सौ वर्ष तक निरोगी रहने का रहस्य: आचार्य मनीष के अनमोल सुझाव

लखनऊ में आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम में आयुर्वेदाचार्य आचार्य मनीष जी ने स्वस्थ जीवन जीने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने बताया कि कैसे आयुर्वेद और जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके गंभीर बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उनकी बातों में स्वास्थ्य के प्रति गहरी समझ और व्यावहारिक दृष्टिकोण झलकता है।

आचार्य मनीष की व्यक्तिगत यात्रा: बीमारी से आयुर्वेद तक

आचार्य मनीष ने अपने जीवन का एक मार्मिक प्रसंग साझा किया। वे बताते हैं कि वे इतने अधिक बीमार रहते थे कि 1995 में आत्महत्या तक करने की सोच ली थी। साल 1987 में पीलिया होने के बाद अगले आठ साल तक वे लगातार कमर दर्द, वायरल और अन्य समस्याओं से जूझते रहे। उनका वजन घटकर मात्र 31 किलो रह गया था। यह समय उनके लिए नर्क के समान था।

आत्महत्या के लिए वे ट्रेन की पटरी पर लेट गए, लेकिन तभी एक साधु ने उन्हें सही रास्ता दिखाया। इसके बाद उन्होंने आयुर्वेद का सहारा लिया और मात्र तीन महीने में उनका 12 किलो वजन बढ़ गया। तब से उन्होंने संकल्प लिया कि वे इस विद्या को लोगों तक पहुंचाएंगे और उन्हें स्वस्थ रखने में मदद करेंगे।

देश में स्वास्थ्य सुधार के लिए आवश्यक कदम

आचार्य मनीष के अनुसार, यदि देश में स्वास्थ्य के स्तर को सुधारना है तो कुछ बुनियादी बातों को लागू करना बेहद जरूरी है। उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया:

  • बच्चों को स्कूली शिक्षा के दौरान ही सिखाया जाना चाहिए कि वे बीमारियों से कैसे बचे रहें।
  • मिलावटी खाद्य पदार्थों पर सख्त निगरानी और कार्रवाई होनी चाहिए।
  • जीवनशैली, योग और आहार को सही तरीके से अपनाकर बीमारियों से बचा जा सकता है।

आयुर्वेद के तीन महत्वपूर्ण सूत्र

आचार्य मनीष ने आयुर्वेद के तीन प्रमुख सूत्र साझा किए, जो शरीर को कई बीमारियों से बचाने में सहायक हो सकते हैं। इन सूत्रों का पालन करके कोई भी व्यक्ति दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्राप्त कर सकता है।

पहला सूत्र: “शुद्धो देहा मनश्च यस्य। सः जीवती वर्ष शतम्।” अर्थात जिस मनुष्य का शरीर और मन शुद्ध और विकार-मुक्त है, वह सौ वर्ष तक स्वस्थ और निरोगी रह सकता है।

दूसरा सूत्र: “लंघनं परम् औषधं।” अर्थात उपवास ही सबसे श्रेष्ठ औषधि है। आचार्य मनीष कहते हैं कि यदि पूरा भारत यह सीख जाए कि किसी भी बीमारी की स्थिति में दो-तीन दिन कुछ न खाएं और व्रत पर चले जाएं, तो ट्यूमर, हृदय रोग और रसौली जैसी गंभीर समस्याएं भी दूर रह सकती हैं।

तीसरा सूत्र: “सर्वेषां रोगाणां निदानं कुपिता मला:” अर्थात सभी रोगों की जड़ शरीर में एकत्रित विषैले तत्व हैं। जब शरीर में वात, पित्त या कफ असंतुलित होकर दूषित हो जाते हैं, तब बीमारियां उत्पन्न होती हैं। इन्हें दूर करने के लिए पंचकर्म किए जाते हैं।

घर पर खुद करें किडनी, लिवर और हार्ट की जांच

आचार्य मनीष ने बताया कि किडनी 70 प्रतिशत से अधिक खराब होने तक रिपोर्ट सामान्य आती रहती हैं। ऐसे में घर पर ही कुछ आसान तरीकों से जांच की जा सकती है।

किडनी की जांच का तरीका

  • सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक के मूत्र को एक बोतल में इकट्ठा करें।
  • रात 9 बजे से सुबह 9 बजे तक के मूत्र को दूसरी बोतल में इकट्ठा करें।
  • यदि रात का मूत्र दिन के मूत्र का तीसरा या चौथा हिस्सा है, तो यह स्वस्थ किडनी का संकेत है।

लिवर की जांच का तरीका

जब तक लिवर 80 से 85 प्रतिशत खराब नहीं हो जाता, तब तक अधिकांश रिपोर्टों में स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती। इसकी जांच का एक सरल तरीका है। यदि आप रात में 10-11 बजे सोते हैं और 2:30 से 3 बजे के बीच आपकी नींद खुल जाती है, तो यह लिवर की समस्या की ओर इशारा हो सकता है।

हृदय की जांच का तरीका

  • सुबह 9-10 बजे ब्लड प्रेशर की जांच करें।
  • रात में 9-10 बजे फिर से ब्लड प्रेशर की जांच करें।
  • यदि सुबह का ब्लड प्रेशर रात के ब्लड प्रेशर से 10 से 15 प्रतिशत अधिक है, तो यह स्वस्थ हृदय का संकेत है और हार्ट अटैक का जोखिम कम होता है।

आहार और जीवनशैली के महत्वपूर्ण नियम

आचार्य मनीष का मानना है कि बच्चों को स्कूल से ही आयुर्वेद की शिक्षा दी जानी चाहिए। उन्हें पता होना चाहिए कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए क्या खाएं, क्या न खाएं और किस मौसम में क्या खाना उचित है।

उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात समझाई कि आयुर्वेद के अनुसार फल और दूध एक साथ नहीं लेने चाहिए, क्योंकि इससे शरीर में सूजन की समस्या हो सकती है। लेकिन हम सभी मैंगो शेक और बनाना शेक खूब पीते हैं। उन्होंने सलाह दी कि यदि मैंगो शेक या बनाना शेक पीना है, तो गाय या भैंस के दूध के बजाय बादाम या नारियल के दूध में पीना चाहिए।

जिम और सप्लीमेंट्स पर सख्त राय

आचार्य मनीष ने जिम जाने को सेहत के लिए फायदेमंद बताया, लेकिन जिम में सप्लीमेंट्स लेने को सबसे बड़ी गलती करार दिया। उन्होंने कहा कि बॉडी बनाने के लिए जो पाउडर लोग खाते हैं, उससे किडनी और हड्डियों की गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। स्वस्थ रहने के लिए प्राकृतिक आहार और सही जीवनशैली ही सबसे अच्छा विकल्प है।