एआई के बाद अब इंसानों की वापसी: कंपनियों का चुपचाप बदलता रुख
पिछले कुछ वर्षों में कॉर्पोरेट जगत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। कंपनियों ने लागत कम करने और मुनाफा बढ़ाने के नाम पर बड़ी संख्या में कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। सीईओ और निवेशकों का मानना था कि एआई इंसानों का सबसे सस्ता और कारगर विकल्प साबित होगा। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं। एआई टूल्स को चलाने का भारी खर्च और उनकी सीमाएं सामने आने के बाद कंपनियों को एहसास हो रहा है कि इंसानी समझ और अनुभव की कोई कृत्रिम विकल्प नहीं हो सकता। उद्योग में इस बदलाव को ‘बूमरैंग इफेक्ट’ का नाम दिया जा रहा है।
अमेजन, आईबीएम, मैकडॉनल्ड्स, क्लार्ना और शॉपिफाई जैसी कई छोटी-बड़ी कंपनियां अब चुपचाप अपने पुराने कर्मचारियों को वापस बुला रही हैं। मई 2026 में जारी करियरमाइंड्स और गार्टनर की रिपोर्ट्स के अनुसार, एआई के कारण छंटनी करने वाली लगभग 32 प्रतिशत कंपनियों ने अपने निकाले गए कर्मचारियों को दोबारा काम पर रखना शुरू कर दिया है।
चुपचाप वापसी कर रही ये कंपनियां
क्लार्ना
स्वीडिश फिनटेक कंपनी क्लार्ना ने दावा किया था कि उनका एआई चैटबॉट 700 इंसानी एजेंटों के बराबर काम कर सकता है। इसके बाद कंपनी ने अपने कस्टमर सर्विस स्टाफ में भारी कटौती कर दी और कर्मचारियों की संख्या 5,500 से घटाकर 3,400 कर दी। लेकिन असलियत में एआई चैटबॉट जटिल वित्तीय मामलों को सुलझाने और ग्राहकों से सहानुभूति दिखाने में पूरी तरह नाकाम रहे। इससे कंपनी का ‘कस्टमर सैटिस्फैक्शन स्कोर’ बुरी तरह गिर गया और शिकायतों का अंबार लग गया। नतीजतन, क्लार्ना ने 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में अपने कस्टमर सपोर्ट के लिए दोबारा इंसानी एजेंटों की भर्ती शुरू कर दी।
आईबीएम
आईबीएम ने अपने मानव संसाधन (HR) और प्रशासनिक कामों के बड़े हिस्से को पूरी तरह ऑटोमेट कर दिया था और कई पदों पर भर्ती रोक दी थी। लेकिन सिस्टम कई मौकों पर सही-गलत का इंसानी फैसला लेने में नाकाम रहा। इसके चलते अब कंपनी अपनी इंजीनियरिंग, कॉर्पोरेट रणनीति और ग्राहक संपर्क टीमों में बड़े पैमाने पर इंसानों को वापस ला रही है। अमेरिका में इस साल कंपनी ने नई ग्रेजुएट भर्तियों को तीन गुना तक बढ़ा दिया है।
अमेजन
ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन ने 2023-2024 के बीच कॉरपोरेट और टेक रोल्स में बड़े पैमाने पर छंटनी की थी। दावा किया गया था कि एआई और ऑटोमेशन से कार्यक्षमता बढ़ेगी। लेकिन इससे डेटा जजमेंट और क्वालिटी कंट्रोल में भारी कमी आ गई। एआई सिस्टम को संभालने के लिए अनुभवी लोगों की कमी पड़ गई। अब कंपनी क्वालिटी कंट्रोल, सॉफ्टवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग और डेटा जजमेंट के लिए अपने खोए हुए टैलेंट को वापस बुला रही है।
शॉपिफाई
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म शॉपिफाई ने अपने काम को ऑटोमेटेड सिस्टम और एआई की तरफ मोड़ने का बड़ा एलान किया था और काफी छंटनी की थी। बाद में कंपनी को एआई टूल्स को संभालने के लिए इंसानी कर्मचारियों की कमी महसूस हुई। इसके चलते शॉपिफाई को अपनी वर्कफोर्स रणनीति को फिर से तैयार करना पड़ा।
मैकडॉनल्ड्स
कर्मचारियों को कम करने के लिए मैकडॉनल्ड्स ने 100 से अधिक ड्राइव-थ्रू स्टोर्स पर ऑर्डर लेने का काम आईबीएम के एआई को सौंप दिया था। इसके बाद ग्राहकों को ऑर्डर डिलीवर करने में कई तरह की परेशानियां आने लगीं। मैकडॉनल्ड्स ने इस पूरे एआई सिस्टम को बंद कर दिया है और अपने स्टोर्स में इंसानी कैशियर्स की वापसी कर रही है।
क्यों हो रहा है कंपनियों का एआई से मोहभंग?
साल 2023 और 2024 की शुरुआत में कंपनियों के बीच एआई को अपनाने की अंधी होड़ मच गई थी। सीईओ और निवेशकों को लगा कि जेनरेटिव एआई के आने से अब उन्हें भारी तनख्वाह वाले इंसानों की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस अति-उत्साह में टेक, कस्टमर सर्विस, मार्केटिंग और आईटी सेक्टर से अंधाधुंध छंटनी की गई। लेकिन जब एआई को असल जिम्मेदारी के साथ उतारा गया, तो कंपनियों का सुनहरा सपना एक डरावने सच में बदल गया। इंसानों की दोबारा भर्ती के पीछे एआई की ये सबसे बड़ी कमियां जिम्मेदार रहीं:
- लागत और बजट का पूरा गणित बिगड़ना: शुरुआत में लगा था कि एआई से कर्मचारियों की सैलरी का भारी पैसा बचेगा। लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट निकली। प्रीमियम एआई टूल्स का सब्सक्रिप्शन बहुत महंगा होता है। इन्हें चलाने के लिए विशाल क्लाउड सर्वर और भारी कंप्यूटिंग पावर की जरूरत पड़ती है। एपीआई कॉल्स और डेटा प्रोसेसिंग का बिल कंपनियों का पूरा बजट बिगाड़ रहा है।
- ग्राहकों की नाराजगी और मानवीय संवेदना की कमी: कस्टमर सर्विस के मामले में एआई बुरी तरह नाकाम रहा है। जब किसी ग्राहक का पैसा फंसता है या उसे कोई गंभीर परेशानी होती है, तो वह मानवीय संवेदना चाहता है। मशीन के रटे-रटाए और भावनाहीन जवाब ग्राहकों का गुस्सा और भड़का देते हैं। इस रोबोटिक बर्ताव के कारण कंपनियों ने अपने कई पुराने और वफादार ग्राहक खो दिए हैं।
- कॉर्पोरेट डेटा और गोपनीयता पर बड़ा खतरा: एआई मॉडल्स का इस्तेमाल करते समय कंपनियों को गोपनीय डेटा लीक होने का बहुत बड़ा डर रहता है। कई बड़े मामलों में कर्मचारियों ने अनजाने में कंपनी के सीक्रेट कोड और क्लाइंट का डेटा एआई में फीड कर दिया। यह डेटा तुरंत बाहरी सर्वर्स पर चला गया। इस भयानक सुरक्षा चूक ने बड़ी कंपनियों को अपने सिस्टम से बाहरी एआई टूल्स हटाने पर मजबूर कर दिया है।
- आत्मविश्वास के साथ झूठ बोलने की आदत: एआई की हैलुसिनेशन कंपनियों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। एआई मशीनें सवाल का जवाब पता न होने पर मनगढ़ंत बातें बताने लगती हैं। इसके कारण कंपनियों ने गलत नीतियां बनाईं और उन्हें कोर्ट में हर्जाना तक भरना पड़ा। इस लापरवाही से कई कंपनियों का एआई पर भरोसा डगमगा गया है।
इंसानों के साथ एआई का मॉडल हो सकता है सफल?
इन सबके बीच, आइकिया और बॉक्स जैसी कंपनियों ने कुछ ऐसा किया जो दूसरी कंपनियों के लिए सीख बन गया है। आइकिया ने अपने 50 प्रतिशत कॉल्स एआई पर शिफ्ट कर दिए, लेकिन किसी इंसान को नहीं निकाला। उन्होंने अपने सभी 8,500 कॉल सेंटर कर्मचारियों को अपस्किल करके इंटीरियर डिजाइन कंसल्टेंट बना दिया, जिससे कंपनी का मुनाफा बढ़ गया। वहीं, कैलिफोर्निया की टेक फर्म बॉक्स ने इंसानों को निकालने के बजाय एआई को संभालने के लिए एआई आर्किटेक्ट जैसे 13 नए पद पैदा कर दिए।
फॉरेस्टर रिसर्च की रिपोर्ट बताती है कि 55 प्रतिशत एक्जीक्यूटिव्स को अब इंसानों को निकालकर एआई लाने के फैसले पर भारी पछतावा है। कंपनियां धीरे-धीरे समझने लगी हैं कि एआई बिना मानवीय समझ के काम नहीं कर सकता। इसलिए अब कंपनियों का फोकस उन भर्तियों पर बढ़ रहा है जो एआई को सही कमांड देकर काम करवा सकें।