एआई वॉइस क्लोनिंग: कैसे एक फर्जी कॉल ने उड़ाए एक लाख रुपये, जानें बचाव के तरीके

टेक्नोलॉजी के इस दौर में साइबर अपराधी भी लगातार नए-नए हथियार विकसित कर रहे हैं। अब उन्होंने आवाज की नकल करने वाली एआई तकनीक को अपना नया जरिया बना लिया है। हाल ही में मध्य प्रदेश के इंदौर में एक स्कूल टीचर के साथ ऐसी ही धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जहां ठगों ने एआई वॉइस क्लोनिंग के जरिए उनके भाई की आवाज की नकल कर उनसे एक लाख रुपये ठग लिए।

कैसे अंजाम दिया गया यह स्कैम?

साइबर ठग ने पीड़ित महिला को कॉल किया और उसके भाई की हूबहू आवाज में बात करना शुरू कर दिया। आवाज इतनी असली लग रही थी कि महिला को कोई शक नहीं हुआ। ठग ने बताया कि उसका एक दोस्त मुसीबत में फंस गया है और तुरंत पैसों की जरूरत है। भावनात्मक दबाव बनाकर उसने महिला से तुरंत मदद मांगी। महिला ने बिना देर किए बताए गए बैंक खाते में एक लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब उसने अपने भाई से बात की तो पता चला कि उसने कोई कॉल नहीं किया था। यह एक स्कैमर था जिसने एआई तकनीक का इस्तेमाल किया था।

क्या है एआई वॉइस क्लोनिंग तकनीक?

एआई वॉइस क्लोनिंग एक ऐसी तकनीक है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर आधारित है। इसकी मदद से किसी भी व्यक्ति की आवाज की सटीक नकल तैयार की जा सकती है। इंटरनेट पर कई ऐसे टूल्स मौजूद हैं जो कुछ सेकंड की ऑडियो क्लिप से ही एक व्यक्ति की आवाज को रीक्रिएट कर सकते हैं। अपराधी सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो या वॉइस नोट्स से यह क्लिप प्राप्त करते हैं और फिर इसका इस्तेमाल धोखाधड़ी के लिए करते हैं।

एआई वॉइस स्कैम से बचने के लिए चार जरूरी कदम

  • कॉल काटें और खुद से संपर्क करें: अगर आपको किसी परिचित की आवाज में पैसे मांगने वाली कॉल आती है, तो तुरंत कॉल काट दें। उस व्यक्ति के असली नंबर पर खुद कॉल करके पूरी स्थिति की पुष्टि करें।
  • परिवार के लिए एक गुप्त कोडवर्ड तय करें: अपने परिवार के सदस्यों के साथ एक ऐसा कोडवर्ड बनाएं जो सिर्फ आपको पता हो। किसी भी आपातकालीन कॉल में कॉल करने वाले से यह कोड पूछें। अगर वह सही कोड नहीं बता पाता है, तो समझ जाएं कि यह एक फर्जी कॉल है।
  • सोशल मीडिया पर प्राइवेसी बनाए रखें: अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल को प्राइवेट रखें और अनजान लोगों को अपनी फोटो या वीडियो तक पहुंच न दें। याद रखें, आपकी आवाज का एक छोटा सा वीडियो या वॉइस नोट भी अपराधियों के लिए हथियार बन सकता है।
  • व्यक्तिगत सवाल पूछें: कॉल करने वाले से ऐसे सवाल पूछें जिनका जवाब सिर्फ आप दोनों को पता हो। यह आपके बचपन की कोई घटना हो सकती है या फिर कल रात के खाने में क्या बना था, जैसी कोई बात।

अगर ठगी हो जाए तो क्या करें?

यदि आप इस तरह के धोखे का शिकार हो जाते हैं, तो घबराएं नहीं और तुरंत नीचे बताए गए कदम उठाएं:

  • राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत कॉल करें।
  • साइबर अपराध पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करें।
  • अपने बैंक को तुरंत सूचित करें ताकि वे लेन-देन को ब्लॉक करने का प्रयास कर सकें।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अपराधी अब आवाज बदलकर ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में लोगों को अधिक सतर्क रहने और कोई भी डिजिटल लेन-देन करने से पहले पूरी जांच करने की सलाह दी जाती है। तकनीक जितनी उन्नत हो रही है, सावधानी भी उतनी ही जरूरी हो गई है।