एआई कोडिंग का बढ़ता दायरा: भारत में 20% कोडिंग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से

सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। 2024 के अंत तक अमेरिका में लगभग 29% नए कोड का निर्माण एआई टूल्स की मदद से होने लगा था। भारत भी इस मामले में पीछे नहीं है और यहां अब करीब 20% कोडिंग एआई के सहारे की जा रही है। हालांकि, हालिया शोध बताते हैं कि इस तकनीक का लाभ सभी प्रोग्रामर्स को समान रूप से नहीं मिल रहा है। अनुभवी डेवलपर्स जहां इससे अधिक उत्पादक बन रहे हैं, वहीं नए या कम अनुभवी कोडर्स को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

दुनिया भर में एआई कोडिंग का परिदृश्य

यह अध्ययन ऑस्ट्रिया के कॉम्प्लेक्सिटी साइंस हब और नीदरलैंड्स की यूट्रेक्ट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में एआई-सहायता प्राप्त कोड का प्रतिशत 2022 में महज 5% था, जो अब बढ़कर 29% हो गया है। फ्रांस में 24% और जर्मनी में 23% कोडिंग एआई के जरिए हो रही है। भारत में यह आंकड़ा 20% तक पहुंच गया है, जो दर्शाता है कि देश तेजी से इस तकनीक को अपना रहा है। वहीं, रूस (15%) और चीन (12%) जैसे देश इस मामले में थोड़ा पीछे हैं।

अनुभवी बनाम नए प्रोग्रामर्स: किसे मिल रहा है अधिक लाभ?

शोध में एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है कि एआई टूल्स का उपयोग करने का तरीका और उसका परिणाम दोनों ही अनुभव स्तर पर निर्भर करते हैं। कम अनुभव वाले प्रोग्रामर्स अपने कोड का लगभग 37% हिस्सा एआई से लिखवा रहे हैं, जबकि अनुभवी डेवलपर्स यह काम करीब 27% तक ही कर रहे हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि उत्पादकता में सुधार केवल अनुभवी प्रोग्रामर्स में ही देखा गया।

शोधकर्ता सिमोन डेनियोटी के अनुसार, नए कोडर्स को एआई से बहुत कम लाभ मिलता है। उनका मानना है कि एआई ‘सबको बराबर मौका’ देने के बजाय अनुभवी और नए डेवलपर्स के बीच की खाई को और चौड़ा कर सकता है। एक अन्य विशेषज्ञ जोहान्स वाक्स ने बताया कि अनुभवी डेवलपर्स एआई का इस्तेमाल केवल आसान कामों को जल्दी निपटाने के लिए नहीं करते, बल्कि वे इसका उपयोग नई लाइब्रेरी और नए टूल्स सीखने और उनके साथ प्रयोग करने के लिए भी करते हैं। यही कारण है कि उनकी क्षमता और अधिक बढ़ जाती है, जबकि शुरुआती लोग एआई पर अत्यधिक निर्भर हो जाते हैं और मूलभूत अवधारणाओं को समझने से चूक जाते हैं।

शोध की पद्धति और विश्लेषण

इस अध्ययन को करने के लिए शोधकर्ताओं ने गिटहब पर उपलब्ध डेटा का गहन विश्लेषण किया। उन्होंने लगभग 1,60,000 डेवलपर्स और 3 करोड़ (30 मिलियन) से अधिक पायथन कोड योगदानों की जांच की। एक विशेष एआई मॉडल की मदद से यह पहचाना गया कि कौन-सा कोड चैटजीपीटी या गिटहब कोपायलट जैसे एआई टूल्स की सहायता से लिखा गया है। चूंकि गिटहब हर एक बदलाव (जोड़ना, हटाना, सुधारना) को रिकॉर्ड करता है, इसलिए शोधकर्ताओं के लिए यह समझना आसान हो गया कि दुनिया भर में एआई-आधारित कोडिंग किस गति से बढ़ रही है और इसका विभिन्न स्तरों के डेवलपर्स पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।

यह अध्ययन इस बात पर प्रकाश डालता है कि एआई कोडिंग में क्रांति ला रहा है, लेकिन इसके लाभ को सभी तक समान रूप से पहुंचाने के लिए नए प्रोग्रामर्स को प्रशिक्षित करने और उनकी मूलभूत समझ को मजबूत करने की आवश्यकता है।