भारत की एआई रणनीति: समावेशी डिजाइन और संप्रभु क्षमता पर जोर

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया है कि भारत में विकसित होने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) न केवल डिजाइन में समावेशी होगी, बल्कि अपनी क्षमताओं में पूरी तरह से संप्रभु भी होगी। यह बात उन्होंने भारत बोधन AI कॉन्क्लेव 2026 के उद्घाटन सत्र में कही, जहां देशभर से शिक्षाविद, शोधकर्ता, उद्योग जगत के विशेषज्ञ और सरकारी अधिकारी एकत्र हुए।

शिक्षा में एआई का एकीकरण

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि एआई को शिक्षा प्रणाली में इस तरह शामिल किया जाना चाहिए कि यह छात्रों को सशक्त बनाए और शिक्षकों का समर्थन करे। उन्होंने कहा कि भारतीय कॉलेजों में वर्तमान में लगभग 30 करोड़ छात्र हैं, और सरकार ने यह सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है कि कक्षा 3 से लेकर उच्च अनुसंधान स्तर तक, सभी छात्रों को आयु-उपयुक्त एआई ज्ञान प्रदान किया जाए।

तीन स्तंभों पर आधारित दृष्टिकोण

प्रधान ने भारत की एआई नीति को तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित बताया:

  • समावेशी डिजाइन: एआई सिस्टम इस तरह विकसित किए जाएंगे कि वे समाज के हर वर्ग की जरूरतों को पूरा कर सकें, चाहे वह भाषा, क्षेत्र या सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर हो।
  • अंतरसंचालनीय आर्किटेक्चर: भारतीय एआई को अन्य मौजूदा सिस्टम के साथ आसानी से काम करने योग्य बनाया जाएगा, जिससे तकनीकी बाधाएं कम होंगी।
  • संप्रभु क्षमता: भारत अपनी एआई क्षमताओं में आत्मनिर्भर होगा, जिससे वैश्विक निर्भरता कम होगी और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी।

विकसित भारत के लिए सामूहिक प्रयास

मंत्री ने सभी हितधारकों से आह्वान किया कि वे ऐसे स्केलेबल, जिम्मेदार और नैतिक एआई मॉडल विकसित करें जो भारत-केंद्रित हों। उन्होंने कहा कि एआई केवल एक तकनीकी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक विषय है जो शिक्षा, रोजगार और आर्थिक विकास से जुड़ा है। प्रधान ने यह भी सुझाव दिया कि यदि मशीनों और मानवीय भावनाओं को मिलाकर एक नया मॉडल विकसित किया जाए, तो भारत इस क्षेत्र में वैश्विक शक्ति बन सकता है।

आगामी वैश्विक सम्मेलन की तैयारी

यह दो दिवसीय कॉन्क्लेव, राष्ट्रीय राजधानी में 16 से 20 फरवरी तक आयोजित होने वाले बड़े इंडिया एआई समिट से पहले आयोजित किया जा रहा है। इस वैश्विक सम्मेलन में एनवीडिया, ओपनएआई, गूगल, एंथ्रोपिक और क्वालकॉम जैसी दिग्गज कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के शामिल होने की संभावना है। यह आयोजन भारत की एआई महत्वाकांक्षाओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा।