एनटीए की विश्वसनीयता पर गहरा संकट: नीट पेपर लीक के बाद 11 साल पुरानी गलती दोहराई गई

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए), जो नीट, जेईई और सीयूईटी जैसी देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं का आयोजन करती है, एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। राजस्थान में पेपर लीक के मामले और 120 प्रश्नों के पहले से सार्वजनिक होने के बाद नीट-यूजी परीक्षा को रद्द करना पड़ा। इस घटना ने 2015 में हुए एआईपीएमटी कांड की यादें ताजा कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राधाकृष्णन पैनल की सिफारिशों को लागू न करना और डिजिटल सुरक्षा में सुधार न होना एनटीए की बड़ी विफलता है। पिछले दो वर्षों में तीन महानिदेशकों का बदलना भी एजेंसी में अस्थिरता को दर्शाता है।

परीक्षा प्रणाली में बार-बार हो रही चूक

एनटीए ने 2024 में भी इसी तरह के आरोपों का सामना किया था। उस समय परीक्षा संचालन में सुधार के लिए एक उच्चस्तरीय पैनल का गठन किया गया था। कई सिफारिशें की गईं, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। 2025 में नीट-यूजी परीक्षा शांतिपूर्वक संपन्न हुई थी, लेकिन बिजली कटौती जैसी समस्याओं के कारण छात्रों को हाईकोर्ट का रुख करना पड़ा। इस साल एनटीए के लिए शर्मिंदगी भरा रहा है। 6 मई को जारी प्रोविजनल आंसर-की में भौतिकी के न्यूमेरिकल सवालों को लेकर संदेह पैदा हुआ। इससे पहले, जेईई मेन की आंसर-की में बदलाव करना पड़ा था, जहां छात्रों की शिकायतों के बाद रसायन विज्ञान खंड की 19 त्रुटियों को सुधारा गया। सीयूईटी में परीक्षा केंद्रों के दूरदराज के शहरों में आवंटन को लेकर भी हंगामा हुआ। हालांकि एनटीए ने बाद में सुधार किए, लेकिन ऐसी घटनाएं एजेंसी की अक्षमता और लापरवाही को उजागर करती हैं।

गठन के बाद से ही विवादों में एनटीए

2017 में अपनी स्थापना के बाद से एनटीए कई विवादों से घिरा रहा है। पिछले नौ वर्षों में, पेपर लीक और लापरवाही के मामले लगातार सामने आए हैं। कई बार प्रश्नपत्र छपाई के दौरान, तो कभी परिवहन के दौरान लीक हुए। कुछ मामलों में तो पेपर तैयार करने वालों ने ही प्रश्नपत्र लीक कर दिए। यहां तक कि एनटीए के महानिदेशक ने छात्रों से अपील की थी कि अगर प्रश्नपत्र लीक हो जाएं तो वे तुरंत एजेंसी को सूचित करें। यह स्थिति सवाल खड़ी करती है कि क्या एनटीए एक सुरक्षित और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली विकसित कर पाएगा, या फिर यह जिम्मेदारी किसी अन्य संस्था को सौंपी जानी चाहिए।

2015 के बाद पहली बार स्वतः संज्ञान लेकर रद्द हुई परीक्षा

नीट-यूजी प्रश्नपत्रों के 420 सवालों में से 120 सवाल हू-ब-हू पहले से सार्वजनिक हो गए थे। आरोप है कि ये सवाल परीक्षा से 15 दिन पहले ही प्रसारित हो गए थे। एनटीए ने इन आरोपों को गंभीर मानते हुए 2015 एआईपीएमटी के बाद पहली बार स्वतः संज्ञान लेते हुए पूरी परीक्षा रद्द कर दी। यह तब हुआ जब एनटीए ने दावा किया था कि 3 मई की परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और बिना किसी गड़बड़ी के हुई थी। 2015 में एआईपीएमटी परीक्षा को सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक के सबूत मिलने के बाद रद्द कर दिया था। उस समय ब्लूटूथ और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से नकल करने का मामला सामने आया था। 11 साल बाद फिर इतिहास दोहराया गया है।

दो साल में तीन महानिदेशक

एनटीए अपनी नाकामी का दोष अधिकारियों पर मढ़ रहा है, लेकिन इसके पीछे एजेंसी में निरंतरता और स्थिरता की कमी भी एक बड़ी वजह हो सकती है। जून 2024 में पेपर लीक मामले के बीच महानिदेशक सुबोध कुमार सिंह को हटा दिया गया था। उसके बाद आईटीपीओ के चेयरमैन को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया, जो अक्टूबर 2025 तक चला। फिर आईएएस अधिकारी राजेश लखानी को जिम्मेदारी दी गई, लेकिन नीट-यूजी 2026 से कुछ दिन पहले ही अभिषेक सिंह को प्रभार दे दिया गया। इस तरह दो वर्षों से भी कम समय में तीसरा व्यक्ति एजेंसी का प्रमुख बन गया है।

राधाकृष्णन पैनल की सिफारिशें लागू नहीं हुईं

राधाकृष्णन पैनल ने एनटीए में सुधार के लिए कई सुझाव दिए थे। इनमें शामिल थे:

  • कई दिनों में आयोजित मल्टी-सेशन टेस्ट फॉर्मेट
  • मानकीकृत परीक्षा केंद्रों की स्थापना
  • ग्रामीण क्षेत्रों के लिए मोबाइल टेस्टिंग केंद्र
  • डिजिटल परीक्षा प्रणाली
  • बायोमेट्रिक्स और एआई आधारित मल्टी-स्टेज ऑथेंटिकेशन सिस्टम
  • एन्क्रिप्टेड प्रश्नपत्रों के साथ हाइब्रिड टेस्ट
  • टेस्टिंग सेंटरों पर हाई-स्पीड प्रिंटर और पीपीटी फॉर्मेट में प्रश्नपत्र वितरण
  • कोचिंग इंडस्ट्री की निगरानी और स्कूल शिक्षा को मजबूत करना

हालांकि, इनमें से अधिकतर सुधारों को लागू नहीं किया गया। इससे साफ है कि एनटीए अपनी कमजोरियों को दूर करने में विफल रहा है।