अंतरिक्ष में नई क्रांति: सुयश सिंह और दुनिया का पहला ऑप्टोसार उपग्रह
दुनिया भर में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ गया है। भारतीय मूल के उद्यमी सुयश सिंह इन दिनों चर्चा के केंद्र में हैं। उनकी कंपनी गैलेक्सआई ने दुनिया का पहला ऑप्टोसार उपग्रह सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। यह उपग्रह अपनी तरह का पहला हाइब्रिड सेंसर है, जो ऑप्टिकल और रडार इमेजिंग दोनों तकनीकों को एक साथ समेटे हुए है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बादलों, धुएं और घने अंधेरे में भी साफ और स्पष्ट तस्वीरें ले सकता है।
हाइपरलूप प्रतियोगिता से लेकर अंतरिक्ष तक का सफर
साल 2019 की बात है, जब कैलिफोर्निया में स्पेसएक्स के कार्यालय में ‘हाइपरलूप पॉड प्रतियोगिता’ का आयोजन हुआ। इस प्रतियोगिता में दुनिया भर के हजारों इंजीनियर और शोधकर्ता शामिल हुए। इन सबके बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास की एक टीम भी थी, जिसने अपने सपनों को एक छोटे से कैप्सूल यानी ‘पॉड’ में बांधकर इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। खास बात यह रही कि यह टीम 2,500 से अधिक आवेदकों में से फाइनल में पहुंचने वाली एकमात्र एशियाई टीम थी। टीम का नेतृत्व एक युवा इंजीनियर कर रहे थे, जो आगे चलकर सुयश सिंह के नाम से प्रसिद्ध हुए।
हालांकि फाइनल में जर्मनी की टीम ने बाजी मारी, लेकिन भारतीय टीम के अभिनव दृष्टिकोण और इंजीनियरिंग कौशल ने स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क को भी प्रभावित किया। मस्क ने न केवल पूरी टीम से मुलाकात की, बल्कि उनके काम की सराहना करते हुए उनके जुनून की तारीफ भी की। वही युवा इंजीनियर आज पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोर रहा है।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
सुयश सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। उनकी प्रारंभिक पढ़ाई मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के विभिन्न स्कूलों में हुई। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने आईआईटी मद्रास से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर्स की डिग्री हासिल की। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में डेटा एनालिटिक्स से की। इसके बाद वे मशीन विजन और डीप-टेक रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढ़े। वर्ष 2021 में उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर ‘गैलेक्सआई’ की स्थापना की।
भारत की पहली छात्र-नेतृत्व वाली हाइपरलूप टीम
आईआईटी में पढ़ाई के दौरान ही सुयश ने वर्ष 2017 में ‘आविष्कार हाइपरलूप’ टीम का गठन किया। यह भारत की पहली छात्र-नेतृत्व वाली हाइपरलूप टीम मानी जाती है। उनकी नवाचार क्षमता और नेतृत्व कौशल को देखते हुए उन्हें उद्यमिता की प्रतिष्ठित ’35 अंडर 35′ सूची में भी शामिल किया गया। इसके अलावा, वह AIESEC से भी जुड़े रहे हैं, जो युवाओं का एक वैश्विक गैर-लाभकारी संगठन है और दुनिया के 100 से अधिक देशों में सक्रिय है।
असफलता से सीख और नई रणनीति
सुयश पहली बार हाइपरलूप पॉड प्रतियोगिता में असफल रहे थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने खर्चे पर अमेरिका जाकर प्रतियोगिता को बारीकी से समझा और टीम की रणनीति में बदलाव किया। इसी बदलाव का नतीजा था कि 2019 में उनकी टीम फाइनल तक पहुंची। सुयश का मानना है कि हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का वह मेल ही सबसे प्रभावी होता है, जो जटिल डेटा को आम लोगों के लिए सरल बना सके।
प्रधानमंत्री से सराहना और प्रेरणादायक पल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में सुयश सिंह और उनकी टीम को ‘न्यू इंडिया के युवा नवोन्मेषक’ की संज्ञा देते हुए उनकी सराहना की। यह किसी भी युवा डीप-टेक संस्थापक के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। सुयश एक प्रभावशाली वक्ता भी हैं और टेडएक्स जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर अपने विचार रख चुके हैं।
एलन मस्क से मुलाकात को सुयश अपने जीवन का सबसे यादगार पल मानते हैं। वह मस्क को अपना प्रेरणास्रोत भी बताते हैं। मस्क का ‘फर्स्ट प्रिंसिपल्स’ दृष्टिकोण और असंभव लगने वाले लक्ष्यों को हासिल करने की उनकी क्षमता ने सुयश को गहराई से प्रभावित किया है।
प्राकृतिक आपदा से मिली प्रेरणा
सुयश को गैलेक्सआई स्टार्टअप की प्रेरणा किसी बोर्डरूम से नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक आपदा से मिली। वर्ष 2018 में कैलिफोर्निया के जंगलों में भीषण आग लगी थी। इस आग का अध्ययन करते समय सुयश ने एक गंभीर तकनीकी कमी महसूस की। पारंपरिक ऑप्टिकल उपग्रह घने धुएं के पार नहीं देख सकते थे, जबकि रडार डेटा इतना जटिल था कि आम लोगों के लिए इसका उपयोग करना मुश्किल था। इसी चुनौती ने उन्हें ‘ऑप्टोसार’ बनाने के लिए प्रेरित किया।
यह दुनिया का पहला हाइब्रिड सेंसर है, जो एक ही उपग्रह में ऑप्टिकल और रडार इमेजिंग दोनों की क्षमताओं को जोड़ता है। ‘मिशन दृष्टि’ के तहत लॉन्च किया गया यह उपग्रह आपदा प्रबंधन, खुफिया जानकारी और निगरानी जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।