नीट यूजी 2026: परीक्षा से पहले एनटीए ने किए थे ये बड़े सुरक्षा दावे, अब जांच के घेरे में
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 को लेकर पेपर लीक के आरोपों और परीक्षा रद्द होने के बाद अब राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) की ओर से किए गए सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। परीक्षा से ठीक एक दिन पहले यानी 2 मई 2026 को एनटीए ने एक विस्तृत बयान जारी कर दावा किया था कि नीट यूजी 2026 को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए हरसंभव कदम उठाए गए हैं। मगर परीक्षा के बाद हुई घटनाओं ने इन दावों की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा दिया है। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच सीबीआई कर रही है।
परीक्षा का आकार और दायरा
एनटीए के अनुसार, 3 मई 2026 को आयोजित यह परीक्षा भारत के 551 शहरों के अलावा विदेशों के 14 शहरों में भी आयोजित की गई थी। इसके लिए देशभर में 5432 से अधिक परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इस भव्य आयोजन में करीब 22.79 लाख अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था। एजेंसी ने इसे दुनिया की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में से एक बताते हुए इसके संचालन के लिए बड़े पैमाने पर प्रबंध किए जाने का दावा किया था।
दो लाख से अधिक कर्मियों की तैनाती
एनटीए ने बताया था कि परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए एक विशाल प्रशासनिक और सुरक्षा तंत्र खड़ा किया गया है। इसके तहत 674 सिटी कोऑर्डिनेटर शहर स्तर पर सभी व्यवस्थाओं की देखरेख कर रहे थे। इसके अलावा, परीक्षा केंद्रों पर स्वतंत्र निगरानी के लिए 6000 से अधिक ऑब्जर्वर तैनात किए गए थे। हर केंद्र पर सेंटर सुपरिटेंडेंट और निगरानीकर्ता मौजूद थे। जिला प्रशासन, पुलिस बल और एस्कॉर्ट टीमों को गोपनीय परीक्षा सामग्री की सुरक्षित आवाजाही के लिए लगाया गया था। एजेंसी के मुताबिक, परीक्षा संचालन में देशभर से दो लाख से ज्यादा कर्मी शामिल थे।
जीपीएस ट्रैकिंग, सीसीटीवी और बायोमेट्रिक सुरक्षा
परीक्षा को सुरक्षित बनाने के लिए एनटीए ने मल्टी-लेयर सुरक्षा ढांचा तैयार करने का दावा किया था। प्रश्न पत्र और अन्य गोपनीय सामग्री को सीलबंद प्रोटोकॉल के तहत सुरक्षित तरीके से पहुंचाया गया। परीक्षा सामग्री ले जाने वाले वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया था और उन्हें पुलिस एस्कॉर्ट भी प्रदान किया गया था। सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही थी, जिसकी लाइव फीड केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से देखी जा रही थी।
परीक्षा केंद्रों में प्रवेश से पहले हाई-सेंसिटिविटी मेटल डिटेक्टर से तलाशी लेना अनिवार्य किया गया था। उम्मीदवारों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की व्यवस्था भी लागू की गई थी। यदि किसी कारणवश बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण विफल हो जाता था, तो मैन्युअल सत्यापन का प्रावधान भी रखा गया था।
सोशल मीडिया निगरानी और टेलीग्राम चैनलों पर कार्रवाई
एनटीए ने यह भी दावा किया था कि फर्जी खबरों और संभावित गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की लगातार निगरानी की जा रही है। एजेंसी के अनुसार, 65 से अधिक टेलीग्राम चैनलों को ब्लॉक किया गया था, जिन पर फर्जी प्रश्नपत्र और अफवाहें फैलाने का आरोप था। इसके साथ ही, साइबर क्राइम अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज कराई गई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात भी कही गई थी।
गर्मी और सुविधाओं का विशेष ध्यान
गर्मी के मौसम और बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को देखते हुए एनटीए ने सभी केंद्रों पर बिजली बैकअप, पंखे, रोशनी, पीने का पानी, चिकित्सा सहायता और स्वच्छता की व्यवस्था का दावा किया था। उम्मीदवारों को पारदर्शी पानी की बोतल ले जाने की अनुमति दी गई थी। वहीं, डायबिटिक अभ्यर्थियों को शुगर टैबलेट, केला, सेब और संतरा जैसे फल ले जाने की छूट दी गई थी। दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए अतिरिक्त समय का भी प्रावधान किया गया था।
अफवाहों से बचने की सलाह
एनटीए ने परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों से अपील की थी कि वे किसी भी अफवाह या पेपर लीक से जुड़े दावों पर भरोसा न करें। उम्मीदवारों को शांत रहने और अपनी तैयारी पर भरोसा रखने की सलाह दी गई थी। एजेंसी ने केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी सूचनाओं को ही मानने को कहा था।
हालांकि, परीक्षा के बाद पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। इसके बाद एनटीए ने 3 मई को आयोजित नीट यूजी 2026 परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया। अब जांच एजेंसियां पूरे मामले, कथित नेटवर्क, सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रक्रिया की बारीकी से जांच कर रही हैं।