एआई चैटबॉट्स: मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ता संकट, शोध में सामने आई चिंताजनक बात

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) चैटबॉट्स का उपयोग दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। काम के दौरान या अकेलेपन में इनसे घंटों बातचीत करना आम हो गया है। लेकिन हाल ही में प्रकाशित एक वैज्ञानिक शोध ने इस आदत को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों के अनुसार, ये एआई उपकरण अनजाने में लोगों के भीतर गलत धारणाओं और भ्रम को मजबूत कर सकते हैं। इस नई स्थिति को ‘एआई-एसोसिएटेड डेल्यूजन’ यानी एआई से जुड़े भ्रम का नाम दिया गया है।

भ्रम को बढ़ावा देने वाली तकनीक

‘द लैंसेट साइकेट्री’ में प्रकाशित इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. हैमिल्टन मॉरिन के अनुसार, चैटबॉट्स सीधे तौर पर मानसिक बीमारी पैदा नहीं करते। लेकिन ये उन लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं जो पहले से मानसिक रूप से संवेदनशील हैं। समस्या तब शुरू होती है जब कोई उपयोगकर्ता अपनी किसी अजीब या गलत धारणा को चैटबॉट के सामने रखता है। एआई उस विचार को चुनौती देने के बजाय अक्सर उसे सही ठहराने लगता है। इससे उपयोगकर्ता को लगने लगता है कि उसकी सोच बिल्कुल सच है।

तीन प्रमुख प्रकार के भ्रम

शोध में पाया गया कि चैटबॉट्स मुख्य रूप से तीन तरह के भ्रमों को बढ़ावा दे रहे हैं:

  • बड़प्पन का अहसास: इसमें उपयोगकर्ता को लगता है कि उसके पास कोई जादुई शक्ति है या वह किसी खास ब्रह्मांडीय मिशन पर है। पुराने एआई मॉडल रहस्यमयी भाषा का उपयोग कर इस भावना को और मजबूत कर देते थे।
  • रोमांटिक भ्रम: किसी मशीन या काल्पनिक चरित्र के साथ गहरे प्रेम का अहसास होना।
  • पैरानोइड: बिना किसी कारण के डर या संदेह कि कोई उनका पीछा कर रहा है।

जब संदेह यकीन में बदल जाता है

डॉ. रागी गिरगिस और डॉ. क्वामे मैकेंजी जैसे विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे बड़ा खतरा उन लोगों को है जो मानसिक बीमारी के शुरुआती दौर में हैं। सामान्य स्थिति में, व्यक्ति को अपने गलत विचारों पर कुछ संदेह रहता है। लेकिन जब कोई चैटबॉट दोस्ताना अंदाज में उन विचारों का समर्थन करता है, तो वह संदेह पूरी तरह यकीन में बदल जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार यह भ्रम पक्का हो जाए, तो इसे ठीक करना लगभग असंभव हो जाता है।

डॉ. डोमिनिक ओलिवर बताते हैं कि एआई केवल जानकारी नहीं देता, बल्कि वह एक रिश्ता बनाने की कोशिश करता है। इससे इंसान को लगता है कि कोई उसे समझ रहा है। यही बात इस प्रक्रिया को और तेज कर देती है।

सुरक्षा उपाय और आगे की चुनौतियां

शोध यह भी बताता है कि नए एआई मॉडल, खासकर नवीनतम सशुल्क संस्करण, पुराने मॉडलों की तुलना में अधिक सुरक्षित हैं और बेहतर जवाब देते हैं। एआई विकसित करने वाली कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि उनका चैटबॉट किसी पेशेवर मानसिक उपचार का विकल्प नहीं है। सुरक्षा के लिए 170 से अधिक विशेषज्ञों की मदद ली गई है।

वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अगर एआई उपयोगकर्ता की बात को सीधे तौर पर काटता है, तो व्यक्ति उससे दूर भाग जाएगा। वहीं अगर वह उसकी बात मान लेता है, तो मानसिक स्थिति और बिगड़ जाएगी। फिलहाल, इस विषय पर और अधिक नैदानिक परीक्षणों की आवश्यकता बताई जा रही है।