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होलिका दहन पूजन सामग्री: क्यों चढ़ाते हैं कच्चा सूत और उपले? जानें जरूरी सामग्री

होली का त्योहार केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। होली या धुलेंडी से पहले होलिका दहन की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस दिन लोग होलिका बनाकर उसमें आग लगाते हैं और अपने भीतर की बुराइयों को दूर करने का संकल्प लेते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, होलिका अपने भतीजे प्रह्लाद के साथ अग्नि में बैठी थी, लेकिन भगवान नरसिंह ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की और होलिका जलकर भस्म हो गई। तब से हर साल होलिका दहन मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 3 मार्च को मनाया जाएगा।

होलिका का निर्माण और दहन बिना पूजा के पूरा नहीं होता। दहन से पहले विशेष पूजन सामग्री से होलिका की अर्चना की जाती है। इन सामग्रियों के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। आइए जानते हैं कि होलिका दहन में किन चीजों का उपयोग किया जाता है और इनका क्या महत्व है।

होलिका पर क्यों चढ़ाते हैं कच्चा सूत?

होलिका बनाते समय उसे कच्चे सूत से लपेटा जाता है। कई जगहों पर परिक्रमा करते समय लोग कच्चे सूत को तोड़-तोड़कर आग में डालते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कच्चे सूत का संबंध शनिदेव से माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि होलिका की अग्नि में कच्चा सूत अर्पित करने से कुंडली में शनि की स्थिति मजबूत होती है और शनि दोष से मुक्ति मिलती है।

होलिका पर क्यों अर्पित किए जाते हैं उपले?

होलिका दहन के दिन गोबर के उपलों की माला बनाकर होलिका पर चढ़ाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, महिलाएं परिवार की नजर उतारकर इन उपलों को अग्नि में अर्पित करती हैं। ऐसा करने से घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गोबर के उपले जलाने से शनि और राहु-केतु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। जिन जातकों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती या ढैया चल रही है, उन्हें होलिका की अग्नि में गाय के गोबर के उपले अर्पित करने चाहिए।

होलिका दहन की पूजन सामग्री

  • गोबर के उपले (कंडे)
  • कच्चा सूत (मौली)
  • फूल
  • हल्दी
  • रोली
  • चंदन
  • सूखी लकड़ियां
  • चावल (अक्षत)
  • गुड़
  • बताशे
  • कच्चे आम की बौर
  • नारियल
  • गेहूं की बालियां
  • धूप-दीप
  • अगरबत्ती
  • पान-सुपारी
  • गुलाल

यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी जानकारी की सटीकता या संपूर्णता के लिए कोई जिम्मेदारी नहीं ली जाती है।

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