नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामला: संसदीय समिति ने सीबीआई निदेशक और एनटीए प्रमुख से मांगा जवाब
देशभर में हलचल मचाने वाले नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जांच अब संसदीय समिति के दायरे में आ गई है। शुक्रवार को हुई एक अहम बैठक में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक प्रवीण सूद और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक अभिषेक सिंह को तलब किया गया। समिति ने इन वरिष्ठ अधिकारियों से परीक्षा में हुई अनियमितताओं और जांच की प्रगति के बारे में स्पष्ट जवाब मांगे।
बैठक में शामिल प्रमुख अधिकारी
डॉ. एम. थंबीदुरई की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में कई उच्च पदस्थ अधिकारियों को आमंत्रित किया गया। सीबीआई निदेशक और एनटीए महानिदेशक के अलावा, शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी भी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के अध्यक्ष को भी बैठक में अपने विचार रखने के लिए बुलाया गया। समिति का मुख्य उद्देश्य परीक्षा संचालन प्रक्रिया में खामियों को समझना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपायों पर चर्चा करना था।
समिति के सामने रखे गए मुद्दे
राज्यसभा सचिवालय द्वारा 27 मई को जारी नोटिस के अनुसार, सरकारी आश्वासन समिति ने शिक्षा मंत्रालय, एनटीए और सीबीआई के शीर्ष अधिकारियों को तलब किया था। बैठक में विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा हुई:
- नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले में अब तक हुई जांच की स्थिति।
- एनटीए द्वारा परीक्षाओं के संचालन में अपनाई जा रही सुरक्षा व्यवस्था।
- परीक्षा में शामिल वेंडरों और एजेंसियों के चयन की प्रक्रिया।
- पेपर लीक की घटना के बाद सीबीआई द्वारा की गई कार्रवाई।
समिति ने अधिकारियों से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने पर जोर दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद राज्यसभा में 27 नवंबर 2024 को पूछे गए एक अनस्टार्ड प्रश्न से जुड़ा है। इस प्रश्न में एनटीए द्वारा परीक्षाओं के आयोजन में पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसके जवाब में शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि परीक्षा आयोजित करने के लिए एजेंसियों को सरकारी नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुसार ही ठेके दिए जाते हैं। यदि किसी वेंडर के खिलाफ शिकायत मिलती है, तो अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्रवाई की जाती है, जिसमें भुगतान रोकने से लेकर एजेंसी को डिबार करने तक के प्रावधान शामिल हैं।
गौरतलब है कि नीट यूजी परीक्षा इस वर्ष 3 मई को आयोजित की गई थी। हालांकि, पेपर लीक के गंभीर आरोपों के बाद एनटीए को 12 मई को परीक्षा रद्द करनी पड़ी। फिलहाल इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है, और रद्द हुई परीक्षा के स्थान पर दोबारा परीक्षा 21 जून को आयोजित करने का प्रस्ताव है। संसदीय समिति की यह बैठक इस पूरे प्रकरण को एक नई दिशा देने वाली मानी जा रही है, जहां जांच की गति और परीक्षा सुधारों पर गंभीर मंथन हुआ।