होली भाई दूज 2026: होली के बाद क्यों मनाया जाता है भाई दूज का पर्व? जानें महत्व, पूजा विधि और कथा

फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर होली के रंगीन उत्सव के बाद, द्वितीया तिथि को भाई दूज का पवित्र पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष 5 मार्च 2026 को यह पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन भाई-बहन के अटूट प्रेम, रक्षा और मंगलकामना का प्रतीक है। इस अवसर पर बहनें अपने भाइयों के लिए व्रत रखती हैं, तिलक करती हैं और उनकी सुख-समृद्धि तथा दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं। आइए, इस पर्व के धार्मिक महत्व, पूजा विधि और लोककथा के बारे में जानते हैं।

भाई दूज का धार्मिक महत्व

भाई दूज को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन बहन द्वारा लगाया गया तिलक भाई को अकाल मृत्यु और बड़े संकटों से बचाता है। होली के बाद मनाई जाने वाली भाई दूज इस भावना से जुड़ी है कि रंगों के उल्लास के बाद पारिवारिक रिश्तों में मधुरता और स्थिरता बनी रहे। लोक परंपराओं में यह पर्व केवल एक रस्म नहीं, बल्कि बहन के समर्पण और आशीर्वाद का उत्सव है। बहन अपने भाई के मस्तक पर रोली और अक्षत का तिलक लगाकर उसके जीवन से नकारात्मकता दूर करने का संकल्प लेती है। यह दिन भाई के लिए सौभाग्य और सफलता का प्रतीक माना जाता है।

पूजा विधि

भाई दूज के दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। बहनें व्रत का संकल्प लेकर पूजा स्थल को सजाती हैं। पूजा के लिए एक थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई, नारियल और कलावा रखा जाता है। भाई को चौकी पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठाया जाता है। बहन उसके मस्तक पर तिलक लगाकर आरती उतारती है और मिठाई खिलाती है। कई स्थानों पर बहनें भाई के हाथ पर कलावा भी बांधती हैं और उसकी दीर्घायु के लिए मंगलकामना करती हैं। तिलक के बाद भाई अपनी बहन को उपहार देकर उसके स्नेह का सम्मान करता है।

पावन लोककथा

लोककथाओं के अनुसार, एक वृद्धा का पुत्र होली के बाद अपनी बहन से तिलक कराने निकला। रास्ते में उसे एक नदी, एक शेर और एक सर्प मिले, जिन्होंने उसके प्राण लेने की बात कही। लेकिन उसने पहले अपनी बहन से तिलक कराने की अनुमति मांगी। बहन ने तिलक करने के बाद भाई के मुख से सारी घटना सुनी और उसके प्राणों पर आए संकट को समझा। समाधान की खोज में उसे पता चला कि यदि वह हर विपत्ति को टाल दे तो भाई की रक्षा हो सकती है। वापसी में बहन शेर के लिए मांस, सर्प के लिए दूध और नदी के लिए ओढ़नी लेकर चली। मार्ग में उसने सभी को संतुष्ट कर दिया और इस प्रकार अपने साहस, प्रेम और त्याग से भाई की जान बचा ली। इसी कथा की स्मृति में बहनें भाई दूज के दिन व्रत रखती हैं, कथा सुनती हैं और अपने भाई की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।