उत्तराखंड संवाद 2026: एआई और शिक्षा के भविष्य पर डॉ. तृप्ता ठाकुर की राय
देहरादून में आयोजित उत्तराखंड संवाद 2026 के दौरान शिक्षा, तकनीक और भविष्य के कौशल पर एक महत्वपूर्ण चर्चा हुई। इस पैनल में वीएमएसबीयूटीयू की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला रहा है, लेकिन इसके लिए शिक्षकों को पूरी तरह तैयार होने की आवश्यकता है।
एआई: अवसर और चुनौतियाँ
डॉ. तृप्ता ठाकुर ने स्पष्ट किया कि शिक्षा में एआई का उपयोग एक क्रांतिकारी कदम है। हर नई वैज्ञानिक तकनीक की तरह इसमें भी अवसर और चुनौतियाँ दोनों मौजूद हैं। उन्होंने परमाणु ऊर्जा का उदाहरण देते हुए कहा कि जब यह तकनीक विकसित हुई, तो इससे बिजली उत्पादन जैसे लाभ मिले, लेकिन साथ ही विनाशकारी परमाणु बम का खतरा भी पैदा हुआ। इसी तरह एआई को भी दोहरे दृष्टिकोण से देखना जरूरी है।
बच्चों और स्मार्टफोन का मुद्दा
सबसे बड़ी चिंता यह है कि छोटे बच्चों को समय से पहले स्मार्टफोन दे दिया जाता है, जो उनके मानसिक और शारीरिक विकास के लिए उचित नहीं है। डॉ. ठाकुर ने बताया कि कई विकसित देशों में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए स्मार्टफोन के उपयोग पर नियंत्रण की बातें सामने आई हैं। यह एक गंभीर मुद्दा है, जिस पर ध्यान देना आवश्यक है।
शिक्षक-छात्र संवाद की भूमिका
एआई के क्षेत्र में अवसर असीमित हैं। कोई भी विद्यार्थी अब घर बैठे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों से सीख सकता है। इससे शिक्षा का स्तर बेहतर होगा और ज्ञान तक पहुंच आसान हो जाएगी। हालांकि, डॉ. ठाकुर ने जोर देकर कहा कि शिक्षा केवल तकनीक से पूरी नहीं होती। शिक्षक और छात्र के बीच सीधा संवाद और चर्चा बहुत जरूरी है। कई बार हम किसी विषय को तब बेहतर समझते हैं जब हम उस पर शिक्षक से सवाल-जवाब करते हैं और चर्चा करते हैं। यह मानवीय संपर्क एआई की पहुंच से परे है।
शिक्षकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती
सबसे बड़ी चुनौती शिक्षकों के लिए यह है कि एआई बहुत तेजी से विकसित हो रहा है, जबकि अधिकांश शिक्षक अभी इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। डॉ. ठाकुर ने कहा कि सबसे पहले आवश्यकता इस बात की है कि शिक्षकों को एआई के उपयोग के लिए प्रशिक्षित किया जाए। आने वाले समय में ऐसे शिक्षकों की मांग बढ़ेगी जो तकनीक और पारंपरिक शिक्षा दोनों को साथ लेकर चल सकें। एआई शिक्षा में क्रांति लाएगा, लेकिन उसका सही उपयोग तभी संभव है जब शिक्षक और विद्यार्थी दोनों इसके लिए तैयार हों।
एआई को समझने वालों की बढ़ेगी मांग
डॉ. तृप्ता ठाकुर ने भविष्यवाणी की कि आने वाले समय में ऐसे लोगों की मांग तेजी से बढ़ेगी जो एआई को अच्छी तरह समझते हों। खासकर उन इंजीनियरों और पेशेवरों को अधिक अवसर मिलेंगे, जिन्हें एआई की जानकारी और उसका उपयोग करना आता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एआई हमारे लिए एक उपयोगी टूल और साधन बनेगा, लेकिन इसका इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर और जिम्मेदारी के साथ करना होगा।
सरकार की भूमिका
डॉ. ठाकुर ने बताया कि भारत सरकार भी इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है। सरकार यह समझने और तय करने की कोशिश कर रही है कि एआई को शिक्षा से बेहतर तरीके से कैसे जोड़ा जाए और इसके उपयोग को किस तरह नियंत्रित किया जाए, ताकि इसका लाभ छात्रों को मिल सके। यह एक सकारात्मक कदम है जो शिक्षा के भविष्य को सुरक्षित और प्रभावी बनाएगा।