आयुष सेवाओं में क्रांति: भाषिणी के जरिए 22 भारतीय भाषाओं में मिलेगा आयुर्वेद और योग का ज्ञान
देश में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को डिजिटल और बहुभाषी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। अब आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होमियोपैथी जैसी प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी और सेवाएं 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होंगी। इस पहल के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित भाषा तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जो स्वास्थ्य सेवाओं को आम नागरिकों के लिए और अधिक सुलभ बनाएगी।
एमओयू पर हस्ताक्षर: दो मंत्रालयों की साझेदारी
आयुष मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन (DIBD) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके आयुष से जुड़ी जानकारियों का तेजी से अनुवाद और ट्रांसक्रिप्शन करना है। यह कदम भारत की समृद्ध चिकित्सा विरासत को डिजिटल रूप से संरक्षित और प्रसारित करने में मील का पत्थर साबित होगा।
‘भाषिणी राज्यम’ कार्यक्रम के तहत होगी पहल
इस नई पहल को “भाषिणी राज्यम – एक भाषिणी सहयोगी कार्यक्रम” नाम दिया गया है। इसके तहत आयुष मंत्रालय के आयुष ग्रिड पोर्टल्स और डिजिटल एप्लिकेशन्स को भाषिणी के राष्ट्रीय भाषा डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर से जोड़ा जाएगा। इसका सीधा लाभ यह होगा कि स्वास्थ्य सेवा, शोध और दवाओं से संबंधित जानकारियां अब संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होंगी।
इसके अलावा, आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी के लिए विशेष बहुभाषी शब्दावली और डेटासेट भी तैयार किए जाएंगे। इस समझौते पर आयुष मंत्रालय के निदेशक और भाषिणी के सीईओ ने औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए।
एआई टूल्स का प्रदर्शन: डॉक्टर-मरीज संवाद होगा आसान
इस अवसर पर भाषिणी टीम ने कई ऐसे एआई टूल्स का प्रदर्शन किया जो आम जनता के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होंगे। इनमें सबसे प्रमुख था एक ऐसा एआई सिस्टम जो डॉक्टर और मरीज की बहुभाषी बातचीत को सुनकर तुरंत मेडिकल पर्ची तैयार कर देता है। इसके अलावा, निम्नलिखित टूल्स भी प्रस्तुत किए गए:
- श्रुतलेख टूल: मीटिंग का रियल-टाइम ट्रांसक्रिप्शन प्रदान करता है।
- आवाज से सीवी निर्माण: मजदूरों और अन्य वर्गों के लिए आवाज के माध्यम से बायोडाटा बनाने का समाधान।
- पांडुलिपि डिजिटलीकरण: भारत की प्राचीन पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में संरक्षित करने की तकनीक।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी मजबूती
आयुष मंत्रालय के सचिव ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि आयुष चिकित्सा प्रणालियों में गहरा सांस्कृतिक और सभ्यतागत ज्ञान छिपा है। इसे हर भारतीय भाषा में उपलब्ध कराना आवश्यक है ताकि स्वास्थ्य सेवाएं सभी तक पहुंच सकें। भाषिणी के साथ मिलकर भविष्य के लिए तैयार ऐसे एआई सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं जो भाषाई बाधाओं को तोड़ेंगे।
आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव ने जमीनी स्तर पर इसके लाभों का उल्लेख करते हुए कहा कि बहुभाषी एआई समाधान, विशेषकर पर्ची बनाने वाला डॉक्टर-मरीज इंटरेक्शन सिस्टम, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। वहीं, भाषिणी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि भाषाओं को शामिल करने वाले एआई सिस्टम डिजिटल पब्लिक सेवाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इस साझेदारी से देशवासियों को उनकी पसंद की भाषा में स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करने में मदद मिलेगी।