इंस्टाग्राम विज्ञापनों को लेकर सरकार का सख्त रुख, मेटा को जवाब देने के निर्देश
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर दिखाए जा रहे विज्ञापनों को लेकर केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने मेटा कंपनी को नोटिस भेजने का फैसला किया है, जिसमें इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों के बारे में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। यह मामला इस हफ्ते मेटा के लिए लगातार दूसरी बार सरकारी निगरानी में आने का कारण बना है। इससे पहले बुधवार को व्हाट्सएप के नए यूजरनेम फीचर पर भी सरकार ने आपत्ति जताई थी।
आइए समझते हैं कि पूरा मामला क्या है और सरकार इस मुद्दे पर इतनी गंभीर क्यों है।
इंस्टाग्राम विज्ञापनों पर क्यों उठा सवाल?
जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने मंत्रालय के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि वे इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) से जुड़े विज्ञापनों को लेकर मेटा को तुरंत तलब करें। सरकार यह जानना चाहती है कि ऐसे विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर कैसे प्रसारित हुए, जबकि कंपनी की अपनी कंटेंट रिव्यू पॉलिसी होती है। इसके अलावा, यह भी पूछा जाएगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मेटा ने कौन-कौन से सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया में कहां चूक हुई, इस पर भी विस्तृत जवाब मांगा जा सकता है।
एक हफ्ते में दूसरी बार सरकार के निशाने पर मेटा
यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने मेटा के खिलाफ सख्त कदम उठाए हों। बुधवार को ही केंद्र सरकार ने व्हाट्सएप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को लेकर कंपनी को नोटिस दिया था। हालांकि, अभी तक आईटी मंत्रालय ने इंस्टाग्राम विज्ञापनों के मामले में औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया है, लेकिन तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सरकार की नजर मेटा के उन सभी प्लेटफॉर्म्स पर है, जो भारत में बड़े पैमाने पर उपयोग किए जाते हैं।
व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर पर क्या है सरकार की आपत्ति?
व्हाट्सएप के नए यूजरनेम फीचर को लेकर सरकार ने गंभीर चिंता जताई थी। आशंका है कि यह फीचर ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और फर्जी पहचान बनाकर होने वाले साइबर हमलों को बढ़ावा दे सकता है। सरकार ने मेटा को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जब तक इस मुद्दे पर संतोषजनक बातचीत नहीं हो जाती, तब तक यूजरनेम फीचर लॉन्च न किया जाए। साथ ही, यह भी पूछा गया कि अगर इस फीचर से साइबर अपराध बढ़ने की संभावना है, तो आईटी एक्ट और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
आईटी नियमों का पालन करना अनिवार्य
सरकार ने मेटा को यह भी याद दिलाया कि व्हाट्सएप भारत में एक महत्वपूर्ण सोशल मीडिया इंटरमीडियरी (Significant Social Media Intermediary) के रूप में आईटी एक्ट और आईटी रूल्स के तहत तय सभी ड्यू डिलिजेंस दायित्वों का पालन करने के लिए बाध्य है। इसका मतलब है कि कंपनी की जिम्मेदारी केवल नए फीचर लॉन्च करना नहीं है, बल्कि यूजर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करना और संभावित दुरुपयोग को रोकना भी उसकी प्राथमिकता होनी चाहिए।
सरकार की मुख्य चिंताएं क्या हैं?
इन दोनों मामलों में सरकार का ध्यान मुख्य रूप से दो बड़े मुद्दों पर केंद्रित है:
- बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और संवेदनशील कंटेंट की रोकथाम।
- नए डिजिटल फीचर्स के जरिए बढ़ सकने वाले साइबर अपराधों पर नियंत्रण।
यही वजह है कि इंस्टाग्राम विज्ञापनों और व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर, दोनों मामलों में मेटा से विस्तृत जवाब मांगा जा रहा है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि तकनीकी कंपनियां भारतीय कानूनों का पालन करें और प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग न होने पाए।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर मेटा को औपचारिक रूप से तलब किया जाता है, तो कंपनी को इंस्टाग्राम विज्ञापन प्रणाली, कंटेंट मॉडरेशन और सुरक्षा उपायों पर अपना पक्ष रखना होगा। वहीं, व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर पर सरकार और मेटा के बीच आगे की चर्चा के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। फिलहाल, सरकार का सख्त रुख यह संकेत देता है कि वह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर नियंत्रण और जवाबदेही को लेकर कोई समझौता नहीं करेगी।