मुंह का छोटा सा घाव बना जानलेवा कैंसर: एक नर्स की संघर्ष गाथा

हमारा शरीर कई बार चुपके से संकेत देता है कि अंदर कुछ गड़बड़ है। बस ज़रूरत होती है उन संकेतों को समय पर पहचानने और गंभीरता से लेने की। अक्सर मुंह या जीभ में होने वाले छोटे-मोटे घावों को हम सामान्य छाला समझकर नज़रअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही साधारण सा लक्षण किसी गंभीर बीमारी की शुरुआत हो सकता है? फ्लोरिडा में रहने वाली 42 वर्षीय नर्स रेचल पासरेला की कहानी इस बात का जीता-जागता उदाहरण है। उनके साथ हुई घटना ने यह साबित कर दिया कि शरीर के छोटे-से-छोटे संकेत को भी नजरअंदाज करना कितना खतरनाक हो सकता है।

एक छोटे से लाल धब्बे से शुरू हुआ सफर

रेचल पेशे से नर्स हैं, इसलिए उन्हें शरीर के संकेतों को समझने की अच्छी समझ है। सितंबर 2025 में उनके निजी जीवन में एक बड़ा झटका लगा, जिसके बाद वह लगातार तनाव में रहने लगीं। इस तनाव का असर उनकी सेहत पर साफ दिखने लगा। वह हर समय थकान महसूस करती थीं, दिन में 12 से 14 घंटे सोने के बाद भी शरीर में ऊर्जा नहीं रहती थी। उनके बाल तेजी से झड़ने लगे। इसी दौरान उन्होंने अपनी जीभ पर एक छोटा, लाल रंग का दाग देखा।

शुरुआत में उन्होंने इसे माउथ अल्सर समझा, जो आमतौर पर कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। लेकिन तीन हफ्ते बीत जाने के बाद भी वह घाव ठीक नहीं हुआ। उल्टा, वह दिन-ब-दिन बड़ा होता गया और दर्द बढ़ने लगा। रेचल ने छह महीनों के अंदर चार अलग-अलग डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन सभी ने इसे सामान्य मुंह का संक्रमण मानकर टाल दिया।

इस बीच घाव लगातार बढ़ता रहा। रेचल के लिए खाना चबाना और निगलना मुश्किल हो गया, जिससे उनका वजन तेजी से घटने लगा। तब उन्हें एहसास हुआ कि मामला सामान्य नहीं है। उन्होंने घाव की बायोप्सी कराने का फैसला किया। इस जांच की रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया।

जांच में खुला कैंसर का भयावह सच

बायोप्सी रिपोर्ट में पता चला कि रेचल को ‘स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा’ है। सीधे शब्दों में समझें तो यह जीभ की ऊपरी सतह की कोशिकाओं से शुरू होने वाला एक प्रकार का कैंसर है। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि उनका कैंसर स्टेज-2 तक पहुंच चुका था, यानी बीमारी काफी फैल चुकी थी।

रेचल के लिए यह खबर और भी हैरान करने वाली थी क्योंकि उनमें कैंसर के कोई भी सामान्य जोखिम कारक मौजूद नहीं थे। वह न तो सिगरेट पीती थीं, न शराब का सेवन करती थीं। एक नर्स होने के नाते वह अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखती थीं और चीनी का सेवन भी बहुत कम करती थीं। उन्हें एचपीवी संक्रमण भी नहीं था। इसके बावजूद कैंसर ने उन्हें अपना शिकार बना लिया।

कैंसर से लड़ाई और जीभ का कटना

रेचल ने हार नहीं मानी। उन्होंने ठान लिया कि वह इस बीमारी से लड़ेंगी और जीतेंगी। इलाज के दौरान उन्हें कई बड़ी सर्जरी से गुजरना पड़ा, जिसका असर आज भी उनकी ज़िंदगी पर साफ दिखता है। डॉक्टरों को उनकी जीभ का कैंसरग्रस्त हिस्सा निकालने के लिए दो बार आंशिक ग्लॉसेक्टॉमी करनी पड़ी। इस सर्जरी में उनकी जीभ का लगभग 39 प्रतिशत हिस्सा काटकर निकाल दिया गया।

इसके अलावा, कैंसर को फैलने से रोकने के लिए उनकी नेक डिसेक्शन सर्जरी भी की गई, जिसमें गर्दन के उन लिम्फ नोड्स को हटा दिया गया जहां कैंसर फैलने की आशंका थी। आज रेचल के लिए रोजमर्रा के सामान्य काम करना भी एक चुनौती बन गया है। वह पहले की तरह खाना नहीं खा पातीं, निगलने और स्वाद महसूस करने में दिक्कत होती है। बोलने के लिए भी उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ती है।

क्या कहते हैं आंकड़े और विशेषज्ञ?

अमेरिका के नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार, जीभ का कैंसर अमेरिका में होने वाले सभी नए कैंसर मामलों का लगभग 1 प्रतिशत है। साल 2023 में अकेले अमेरिका में करीब 18,040 लोगों में इस कैंसर की पुष्टि हुई थी। दुनियाभर में हर साल इसके लगभग 1.50 लाख मामले सामने आते हैं। अधिकतर मामलों में यह कैंसर जीभ की ऊपरी सतह की स्क्वैमस कोशिकाओं से शुरू होता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, आमतौर पर जीभ या मुंह के कैंसर का खतरा उन लोगों में अधिक देखा जाता है जो लंबे समय तक तंबाकू, सिगरेट या शराब का सेवन करते हैं। ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) संक्रमण भी इसके खतरे को बढ़ा सकता है। लेकिन रेचल का मामला बताता है कि बिना किसी जोखिम कारक के भी यह बीमारी हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें तो उन्हें बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:

  • जीभ पर लगातार घाव या अल्सर जो दो हफ्ते में ठीक न हो
  • जीभ से बिना किसी वजह के खून आना
  • जीभ या जबड़े में लगातार दर्द बना रहना
  • खाना निगलने में परेशानी होना
  • गले में गांठ जैसा महसूस होना

रेचल का संदेश: समय रहते पहचानें संकेत

आज रेचल अपनी जिंदगी की इस जंग से उबर चुकी हैं, लेकिन उनकी ज़िंदगी पहले जैसी नहीं रही। वह कहती हैं, “अगर शुरुआती दिनों में ही मेरे लक्षणों को सही से पहचान लिया गया होता, तो शायद मेरी जीभ बच जाती और मैं आज भी अपनी पसंदीदा चीजें खा पाती और सही से बोल पाती।”

वह आगे कहती हैं, “सभी लोगों के लिए यह एक सीख है कि शरीर में कुछ भी असामान्य लगे तो उसे हल्के में न लें। देरी से स्थिति बिगड़ सकती है। कैंसर के मामलों में अक्सर ऐसा होता है कि लोग शुरुआती संकेतों को आम समस्या समझते रहते हैं और देखते-ही-देखते हालत गंभीर हो जाती है।”

रेचल की कहानी हमें यह सबक देती है कि सेहत के मामले में लापरवाही बहुत भारी पड़ सकती है। छोटे से दिखने वाले लक्षण भी किसी बड़ी बीमारी का संकेत हो सकते हैं। इसलिए, किसी भी तरह की शारीरिक समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर पूरी जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान और इलाज से कई गंभीर बीमारियों को मात दी जा सकती है।