नीट-यूजी परीक्षा प्रणाली में वैश्विक मॉडल अपनाने की सिफारिश

संसद की एक स्थायी समिति ने शीर्ष अधिकारियों को नीट-यूजी परीक्षा प्रणाली को अमेरिका और चीन जैसे देशों के मॉडल के अनुरूप ढालने की सलाह दी है। समिति ने प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार पर जोर देते हुए कहा कि बड़े पैमाने पर होने वाली प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के संचालन में इन देशों की सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाया जाए। इस कदम से पेपर लीक और अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।

समिति के समक्ष अधिकारियों की उपस्थिति

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने हाल ही में स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया था। यह कदम पेपर लीक विवाद और परीक्षा रद्द होने के बाद उठाया गया। समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के शीर्ष अधिकारियों से दोबारा होने वाली परीक्षा की तैयारियों का विस्तृत ब्योरा मांगा। बैठक में समिति के अध्यक्ष समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव भी मौजूद रहे।

21 जून की परीक्षा को लेकर आश्वासन

अधिकारियों ने समिति को आश्वस्त किया कि 21 जून को पुनर्निर्धारित नीट-यूजी परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित की जाएगी। उन्होंने बताया कि परीक्षा की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय लागू किए जा रहे हैं। बैठक में एनटीए महानिदेशक अभिषेक सिंह, उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी और एनएमसी अध्यक्ष डॉ. अभिजात सी शेट सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। समिति ने सीबीआई द्वारा की जा रही जांच की प्रगति की भी समीक्षा की।

फूलप्रूफ व्यवस्था का सुझाव

समिति के सदस्यों ने अधिकारियों से प्रवेश परीक्षाओं के संचालन के लिए पूरी तरह सुरक्षित व्यवस्था विकसित करने को कहा। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका और चीन जैसे देशों में बड़े पैमाने पर आयोजित प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की प्रक्रियाओं का गहन अध्ययन किया जाए। इसके बाद उन मॉडलों को भारतीय संदर्भ में लागू करने की सिफारिश की गई, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की अनियमितता को रोका जा सके।

छात्रों की मानसिक चिंता पर चिंता

बैठक में छात्रों के बीच बढ़ते तनाव और आत्महत्या की घटनाओं पर गहरी चिंता जताई गई। सदस्यों ने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने जैसी घटनाओं से अभ्यर्थियों की मानसिक चिंता बढ़ रही है। उन्होंने प्रभावित परिवारों को उचित सहायता प्रदान करने की सिफारिश की। समिति ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि ऐसी घटनाओं से छात्रों का शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न हो।

साल में दो से तीन बार परीक्षा का सुझाव

संसदीय समिति के एक सदस्य ने छात्रों पर बोझ कम करने के लिए नीट-यूजी को साल में दो से तीन बार आयोजित करने का सुझाव दिया। सदस्य ने कहा कि जब किसी और की गलती के कारण कोई छात्र अपनी पढ़ाई का पूरा एक साल गंवा देता है, तो इसका उसके करियर पर गहरा असर पड़ता है। इसलिए परीक्षा प्रणाली में ऐसा लचीलापन होना चाहिए कि छात्रों का शैक्षणिक वर्ष सुरक्षित रहे।

वैश्विक मानकों को अपनाने पर जोर

समिति ने स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए वैश्विक मानकों को अपनाना आवश्यक है। अमेरिका और चीन जैसे देशों में परीक्षा संचालन की जो तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्थाएं हैं, उनका अध्ययन कर भारत में भी इसी तरह की प्रणाली विकसित करने पर बल दिया गया। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि छात्रों का विश्वास भी बहाल होगा।