वैशाख अमावस्या 2026: पितरों की कृपा पाने के लिए करें इन चीजों का दान, दूर होंगे ग्रह दोष

हिंदू धर्म में वैशाख अमावस्या का विशेष महत्व है। यह दिन आत्मशुद्धि, पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और कर्म सुधार का प्रतीक माना जाता है। इस दिन किए गए पुण्य कर्म कई गुना फल देते हैं। वैशाख अमावस्या पर स्नान, दान और श्राद्ध कर्म करने से पितृ दोष से राहत मिलती है और पूर्वजों का आशीर्वाद वंश पर बना रहता है। मान्यता है कि सच्चे मन से कुछ विशेष चीजों का दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं और सभी ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है। साथ ही जीवन में सुख और शांति का आगमन होता है।

इस वर्ष वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जिसे अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जाता है। ऐसे में इस संयोग में दान करना और भी अधिक फलदायी हो सकता है। आइए जानते हैं कि इस दिन किन चीजों का दान करना श्रेष्ठ माना गया है।

वस्त्र का दान

वैशाख अमावस्या के दिन जरूरतमंदों को वस्त्र दान करने से मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। ऐसा करने से जीवन के कष्ट कम होते हैं और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

ठंडी छाछ का दान

इस दिन ठंडी छाछ का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इससे मानसिक शांति मिलती है और मन को संतुलन प्राप्त होता है। यह दान विशेष रूप से पितरों को समर्पित माना जाता है।

मटका दान

वैशाख अमावस्या के शुभ अवसर पर जल से भरा घड़ा (मटका) दान करने से पितरों को पितृ लोक में शांति मिलती है। इस दान से पितरों की कृपा बनी रहती है और पारिवारिक सुख-समृद्धि बढ़ती है।

पीले वस्त्र का दान

पीले कपड़े दान करने से जीवन में शुभता आती है। यह दान विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करने और सौभाग्य बढ़ाने में सहायक माना जाता है। पीला रंग शुभता और समृद्धि का प्रतीक है।

अन्न का दान

अन्नदान को सबसे श्रेष्ठ दान कहा गया है। वैशाख अमावस्या पर अन्न दान करने से भाग्योदय होता है और घर में धन-धान्य की कमी नहीं रहती। यह दान जीवन में समृद्धि और खुशहाली लाता है।

वैशाख अमावस्या मुहूर्त

  • स्नान-दान मुहूर्त: सुबह 4.23 बजे से सुबह 5.07 बजे तक
  • पूजा मुहूर्त: सुबह 5.52 बजे से सुबह 10.41 बजे तक

पितृ शांति मंत्र

ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

श्राद्ध मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।

पितृ दोष निवारण मंत्र

ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः।

गायत्री पितृ दोष निवारण मंत्र

ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः।

अस्वीकरण: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। प्रस्तुत सूचना और तथ्यों की सटीकता और संपूर्णता के लिए हम उत्तरदायी नहीं हैं।