पुलिस के लिए तैयार हुआ अभिज्ञान एप, फिंगरप्रिंट से चंद सेकंड में मिलेगा अपराधियों का रिकॉर्ड

भारत सरकार ने पुलिस और जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीक से लैस करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा ‘अभिज्ञान एप’ नाम से एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया है। यह एप स्मार्टफोन और एक पोर्टेबल स्कैनर के जरिए काम करेगा, जिससे पुलिस कर्मियों को किसी भी संदिग्ध का आपराधिक इतिहास तुरंत पता चल सकेगा।

इस तकनीक की मदद से अब पुलिस को किसी संदिग्ध के फिंगरप्रिंट मिलान के लिए थाने या जिला मुख्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सड़क पर गश्त या नाकेबंदी के दौरान ही एक छोटे स्कैनर और स्मार्टफोन की सहायता से फिंगरप्रिंट स्कैन किया जा सकेगा और मात्र 35 सेकंड में व्यक्ति का पूरा आपराधिक रिकॉर्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा।

कैसे काम करेगा अभिज्ञान एप?

यह एप राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा विकसित किया गया है। यह पुलिस के स्मार्टफोन को एक उन्नत जांच उपकरण में बदल देता है। इसके काम करने का तरीका काफी सरल और प्रभावी है:

  • पोर्टेबल स्कैनर: पुलिस कर्मियों के पास एक छोटा फिंगरप्रिंट स्कैनर होगा जो स्मार्टफोन से कनेक्ट होगा।
  • NAFIS डेटाबेस से जुड़ाव: यह एप सीधे नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) से जुड़ा है। यह एक केंद्रीय सर्वर है जिसमें देशभर के अपराधियों और कैदियों के फिंगरप्रिंट डिजिटल रूप में संग्रहीत हैं।
  • त्वरित परिणाम: जैसे ही संदिग्ध का अंगूठा स्कैनर पर रखा जाएगा, एप 35 सेकंड में उस फिंगरप्रिंट को डेटाबेस से मिलाकर स्क्रीन पर दिखा देगा कि व्यक्ति का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है या नहीं।

इस तकनीक से क्या बदलेगा?

पहले फिंगरप्रिंट मिलान की सुविधा पूरे देश में सिर्फ 1,556 स्थानों पर ही उपलब्ध थी। इस वजह से संदिग्धों को थाने या जिला मुख्यालय ले जाना पड़ता था, जिसमें काफी समय लगता था और अपराधियों के भागने का खतरा बना रहता था।

अब अभिज्ञान एप के आने से रियल-टाइम चेकिंग संभव हो गई है। पुलिस नाकेबंदी या गश्त के दौरान सड़क पर ही किसी भी संदिग्ध की जांच कर सकेगी। इससे वांटेड अपराधियों को मौके से भागने का मौका नहीं मिलेगा और आम नागरिकों को बेवजह थाने के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

एप के प्रमुख फीचर्स

  • विशाल डेटाबेस: इस एप में 1.3 करोड़ से अधिक अपराधियों का रिकॉर्ड मौजूद है।
  • विशेष अपराधियों का डेटा: इसमें 9.91 लाख ड्रग तस्करों और 3.65 लाख मानव तस्करी के मामलों का डेटा शामिल है।
  • सुरक्षा: यह एप टू-स्टेप ऑथेंटिकेशन (2FA) से सुरक्षित है, ताकि इसका दुरुपयोग न हो सके और डेटा की गोपनीयता बनी रहे।

तकनीक और सुरक्षा का बेहतरीन संगम

इस एप के लॉन्च के दौरान गृह मंत्री ने कहा कि अपराधियों को पकड़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें वैज्ञानिक और तकनीकी सबूतों के आधार पर सजा दिलाना भी जरूरी है। आने वाले समय में फिंगरप्रिंट के अलावा डीएनए, फेशियल रिकॉग्निशन और आईरिस स्कैन जैसे डिजिटल टूल्स का पुलिसिंग में और अधिक उपयोग बढ़ेगा। यह एप उसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जो पुलिस को तकनीकी रूप से सशक्त बनाएगा और अपराधों पर त्वरित कार्रवाई में मदद करेगा।