दिल्ली एआई समिट 2026: वैश्विक टेक नेताओं ने भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य पर क्या कहा?

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में दुनिया की अग्रणी टेक कंपनियों के शीर्ष अधिकारी एक मंच पर एकत्र हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मानव-केंद्रित एआई’ के दृष्टिकोण की घोषणा के बाद, गूगल, ओपनएआई, माइक्रोसॉफ्ट, एंथ्रोपिक और टाटा ग्रुप जैसी दिग्गज कंपनियों के प्रमुखों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अवसरों, चुनौतियों और वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। इस सम्मेलन में सुपरइंटेलिजेंस और एजीआई जैसी भविष्य की अवधारणाओं के साथ-साथ डेटा सेंटर निवेश, कौशल विकास, नियमन और जिम्मेदार एआई विकास जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर भी गहन चर्चा हुई। प्रस्तुत हैं प्रमुख टेक नेताओं के बयान।

सुंदर पिचाई (सीईओ, गूगल)

गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदर पिचाई ने भारत में 1.25 लाख करोड़ रुपये (15 बिलियन डॉलर) के अपने निवेश की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने विशाखापत्तनम में एक बड़े एआई हब के निर्माण की घोषणा की। पिचाई ने कहा कि यह हब न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, बल्कि समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली फाइबर केबल के माध्यम से भारत और अमेरिका के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी को भी मजबूत बनाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई विज्ञान की जटिल से जटिल समस्याओं के समाधान में सहायक होगा।

सैम ऑल्टमैन (सीईओ, ओपनएआई)

ओपनएआई के प्रमुख सैम ऑल्टमैन ने बताया कि भारत में उनके प्लेटफॉर्म चैटजीपीटी के 10 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं, जो कंपनी के लिए सबसे बड़ा उपयोगकर्ता आधार है। उन्होंने भविष्यवाणी की कि 2028 के अंत तक दुनिया की बौद्धिक क्षमता मानव मस्तिष्क की तुलना में डेटा केंद्रों में अधिक केंद्रित हो जाएगी। नौकरियों पर संभावित प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने आशावादी रुख अपनाते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी पुराने कार्यों को बदलती है, लेकिन मानव हमेशा नए और बेहतर अवसर खोजने में सक्षम रहा है।

एन चंद्रशेखरन (चेयरमैन, टाटा संस)

टाटा समूह के अध्यक्ष एन चंद्रशेखरन ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि टाटा संस भारतीय उद्योगों के लिए एक समर्पित ‘एआई ऑपरेटिंग सिस्टम’ विकसित कर रहा है। उन्होंने ओपनएआई के साथ साझेदारी में एक विशाल डेटा सेंटर स्थापित करने की योजना का भी उल्लेख किया, जिसकी क्षमता को बढ़ाकर 1 गीगावाट तक किया जा सकेगा।

डारियो अमोदेई (सीईओ, एंथ्रोपिक)

एंथ्रोपिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डारियो अमोदेई ने बेंगलुरु में अपना नया कार्यालय खोलने और इंफोसिस जैसी कंपनियों के साथ रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि एआई जल्द ही मानव मस्तिष्क की क्षमताओं को पीछे छोड़ सकता है। अमोदेई ने एआई के दुरुपयोग और इसके स्वायत्त व्यवहार से उत्पन्न होने वाले जोखिमों पर गहरी चिंता व्यक्त की।

डेमिस हसाबिस (सीईओ, गूगल डीपमाइंड)

गूगल डीपमाइंड के प्रमुख डेमिस हसाबिस ने कहा कि एआई का प्रभाव औद्योगिक क्रांति से दस गुना अधिक होगा। उन्होंने अनुमान लगाया कि अगले पांच वर्षों में आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (एजीआई) एक वास्तविकता बन सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान एआई सिस्टम अभी भी विकास के प्रारंभिक चरण में हैं, इसलिए एजीआई के बारे में पूर्ण निश्चितता के साथ कुछ कहना जल्दबाजी होगी।

ब्रैड स्मिथ (प्रेसिडेंट, माइक्रोसॉफ्ट)

माइक्रोसॉफ्ट के अध्यक्ष ब्रैड स्मिथ ने एआई के माध्यम से आर्थिक असमानता को कम करने के लिए 50 अरब डॉलर के निवेश की बात कही। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह निवेश डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और अधिक लोगों को एआई तकनीक से जोड़ने में मदद करेगा।

यान लेकुन (एआई विशेषज्ञ)

एआई के क्षेत्र में अग्रणी माने जाने वाले यान लेकुन ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि एआई के आने से पारंपरिक शिक्षा का महत्व कम नहीं होगा। उन्होंने समझाया कि भविष्य में एआई एक ‘स्मार्ट सहायक’ की तरह काम करेगा, जो मनुष्यों की क्षमताओं को बढ़ाएगा, न कि उन्हें प्रतिस्थापित करेगा।

विशाल सिक्का (सीईओ, वियानाई)

वियानाई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विशाल सिक्का ने कहा कि एआई का प्रभावी उपयोग तभी संभव है जब इसकी सीमाओं को समझा जाए और उन्हें दूर करने के प्रयास किए जाएं। उन्होंने बताया कि एआई तकनीक और इसके व्यावसायिक उपयोग के बीच एक बड़ा अंतर है, और इसी अंतर को पाटने में असली अवसर छिपे हैं। सिक्का के अनुसार, जो संगठन एआई को सही ढंग से अपनाएंगे, उनकी उत्पादकता में कई गुना वृद्धि हो सकती है। उन्होंने उद्यम प्रणालियों में एआई से बड़े बदलाव की संभावना जताई और प्रधानमंत्री के ‘एक अरब उद्यमी’ के आह्वान का समर्थन किया।