टेलीग्राम बैन: आईआईटी निदेशक और टेक विशेषज्ञ के बीच ‘म्याऊं म्याऊं’ से शुरू हुई बहस

नीट री-एग्जाम से ठीक पहले सरकार द्वारा टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध ने एक नई तकनीकी बहस को जन्म दे दिया है। आईआईटी कानपुर के निदेशक और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच सोशल मीडिया पर यह बहस छिड़ गई है, जिसकी शुरुआत एक मजाकिया ‘म्याऊं म्याऊं’ मैसेज से हुई। इस पूरे विवाद का केंद्र टेलीग्राम का मैसेज एडिट करने का फीचर और पेपर लीक के कथित सबूत हैं।

सरकार का फैसला और आईआईटी निदेशक का तर्क

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने टेलीग्राम पर धोखाधड़ी और पेपर लीक की गतिविधियों की शिकायत की थी, जिसके बाद सरकार ने इस प्लेटफॉर्म पर अस्थायी रोक लगाने का आदेश दिया। इस फैसले के समर्थन में आईआईटी कानपुर के निदेशक मनिंद्र अग्रवाल ने एक तर्क पेश किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि टेलीग्राम की असली समस्या पेपर लीक शेयर करना नहीं है, बल्कि उसका ‘मैसेज एडिटिंग’ फीचर है। उनके अनुसार, यह फीचर जालसाजों को परीक्षा के बाद अपने पुराने पोस्ट को एडिट करके ऐसा दिखाने की सुविधा देता है, मानो प्रश्न पत्र परीक्षा से पहले ही उनके पास मौजूद था। यह तर्क दिया गया कि इसी वजह से फर्जी सबूत बनाना आसान हो जाता है।

सार्थक सिद्धांत का ‘म्याऊं म्याऊं’ पलटवार

आईआईटी निदेशक के इस दावे को तकनीकी रूप से चुनौती देते हुए छात्र और टेक विशेषज्ञ सार्थक सिद्धांत ने एक अनोखा जवाब दिया। सार्थक ने अपने साथी निसर्ग अधिकारी के साथ मिलकर दावों की सत्यता की जांच की। उन्होंने एक पुराना मैसेज भेजकर उसे बाद में एडिट कर ‘म्याऊं म्याऊं’ लिख दिया। इस प्रक्रिया को स्क्रीनशॉट के जरिए साबित करते हुए सार्थक ने दिखाया कि टेलीग्राम पर किसी भी मैसेज को एडिट करने पर उसके नीचे साफ-साफ ‘Edited’ लिखा आ जाता है। इसके अलावा, एडिट हिस्ट्री को भी आसानी से देखा जा सकता है।

सार्थक ने तर्क दिया कि अगर कोई जालसाज परीक्षा के बाद किसी पुराने मैसेज को एडिट करके उसमें लीक पेपर डालेगा, तो उस पर तुरंत ‘Edited’ का टैग लग जाएगा। इससे साफ हो जाएगा कि यह सबूत फर्जी है। इस तरह, आईआईटी निदेशक का यह कहना कि टेलीग्राम बिना किसी निशान के मैसेज बदलने की अनुमति देता है, तकनीकी रूप से गलत साबित हुआ।

साइबर विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

प्रसिद्ध साइबर सुरक्षा शोधकर्ता निसर्ग अधिकारी ने इस पूरे मामले पर तंज कसते हुए कहा कि पेपर लीक तो रोक नहीं पा रहे और आखिर में टेलीग्राम को ब्लॉक कर दिया। उन्होंने तकनीकी पहलू को समझाते हुए बताया कि टेलीग्राम को पूरी तरह से ब्लॉक करना इतना आसान नहीं है। इस प्लेटफॉर्म को इस तरह डिजाइन किया गया है कि लोग प्रॉक्सी टूल्स और वीपीएन के जरिए आसानी से इसका इस्तेमाल जारी रख सकते हैं।

प्रतिबंध के बावजूद टेलीग्राम का उपयोग

सरकार के आदेश के बावजूद, सोशल मीडिया पर कई उपयोगकर्ताओं ने स्क्रीनशॉट साझा कर दावा किया कि उनका टेलीग्राम सामान्य रूप से काम कर रहा है। उपयोगकर्ता एक-दूसरे को वीपीएन और प्रॉक्सी सेटिंग्स का उपयोग करने की सलाह दे रहे हैं। कुछ उपयोगकर्ताओं ने हैरानी जताई कि अगर बैन है, तो वे इसे कैसे इस्तेमाल कर पा रहे हैं।

यह पूरी बहस इस बात को उजागर करती है कि तकनीकी प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने से पहले उनकी कार्यप्रणाली को पूरी तरह समझना जरूरी है। एक तरफ सरकार परीक्षा की पवित्रता बनाए रखने के लिए कदम उठा रही है, वहीं दूसरी तरफ तकनीकी विशेषज्ञ इन फैसलों की तार्किकता पर सवाल उठा रहे हैं।