एसी की आउटडोर यूनिट: छत या दीवार, कहां लगाना सही रहेगा?
गर्मियों में एयर कंडीशनर खरीदना एक बड़ा निर्णय होता है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण है उसकी आउटडोर यूनिट को सही जगह पर स्थापित करना। अक्सर लोग इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका सीधा असर कूलिंग और बिजली के बिल पर पड़ता है। आउटडोर यूनिट में मौजूद कंप्रेसर को एसी का दिमाग कहा जाता है, और इसकी गलत लोकेशन न केवल ठंडक को कम करती है, बल्कि कंप्रेसर की उम्र भी घटा सकती है। आइए जानते हैं कि तकनीकी और व्यावहारिक दृष्टिकोण से कौन सी जगह बेहतर है।
छत पर आउटडोर यूनिट रखने के फायदे और नुकसान
अगर आपके घर की छत या बालकनी में पर्याप्त खुली जगह है, तो आउटडोर यूनिट को समतल सतह पर रखना एक अच्छा विकल्प माना जाता है। इसका सबसे बड़ा लाभ रखरखाव में आसानी है। सर्विसिंग के दौरान तकनीशियन को काम करने के लिए पूरी जगह मिलती है, जिससे कॉइल और पंखे की सफाई अच्छी तरह हो पाती है। इसके अलावा, खुली जगह होने के कारण हवा का प्रवाह बेहतर रहता है, जिससे कंप्रेसर जल्दी ठंडा होता है और एसी की दक्षता बनी रहती है।
हालांकि, छत पर रखने की एक बड़ी कमी यह है कि यूनिट सीधे धूप और बारिश के संपर्क में आती है। अगर दोपहर की तेज धूप सीधे इस पर पड़ती है, तो कंप्रेसर को रेफ्रिजरेंट गैस को ठंडा करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इससे बिजली की खपत बढ़ जाती है और कंप्रेसर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे उसके जल्दी खराब होने का खतरा रहता है।
दीवार पर टांगने के फायदे और नुकसान
जहां जगह की कमी होती है, वहां दीवार पर मजबूत ब्रैकेट लगाकर आउटडोर यूनिट को टांगना ही एकमात्र विकल्प बचता है। यह जगह की बचत तो करता है, लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं। अगर दीवार कमजोर है या ब्रैकेट ठीक से फिट नहीं है, तो कंप्रेसर के चलने पर होने वाला कंपन घर के अंदर शोर पैदा कर सकता है। समय के साथ ब्रैकेट में जंग लगने का खतरा भी रहता है, जिससे यूनिट के गिरने का जोखिम बना रहता है। यह सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक हो सकता है।
दीवार पर लगाते समय यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि यूनिट के चारों ओर हवा के आवागमन के लिए पर्याप्त जगह हो। अगर यूनिट को दो दीवारों के बीच या बहुत संकरी जगह पर लगाया जाए, तो गर्म हवा बाहर नहीं निकल पाएगी और कूलिंग पर बुरा असर पड़ेगा।
कूलिंग पर पाइप की लंबाई का असर
एसी के इनडोर और आउटडोर यूनिट के बीच की दूरी बहुत मायने रखती है। दोनों यूनिट को जोड़ने वाली पाइप की लंबाई जितनी कम होगी, कूलिंग उतनी ही बेहतर होगी। अगर आप यूनिट को छत पर रखते हैं और आपका कमरा कई मंजिल नीचे है, तो लंबी पाइप के कारण गैस का दबाव कम हो जाएगा। इससे कंप्रेसर पर लोड बढ़ेगा और कूलिंग क्षमता घट जाएगी। कोशिश करें कि दोनों यूनिट के बीच की दूरी 5 से 10 फीट से अधिक न हो।
सबसे उपयुक्त जगह का चुनाव
सबसे आदर्श स्थिति वह है जहां आउटडोर यूनिट छायादार जगह पर हो और इनडोर यूनिट के बिल्कुल करीब हो। अगर आप छत पर यूनिट रख रहे हैं, तो उसके ऊपर एक छोटी सी टीन या कंक्रीट की शेड लगवा दें, ताकि उस पर सीधी धूप न पड़े। इससे एसी की कूलिंग क्षमता बनी रहेगी और बिजली की बचत होगी।
अगर दीवार पर लगाना मजबूरी है, तो हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले एंटी-वाइब्रेशन पैड और मजबूत ब्रैकेट का इस्तेमाल करें। ब्रैकेट को जंग रोधी कोटिंग वाला चुनें। यदि दीवार पर लगाने से पाइप की लंबाई कम हो रही है, तो यह विकल्प बेहतर रहेगा। वहीं, अगर छत पर शेड के साथ लगाने से पाइप लंबा हो रहा है, तो दीवार पर फिट करना ही सही रहेगा।