वैशाख अमावस्या 2026: 17 अप्रैल को पितरों की शांति के लिए करें ये उपाय

हिंदू धर्म में वैशाख मास का विशेष महत्व है। यह महीना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसे दान, पुण्य, व्रत तथा आध्यात्मिक साधना के लिए बहुत शुभ माना गया है। इस पूरे महीने में किए गए अच्छे कर्मों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। विशेष रूप से वैशाख अमावस्या का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। साल 2026 में यह दिन 17 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह पितरों की शांति और मोक्ष प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

वैशाख अमावस्या तिथि

वैशाख महीने की अमावस्या तिथि 16 अप्रैल को रात्रि 8:11 बजे से शुरू होगी और 17 अप्रैल को सायं 5:21 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी।

स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

इस दिन स्नान और दान के लिए शुभ मुहूर्त प्रातः 5:54 से लेकर 10:44 बजे तक है। इस समय में पवित्र नदियों में स्नान करने और दान करने का विशेष महत्व बताया गया है।

वैशाख अमावस्या का महत्व

वैशाख अमावस्या को पितृ दोष की शांति के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान और पूजा का फल सीधे पूर्वजों तक पहुंचता है और जीवन की बाधाएं कम होती हैं। इसके साथ ही यह दिन आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी महत्वपूर्ण है। लोग इस दिन व्रत रखते हैं, पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और भगवान की आराधना करते हैं।

इस दिन क्या दान करना चाहिए

वैशाख अमावस्या पर दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन अपनी क्षमता के अनुसार निम्नलिखित वस्तुओं का दान करना बहुत शुभ माना जाता है:

  • अन्न और जल का दान
  • वस्त्र, तिल और गुड़ का दान
  • छाता और जूते का दान
  • गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना
  • पितरों की शांति के लिए तिल और जल का दान

इसके अलावा पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इस दिन किए गए दान और पूजा का विशेष फल मिलता है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।