मेटा के नए AI टूल ने इंस्टाग्राम यूजर्स की प्राइवेसी पर उठाए सवाल

मेटा ने हाल ही में अपना सबसे उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इमेज जनरेटर टूल पेश किया है, जिसे म्यूस इमेज नाम दिया गया है। तकनीकी दृष्टि से यह एक बड़ी छलांग है, लेकिन इसके लॉन्च के साथ ही डेटा प्राइवेसी, बिना अनुमति फोटो के उपयोग और डीपफेक जैसे गंभीर मुद्दे सामने आ गए हैं। अगर आपका इंस्टाग्राम अकाउंट सार्वजनिक है, तो यह जानकारी आपके लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

क्या है मेटा म्यूस इमेज टूल?

मेटा के अनुसार, यह उनकी सुपरइंटेलिजेंस लैब्स द्वारा विकसित सबसे शक्तिशाली इमेज जनरेशन मॉडल है। यह टूल टेक्स्ट निर्देशों के आधार पर बिल्कुल नई तस्वीरें बना सकता है और मौजूदा फोटो में बदलाव कर सकता है। उदाहरण के लिए, यह फोटो से धुंधलापन हटाने, बैकग्राउंड बदलने या किसी वस्तु का रंग बदलने जैसे काम कर सकता है।

फिलहाल यह सुविधा मेटा एआई एप, वेबसाइट, अमेरिका में इंस्टाग्राम स्टोरीज और कुछ देशों में व्हाट्सएप पर उपलब्ध है। जल्द ही इसे फेसबुक पर भी लाया जाएगा। साथ ही, मेटा म्यूस वीडियो नामक एक नए टूल पर भी काम कर रहा है।

विवाद की जड़ क्या है?

इस टूल की एक विशेषता ने यूजर्स और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच चिंता पैदा कर दी है। यह फीचर किसी भी व्यक्ति को सिर्फ इंस्टाग्राम यूजरनेम डालकर उस यूजर की शक्ल वाली नकली एआई फोटो बनाने की अनुमति देता है। इसके लिए टूल सार्वजनिक इंस्टाग्राम अकाउंट से असली तस्वीरों का उपयोग करता है।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि सार्वजनिक अकाउंट वाले यूजर्स के लिए यह फीचर डिफ़ॉल्ट रूप से चालू है। मेटा ने इसके लिए यूजर्स से कोई अनुमति नहीं ली है। अगर कोई यूजर चाहता है कि उसकी फोटो का उपयोग एआई इमेज बनाने के लिए न हो, तो उसे खुद सेटिंग्स में जाकर इस सुविधा को बंद करना होगा।

विशेषज्ञों की चेतावनी

टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों और उद्योग विश्लेषकों ने इस मामले पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार:

  • असली और नकली में अंतर करना मुश्किल होगा: जब करोड़ों लोगों के पास इतनी आसानी से डीपफेक बनाने का टूल आ जाएगा, तो इंटरनेट पर किसी भी तस्वीर पर भरोसा करना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
  • क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स के लिए खतरा: साइबर मीडिया रिसर्च और काउंटरपॉइंट रिसर्च के जानकारों का कहना है कि इससे इन्फ्लुएंसर्स की छवि को नुकसान पहुंच सकता है। कोई भी उनके चेहरे का उपयोग फर्जी विज्ञापनों या गलत गतिविधियों में कर सकता है।
  • पब्लिक प्रोफाइल का मतलब बदल गया: अब इंस्टाग्राम पर सार्वजनिक प्रोफाइल रखने का अर्थ सिर्फ अपनी तस्वीरें दुनिया को दिखाना नहीं रह गया है। आपकी तस्वीरें एआई के लिए कच्चे माल की तरह इस्तेमाल हो सकती हैं।

मेटा का बचाव

विवादों के बीच मेटा ने कुछ सुरक्षा उपायों की जानकारी दी है जो एआई से बनी नकली तस्वीरों की पहचान के लिए किए गए हैं:

  • कंटेंट सील: म्यूस इमेज से बनी हर तस्वीर में एक अदृश्य वॉटरमार्क होगा।
  • छेड़छाड़ करना मुश्किल: यदि कोई एआई जनरेटेड फोटो को क्रॉप करता है, उसका आकार बदलता है या उसका स्क्रीनशॉट भी लेता है, तब भी वह वॉटरमार्क फोटो में मौजूद रहेगा।
  • डिटेक्शन टूल: मेटा जल्द ही एक ऐसा टूल लाने वाला है जिससे आम लोग यह जांच सकेंगे कि कोई फोटो मेटा एआई से बनी है या असली।

यूजर्स के लिए सबक

मेटा का यह नया टूल तकनीकी दृष्टि से एक बड़ा कदम है, लेकिन यह ऑनलाइन प्राइवेसी के लिए एक गंभीर चुनौती भी है। यूजर्स को अब इस बात पर अधिक ध्यान देना होगा कि वे सोशल मीडिया पर क्या साझा कर रहे हैं। यदि आपका अकाउंट सार्वजनिक है, तो अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स को नियमित रूप से जांचना पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है।