पेंबा: 6000 मीटर की ऊंचाई फतह करने वाला पहला ह्यूमनॉइड, अब एवरेस्ट पर नए प्रयोग की तैयारी
रोबोटिक्स के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ गया है। अब तक ह्यूमनॉइड रोबोट को कारखानों, प्रयोगशालाओं और घरों तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब ये दुनिया की सबसे कठोर प्राकृतिक परिस्थितियों को भी चुनौती दे रहे हैं। हाल ही में, ‘पेंबा’ नाम के एक ह्यूमनॉइड रोबोट ने इक्वाडोर के चिम्बोराजो ज्वालामुखी पर 6,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई तक पहुंचकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। इस सफलता के बाद अब इस रोबोट को माउंट एवरेस्ट पर भेजने की योजना बनाई जा रही है, जहां यह सिर्फ चढ़ाई ही नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण कार्य भी करेगा।
चिम्बोराजो पर ऐतिहासिक चढ़ाई
पेंबा नाम का यह ह्यूमनॉइड रोबोट सिर्फ 1.32 मीटर ऊंचा और 35 किलोग्राम वजनी है। इसने इक्वाडोर के बर्फीले और बेहद खतरनाक चिम्बोराजो ज्वालामुखी पर चढ़ाई करके इतिहास रच दिया। इस दौरान रोबोट को भीषण ठंड और ऑक्सीजन की अत्यधिक कमी जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। ज्वालामुखी की ढलानों पर चढ़ते समय, सबसे कठिन और तकनीकी रूप से जटिल हिस्सों में टीम के सदस्यों को रोबोट को सहारा देना पड़ा, लेकिन फिर भी यह अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहा। यह दुनिया का पहला ह्यूमनॉइड रोबोट है जिसने इतनी ऊंचाई पर सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की है।
अगला लक्ष्य: माउंट एवरेस्ट
पेंबा को विकसित करने वाली टीम का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। उनका अगला बड़ा लक्ष्य माउंट एवरेस्ट पर इस रोबोट की क्षमताओं का परीक्षण करना है। इसके बाद, इस तकनीक को चंद्रमा और मंगल ग्रह जैसे अंतरिक्ष अभियानों में उपयोग करने की योजना है। एवरेस्ट पर यह मिशन सिर्फ एक रिकॉर्ड बनाने के लिए नहीं है, बल्कि इसके कई व्यावहारिक उद्देश्य भी हैं।
एवरेस्ट पर पेंबा के कार्य क्या होंगे?
नेपाल में प्रस्तावित इस परियोजना के तहत पेंबा को कई जिम्मेदारियां दी जाएंगी। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- पर्वत पर फैले कचरे को इकट्ठा करना, खासकर पुराने उपकरण और खाने के पैकेट।
- पर्यावरण से जुड़ा वैज्ञानिक डेटा एकत्र करना।
- खतरनाक और दुर्गम इलाकों की निगरानी करना।
- अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रोबोटिक क्षमताओं का परीक्षण करना।
इस परियोजना को एक अमेरिकी गैर-लाभकारी संगठन और एक नेपाली अभियान कंपनी ने मिलकर प्रस्तावित किया है।
एवरेस्ट पर कैसे काम करेगा पेंबा?
योजना के अनुसार, पेंबा को अलग-अलग हिस्सों में पर्वत पर ले जाया जाएगा। बेस कैंप (5,364 मीटर) से लेकर कैंप-IV (7,920 मीटर) तक विभिन्न स्थानों पर इसे दोबारा असेंबल किया जाएगा। इसके बाद, यह अपनी यांत्रिक भुजाओं की मदद से छोटे-छोटे कचरे को इकट्ठा करेगा।
चुनौतियां और समाधान
माउंट एवरेस्ट पर तापमान अक्सर -20 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चला जाता है, जो रोबोट की बैटरियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। इस समस्या से निपटने के लिए इंजीनियर रोबोट में हीटेड बैटरी कंपार्टमेंट और अंतरिक्ष यानों में इस्तेमाल होने वाले एक विशेष लुब्रिकेंट का उपयोग करने की तैयारी कर रहे हैं। इससे मशीन अत्यधिक ठंड में भी सुचारू रूप से काम कर सकेगी।
संतुलन बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती है। पेंबा को असमान और फिसलन भरी जमीन पर अपने कदमों को खुद समायोजित करने में सक्षम बनाने के लिए टीम मशीन लर्निंग आधारित सिस्टम पर काम कर रही है। इसके अलावा, ऊंचाई वाले इलाकों में मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के कारण, कम ऊंचाई पर सैटेलाइट कनेक्टिविटी का उपयोग किया जाएगा, जबकि अधिक ऊंचाई पर रोबोट अपनी स्वायत्त क्षमता के आधार पर काम करेगा।
कानूनी अड़चन और संभावित लागत
इस परियोजना के सामने सबसे बड़ी बाधा तकनीकी नहीं, बल्कि कानूनी है। फिलहाल नेपाल में गैर-मानवीय पर्वतारोहियों या रोबोट के लिए कोई विशेष कानूनी व्यवस्था मौजूद नहीं है। यही कारण है कि पहले इस मिशन को अनुमति नहीं मिल सकी। नेपाल सरकार अब सुरक्षा मानकों, संचालन प्रक्रिया और परमिट शुल्क को लेकर एक नया कानूनी ढांचा तैयार करने पर विचार कर रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, परमिट और अभियान की अवधि के आधार पर इस मिशन की लागत लगभग दो लाख से पांच लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 1.7 करोड़ से 4.2 करोड़ रुपये) तक हो सकती है। यदि नेपाल में आवश्यक नियम लागू हो जाते हैं, तो इस रोबोट का परीक्षण अगले सितंबर-नवंबर या सर्दियों (दिसंबर 2026 से फरवरी 2027) के दौरान किया जा सकता है।
भविष्य की संभावनाएं
डेवलपर्स को पेंबा से कई उम्मीदें हैं। उनका मानना है कि यदि पेंबा एवरेस्ट जैसे चुनौतीपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक काम कर लेता है, तो भविष्य में इसका उपयोग सिर्फ पर्वतारोहण तक सीमित नहीं रहेगा। ऐसे रोबोटों का उपयोग बचाव अभियानों, वैज्ञानिक अनुसंधान, पर्यावरण निगरानी और भविष्य के चंद्रमा एवं मंगल मिशनों में भी किया जा सकता है। यह तकनीक मानवता के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।