यूपी पुलिस एसआई कटऑफ 2025: पारदर्शिता को लेकर उठे सवाल, अभ्यर्थियों की ये हैं प्रमुख मांगें

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPRPB) द्वारा उप निरीक्षक (नागरिक पुलिस) के 4543 पदों के लिए आयोजित लिखित परीक्षा का परिणाम और कटऑफ जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर हलचल मच गई है। 7 मई को घोषित इन परिणामों में कुल 12,333 अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन और शारीरिक परीक्षण के लिए चुना गया है, जो विज्ञापित पदों का लगभग 2.7 गुना है।

हालांकि, कटऑफ अंक सामने आने के बाद कई अभ्यर्थियों ने अपेक्षा से अधिक कटऑफ और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अभ्यर्थी अपनी बात रख रहे हैं और कई महत्वपूर्ण मांगें कर रहे हैं।

श्रेणीवार कटऑफ का विश्लेषण

लिखित परीक्षा कुल 400 अंकों की थी। बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सामान्य वर्ग के पुरुष अभ्यर्थियों के लिए सबसे अधिक कटऑफ 369.87854 अंक रही, जबकि एसटी वर्ग की महिला अभ्यर्थियों के लिए सबसे कम कटऑफ 306.91905 अंक दर्ज की गई। विभिन्न श्रेणियों के लिए कटऑफ इस प्रकार है:

  • अनारक्षित (UR): पुरुष – 369.87854, महिला – 360.50336
  • ओबीसी (OBC): पुरुष – 364.56024, महिला – 353.76545
  • ईडब्ल्यूएस (EWS): पुरुष – 364.41142, महिला – 353.22001
  • एससी (SC): पुरुष – 350.91474, महिला – 337.94120
  • एसटी (ST): पुरुष – 334.65475, महिला – 306.91905

पिछली भर्ती से तुलना

यूपी एसआई भर्ती 2021 में कटऑफ इस बार की तुलना में काफी कम थी। उस समय सामान्य वर्ग के लिए कटऑफ 302.09405 अंक थी, जबकि इस बार यह बढ़कर लगभग 370 अंक हो गई है। यह बढ़ोतरी परीक्षा में प्रतिस्पर्धा के बढ़े स्तर और प्रश्नों की कठिनाई में बदलाव को दर्शाती है। पिछली बार ईडब्ल्यूएस, ओबीसी, एससी और एसटी वर्गों की कटऑफ क्रमशः 285.56, 287.51, 260.14 और 223.33 अंक थी।

अभ्यर्थी क्यों उठा रहे हैं सवाल?

कटऑफ जारी होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया पर अपनी निराशा और संदेह व्यक्त किया है। एक अभ्यर्थी ने बताया कि 14 फरवरी की दूसरी पाली में उनके लगभग 355 अंक बन रहे थे, लेकिन वे मेरिट सूची में शामिल नहीं हो सके। वहीं, कुछ अन्य अभ्यर्थी 350 अंकों पर भी चयनित हुए हैं। इस विसंगति ने स्कोरकार्ड और नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एक अन्य उपयोगकर्ता ने ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्गों की कटऑफ के बीच बेहद मामूली अंतर पर हैरानी जताई। उनका कहना है कि इतनी अधिक कटऑफ न तो छात्रों ने देखी थी और न ही शिक्षकों ने। इससे भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

सोशल मीडिया पर उठाई जा रही प्रमुख मांगें

पारदर्शिता की कमी को देखते हुए अभ्यर्थी निम्नलिखित मांगें कर रहे हैं:

  • व्यक्तिगत स्कोरकार्ड जारी करना: सभी परीक्षार्थियों को उनके प्राप्तांक दिखाने के लिए स्कोरकार्ड उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे अपने प्रदर्शन का आकलन कर सकें।
  • विस्तृत मेरिट सूची प्रकाशित करना: डीवी/पीएसटी के लिए चयनित 12,333 अभ्यर्थियों की सूची में रजिस्ट्रेशन नंबर, रोल नंबर, नाम, पिता का नाम, लिंग, जन्मतिथि, परीक्षा पाली, कच्चे अंक और नॉर्मलाइजेशन के बाद के अंक शामिल किए जाएं।
  • शिफ्ट-वार नॉर्मलाइजेशन डेटा सार्वजनिक करना: प्रत्येक पाली में नॉर्मलाइजेशन के बाद के अंकों की विस्तृत जानकारी दी जाए, साथ ही यह बताया जाए कि प्रत्येक पाली से कितने अभ्यर्थी चयनित हुए।
  • संशोधित उत्तर कुंजी पर स्पष्टीकरण: अंतिम उत्तर कुंजी में हटाए गए प्रश्नों के संबंध में स्पष्ट और ठोस कारण बताए जाएं।

आगे की चयन प्रक्रिया

लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को अब चयन के अगले चरणों से गुजरना होगा। सबसे पहले दस्तावेज सत्यापन (DV) किया जाएगा, जिसमें शैक्षिक प्रमाणपत्र, आरक्षण प्रमाणपत्र और पहचान पत्रों की जांच होगी।

इसके बाद शारीरिक मानक परीक्षण (PST) और शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) आयोजित की जाएगी। पुरुष और महिला अभ्यर्थियों के लिए अलग-अलग शारीरिक मानक निर्धारित किए गए हैं। सभी चरणों में सफल रहने वाले अभ्यर्थियों का अंत में मेडिकल परीक्षण किया जाएगा। अंतिम मेरिट सूची लिखित परीक्षा और इन सभी प्रक्रियाओं के आधार पर तैयार की जाएगी।