NEET UG 2027: अब छह दिनों तक चलेगी परीक्षा, कंप्यूटर आधारित मोड पर बड़ा जोर
मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG के आयोजन में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। वर्ष 2027 से यह परीक्षा पारंपरिक पेन-पेपर मोड की जगह कंप्यूटर आधारित (CBT) तरीके से कराई जाएगी। सूत्रों के अनुसार, अब यह परीक्षा एक ही दिन के बजाय कम से कम छह दिनों तक आयोजित होगी। इस फैसले का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।
परीक्षा केंद्रों की संख्या में वृद्धि
नई व्यवस्था के तहत देशभर में एक हजार से अधिक परीक्षा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों का चयन करने से पहले उनकी विश्वसनीयता और बुनियादी सुविधाओं की गहन जांच की जाएगी। यह कदम परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए उठाया गया है। NEET UG देश की सबसे बड़ी स्नातक प्रवेश परीक्षाओं में से एक है, जिसमें हर साल लगभग 25 लाख अभ्यर्थी शामिल होते हैं।
पेपर लीक के बाद सुधारों की प्रक्रिया तेज
पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के कारण केंद्र सरकार ने इस प्रणाली में सुधार करने का निर्णय लिया। 2024 में हुए पेपर लीक विवाद के बाद यह मामला और गंभीर हो गया। जून 2024 में शिक्षा मंत्रालय ने इसरो के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। इस समिति ने परीक्षा सुधारों के लिए कई सुझाव दिए थे, जिन पर अब अमल किया जा रहा है।
जेईई की तर्ज पर होगा आयोजन
नई योजना के अनुसार, NEET UG का आयोजन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE की तर्ज पर कई दिनों में किया जाएगा। इससे परीक्षा का दबाव कम होगा और छात्रों को अपनी तैयारी दिखाने का बेहतर मौका मिलेगा। हालांकि, परीक्षा की पूरी रूपरेखा अभी अंतिम रूप दी जा रही है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) इस परीक्षा का आयोजन करती है, और इसके जरिए देशभर के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में प्रवेश दिया जाता है।
मेडिकल सीटों की स्थिति
देशभर में एमबीबीएस की कुल लगभग 1.08 लाख सीटें उपलब्ध हैं। इनमें से लगभग 56 हजार सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेजों में और करीब 52 हजार सीटें निजी मेडिकल कॉलेजों में हैं। NEET UG के अंकों के आधार पर न केवल एमबीबीएस, बल्कि बीडीएस, आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध चिकित्सा के स्नातक पाठ्यक्रमों में भी प्रवेश दिया जाता है।
लंबे समय से चर्चा में था बदलाव
NEET UG को कंप्यूटर आधारित कराने का प्रस्ताव नया नहीं है। शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच इस विषय पर कई वर्षों से चर्चा चल रही थी। हालांकि, 2024 में पेपर लीक विवाद के बाद इस प्रक्रिया को गति मिली। अब सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है, ताकि आने वाले वर्षों में परीक्षा प्रणाली पूरी तरह से सुरक्षित और पारदर्शी हो सके।
- परीक्षा अब छह दिनों में कंप्यूटर आधारित मोड पर होगी
- देशभर में 1000 से अधिक परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे
- केंद्रों की विश्वसनीयता और सुविधाओं की पहले जांच की जाएगी
- जेईई की तर्ज पर कई दिनों में होगा आयोजन
- पेपर लीक विवाद के बाद सुधारों की प्रक्रिया तेज हुई