जेईई एडवांस्ड 2026: लाखों छात्रों का डेटा लीक, 16 वर्षीय साइबर रिसर्चर ने पकड़ी खामी
देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई एडवांस्ड 2026 के आयोजन में बड़ी सुरक्षा चूक सामने आई है। आईआईटी रुड़की द्वारा संचालित इस परीक्षा के रिजल्ट पोर्टल पर क्लाउड स्टोरेज की गड़बड़ी के कारण लगभग 1.8 लाख अभ्यर्थियों का व्यक्तिगत डेटा सार्वजनिक हो गया था। इस गंभीर खामी को एक 16 वर्षीय साइबर सुरक्षा शोधकर्ता ने उजागर किया, जिसके बाद संस्थान ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इसे ठीक किया।
बिना लॉगिन के खुल रहा था संवेदनशील डेटा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक युवा शोधकर्ता ने बताया कि जेईई एडवांस्ड 2026 के परिणामों से जुड़े बुनियादी ढांचे में पब्लिक क्लाउड स्टोरेज की सेटिंग में गंभीर त्रुटि थी। इस तकनीकी चूक के कारण बिना किसी प्रकार के लॉग-इन या प्रमाणीकरण के ही लाखों परीक्षार्थियों की गोपनीय जानकारियां सार्वजनिक रूप से देखी जा सकती थीं।
शोधकर्ता के अनुसार, इस बग की वजह से करीब 1.79 लाख छात्रों के परीक्षा परिणामों के रिकॉर्ड और लगभग 1.87 लाख अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्रों (एडमिट कार्ड) की पीडीएफ फाइलें सीधे खुल रही थीं। इन दस्तावेजों में उम्मीदवारों के नाम, जन्म तिथियां और पंजीकृत मोबाइल नंबर जैसी अत्यधिक संवेदनशील जानकारियां दर्ज थीं।
आईआईटी रुड़की ने मानी चूक, शोधकर्ता का आभार
शिकायत मिलने के बाद आईआईटी रुड़की ने इस सुरक्षा खामी को गंभीरता से लिया। संस्थान ने तुरंत अपनी तकनीकी टीम को सक्रिय करते हुए इस त्रुटि को दुरुस्त किया। बाद में आईआईटी रुड़की ने सोशल मीडिया पर एक आधिकारिक बयान जारी कर इस बात की पुष्टि की।
संस्थान ने अपने बयान में कहा, “क्लाउड स्टोरेज डिवाइस की कॉन्फ़िगरेशन से जुड़ी इस त्रुटि से अवगत कराने के लिए हम शोधकर्ता का धन्यवाद करते हैं। हम प्राथमिकता के आधार पर इस समस्या का समाधान कर रहे हैं। यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि जो डेटा वहां मौजूद था, वह केवल पढ़ने योग्य (रीड-ओनली) प्रारूप में था, इसलिए उसमें किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या बदलाव करना संभव नहीं था। हम आपके इस जिम्मेदार और नैतिक सुरक्षा शोध की सराहना करते हैं।”
साइबर सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण सबक
यह घटना देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक के डेटा प्रबंधन में गंभीर कमियों को उजागर करती है। एक ओर जहां आईआईटी रुड़की ने त्वरित सुधार करके जिम्मेदारी दिखाई, वहीं दूसरी ओर यह मामला बड़े पैमाने पर ऑनलाइन परीक्षाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डेटा सुरक्षा के मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए संस्थानों को अपने क्लाउड स्टोरेज सिस्टम की नियमित जांच करनी चाहिए और सुरक्षा ऑडिट को अनिवार्य बनाना चाहिए। साथ ही, नैतिक हैकर्स (एथिकल हैकर्स) द्वारा इस तरह की खामियों को उजागर करना साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस पूरे प्रकरण से यह साबित होता है कि डिजिटल युग में लाखों छात्रों का संवेदनशील डेटा कितनी आसानी से जोखिम में पड़ सकता है, और ऐसे में सुरक्षा उपायों को लगातार अपडेट और सख्त रखना कितना आवश्यक है। आईआईटी रुड़की द्वारा इस खामी को तुरंत सुधारना और शोधकर्ता का आभार व्यक्त करना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन भविष्य में इस तरह की चूक को रोकने के लिए और अधिक मजबूत प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है।