशत अधिक है।
- अनुसूचित जनजाति (ST): एसटी छात्रों के नामांकन में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज हुई है। यह 28.83 लाख तक पहुंच गया है, जो पिछले दस वर्षों में 75.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।
- अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): ओबीसी छात्रों का नामांकन 1.80 करोड़ तक पहुंच गया है, जो 2014-15 के मुकाबले 60.2 प्रतिशत अधिक है।
सकल नामांकन अनुपात (GER) में सुधार: महिलाएं आगे
18 से 23 वर्ष के आयु वर्ग में उच्च शिक्षा तक पहुंच को मापने वाला सकल नामांकन अनुपात (GER) भी लगातार बढ़ रहा है।
- 2014-15 में जहां GER 23.7 प्रतिशत था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 30.0 प्रतिशत हो गया है।
- सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि महिलाओं का GER अब कुल औसत से भी अधिक है। 2023-24 में महिला GER 31.2 प्रतिशत दर्ज किया गया, जबकि 2014-15 में यह 22.9 प्रतिशत था।
लैंगिक समानता का नया अध्याय: लड़कियां लड़कों से आगे
जेंडर पैरिटी इंडेक्स (GPI) के आंकड़े बताते हैं कि उच्च शिक्षा में लड़कियों की भागीदारी अब लड़कों से अधिक हो गई है।
- 2023-24 में GPI 1.08 दर्ज किया गया है, जो पिछले सात वर्षों से लगातार 1.0 से ऊपर बना हुआ है।
- इसका सीधा अर्थ है कि उच्च शिक्षा में प्रति 100 लड़कों के मुकाबले 108 लड़कियां नामांकित हैं।
STEM शिक्षा में बढ़ता रुझान: विज्ञान और प्रौद्योगिकी की ओर झुकाव
देश में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्रों में भी छात्रों की रुचि बढ़ी है।
- 2023-24 में STEM पाठ्यक्रमों में कुल 1.02 करोड़ छात्र नामांकित थे, जो 2014-15 में 91.5 लाख था।
- STEM क्षेत्रों में छात्राओं की हिस्सेदारी भी बढ़कर 44 प्रतिशत हो गई है, जबकि 2014-15 में यह 38.4 प्रतिशत थी।
शिक्षकों की संख्या में वृद्धि: महिला शिक्षकों की बढ़ती भूमिका
उच्च शिक्षा में शिक्षकों और फैकल्टी सदस्यों की संख्या में भी सकारात्मक वृद्धि हुई है।
- 2023-24 में देशभर में कुल शिक्षकों और फैकल्टी की संख्या 17.32 लाख रही।
- महिला शिक्षकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2014-15 के 5.69 लाख से बढ़कर 2023-24 में 7.78 लाख हो गई है।
आंकड़ों की विश्वसनीयता पर मंत्रालय का रुख
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, AISHE भारत में उच्च शिक्षा के आधिकारिक आंकड़ों का सबसे बड़ा और प्रमुख स्रोत है। हालांकि, मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े संस्थानों द्वारा स्व-घोषित होते हैं और डेटा जमा करना एक स्वैच्छिक प्रक्रिया है। आंकड़ों की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय कई स्तरों पर जांच और सत्यापन करता है। बड़े पैमाने पर किए जाने वाले ऐसे सर्वेक्षणों में कुछ सामान्य सीमाएं हो सकती हैं, जो परिणामों को मामूली रूप से प्रभावित कर सकती हैं। फिर भी, यह रिपोर्ट स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि पिछले एक दशक में भारत में उच्च शिक्षा तक पहुंच में व्यापक सुधार हुआ है, खासकर महिलाओं और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए।