आईआईटी में एमटेक पाठ्यक्रमों में बड़े बदलाव की तैयारी, खाली सीटों की समस्या पर सरकार सख्त
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में एमटेक कार्यक्रमों की बढ़ती खाली सीटों की समस्या को देखते हुए सरकार ने पाठ्यक्रमों में व्यापक सुधार का निर्णय लिया है। सभी 21 आईआईटी को निर्देश दिए गए हैं कि वे एक संयुक्त रिपोर्ट तैयार करें, जिसके आधार पर नए और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को ऐसी शिक्षा प्रदान करना है जो उद्योग की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों से मेल खाती हो।
खाली सीटों का बढ़ता संकट
हाल के वर्षों में आईआईटी में एमटेक सीटों के खाली रहने का आंकड़ा चिंताजनक है। वर्ष 2020-21 में कुल 3,229 सीटें खाली रह गई थीं, जबकि 2021-22 में यह संख्या 3,083 थी। इसका सीधा प्रभाव पीएचडी कार्यक्रमों पर भी पड़ा है, जहां 2020 में 1,779 और 2021 में 1,852 सीटें रिक्त रहीं। आईआईटी काउंसिल में विभिन्न संस्थानों ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बीटेक पूरा करने वाले अधिकांश छात्र अपने ही कैंपस में एमटेक में दाखिला नहीं लेना चाहते। इसके पीछे मुख्य कारण रोजगार के सीमित अवसर और उद्योग इंटर्नशिप की कमी है। स्नातक स्तर के बाद छात्रों को विशिष्टीकरण के ऐसे विकल्प नहीं मिल पाते जो उन्हें बेहतर करियर की गारंटी दे सकें।
नए पाठ्यक्रमों की रूपरेखा
प्रस्तावित सुधारों के तहत एमटेक कार्यक्रमों को तीन नए स्वरूपों में बांटा जाएगा:
- दोहरा एमटेक (अनुसंधान एवं उद्योग): इसमें छात्रों को शोध के साथ-साथ उद्योग जगत में काम करने का अनुभव मिलेगा।
- बहु-विषयक एमटेक: विभिन्न विषयों के सम्मिलन से तैयार यह कोर्स आधुनिक तकनीकी चुनौतियों का समाधान सिखाएगा।
- मिश्रित पद्धति (हाइब्रिड): ऑनलाइन और ऑफलाइन शिक्षा का संयोजन, जो कामकाजी पेशेवरों के लिए भी सुविधाजनक होगा।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव एमटेक में उद्योग इंटर्नशिप को अनिवार्य रूप से शामिल करना है। इसके अलावा, उत्पाद-आधारित पाठ्यक्रम शुरू करने की सिफारिश की गई है, जिनमें शोध प्रकाशन अनिवार्य नहीं होगा। इससे छात्र व्यावहारिक कौशल पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया
सभी आईआईटी के विशेषज्ञ मिलकर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिसमें वर्तमान पाठ्यक्रमों की स्थिति, उद्योग की उभरती जरूरतों और प्रस्तावित सुधारों का विस्तृत विवरण होगा। इस रिपोर्ट को सरकार को सौंपा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद आईआईटी प्रबंधन उद्योग विशेषज्ञों के सहयोग से पाठ्यक्रम को संशोधित करेगा। इस प्रक्रिया में उद्योग जगत के विशेषज्ञ भी शामिल होंगे, ताकि वे अपनी आवश्यकताओं के अनुसार नए विषयों को शामिल कर सकें।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एमटेक डिग्री प्राप्त करने के बाद युवाओं को रोजगार पाने में कठिनाई न हो। नए पाठ्यक्रम विशेष क्षेत्रों पर केंद्रित होंगे और इनमें उद्योग की मांग के अनुरूप विषयों को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार को उम्मीद है कि इन सुधारों से आईआईटी में एमटेक कार्यक्रमों की लोकप्रियता बढ़ेगी और खाली सीटों की समस्या का समाधान होगा।