ChatGPT से सटीक जवाब चाहिए? रिसर्च कहती है, रुखाई से पूछें सवाल
आमतौर पर हमें सिखाया जाता है कि बातचीत में शालीनता और विनम्रता जरूरी है, चाहे वह इंसानों से हो या फिर AI असिस्टेंट जैसे ChatGPT से। लेकिन पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के हालिया शोध ने इस धारणा को चुनौती दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि आप AI से सटीक और त्रुटिहीन जवाब चाहते हैं, तो मीठी बातों की बजाय कठोर या अपमानजनक लहजे में सवाल पूछना अधिक प्रभावी हो सकता है।
रिसर्च का तरीका और चौंकाने वाले नतीजे
शोधकर्ताओं ने 50 अलग-अलग विषयों पर आधारित मूल प्रश्न चुने। फिर हर प्रश्न को पांच अलग-अलग भाषाई शैलियों में ढाला गया — बेहद विनम्र से लेकर अत्यंत रूखे अंदाज तक। उदाहरण के लिए, एक बेहद रूखा सवाल था: “अरे, यह भी नहीं आता? जल्दी से हल करो।” वहीं, विनम्र संस्करण कुछ इस तरह था: “कृपया इस समस्या पर गौर करें और उत्तर प्रदान करें।”
परिणामों ने सबको हैरान कर दिया। रिसर्च पेपर के अनुसार, बहुत विनम्र प्रश्नों की सटीकता लगभग 80.8 प्रतिशत रही, जबकि बेहद रूखे सवालों में यह आंकड़ा बढ़कर 84.8 प्रतिशत तक पहुंच गया। सबसे अधिक शालीन भाषा में पूछे गए सवालों की सटीकता सिर्फ 75.8 प्रतिशत दर्ज की गई। यह स्पष्ट संकेत है कि AI के जवाबों की गुणवत्ता पर प्रश्न की भाषा का गहरा प्रभाव पड़ता है।
पिछले अध्ययनों से अलग है यह निष्कर्ष
यह नतीजे पिछले शोधों से उलट हैं। 2024 में जापान की RIKEN और वासेदा यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में कहा गया था कि अपमानजनक सवाल AI के प्रदर्शन को कमजोर करते हैं। वहीं, Google DeepMind के शोध में पाया गया था कि सहयोगी और सकारात्मक भाषा से AI बेहतर परिणाम देता है, खासकर गणित जैसे विषयों में। इन विरोधाभासी निष्कर्षों से यह साफ है कि AI मॉडल की प्रतिक्रिया पूरी तरह से स्थिर या अनुमानित नहीं है।
AI की विश्वसनीयता पर उठते हैं सवाल
पेंसिल्वेनिया के शोधकर्ताओं का मानना है कि प्रश्न के शब्दों में मामूली बदलाव भी AI के जवाबों की गुणवत्ता को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि AI की विश्वसनीयता और उसकी भविष्यवाणी करने की क्षमता पर गंभीर सवाल उठते हैं। शोधकर्ता स्पष्ट करते हैं कि वे AI से बदतमीजी करने की सलाह नहीं दे रहे हैं। उनका कहना है कि अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल समाज में बातचीत के तरीकों को खराब कर सकता है। इससे उपयोगकर्ता अनुभव और भविष्य की तकनीक पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। मशीन भले ही आदेश पर काम करे, लेकिन हमें अपनी मानवीय गरिमा और शिष्टाचार को नहीं भूलना चाहिए।