सीबीएसई का बड़ा कदम: तीसरी से आठवीं तक कंप्यूटेशनल थिंकिंग और एआई पाठ्यक्रम

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग (सीटी) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का पाठ्यक्रम लागू कर दिया है। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप उठाया गया है, जिसका उद्देश्य छात्रों को भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार करना है। इस पाठ्यक्रम के तहत न केवल बच्चे बल्कि शिक्षक भी इन नई तकनीकों की गहरी समझ विकसित करेंगे।

शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था

सीबीएसई ने इस नए पाठ्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया है। शिक्षकों को विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे वे कंप्यूटेशनल थिंकिंग और एआई की अवधारणाओं को विभिन्न विषयों में आसानी से शामिल कर सकें। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को सिखाना है कि कैसे वे इन तकनीकों को पारंपरिक विषयों जैसे गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और भाषाओं से जोड़ सकते हैं। इससे पढ़ाने का तरीका अधिक रोचक और प्रभावी बनेगा।

तार्किक सोच और समस्या समाधान पर जोर

इस पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में तार्किक सोच, समस्या समाधान की क्षमता, पैटर्न पहचानने की समझ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक उपयोग के प्रति जागरूकता विकसित करना है। यह पहल बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें व्यावहारिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर केंद्रित है। सीबीएसई का मानना है कि इस तरह की शिक्षा से बच्चे भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना बेहतर ढंग से कर सकेंगे।

शिक्षक प्रशिक्षण की थीम: 2026-27 सत्र

बोर्ड ने वर्ष 2026-27 के लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण की थीम के रूप में कंप्यूटेशनल थिंकिंग और एआई को चुना है। इस दौरान पूरे साल सात प्रमुख उप-विषयों पर गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें कंप्यूटेशनल थिंकिंग के मूल सिद्धांत, खेल आधारित शिक्षण, गणित के माध्यम से एआई की समझ, वास्तविक जीवन में एआई का उपयोग, मूल्यांकन रणनीतियां और एआई के नैतिक व जिम्मेदार उपयोग जैसे विषय शामिल हैं। इस व्यापक प्रशिक्षण से शिक्षक और छात्र दोनों ही नई तकनीकों से बेहतर तरीके से जुड़ सकेंगे।

तीन स्तरों पर गतिविधियों का आयोजन

सीबीएसई ने स्कूलों को इस पाठ्यक्रम को लागू करने के लिए तीन प्रमुख स्तरों पर गतिविधियों में भाग लेने के निर्देश दिए हैं:

  • जिला स्तर: पहली गतिविधि के तहत जिला स्तर पर कंप्यूटेशनल थिंकिंग और एआई विषय पर एक दिवसीय 6 घंटे की ऑफलाइन कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इनमें शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्रों का चयन कर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भेजा जाएगा।
  • स्कूल स्तर: दूसरी गतिविधि के अंतर्गत स्कूल स्तर पर विशेषज्ञों द्वारा ऑनलाइन या ऑफलाइन व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। ये सत्र लगभग तीन घंटे के होंगे, जिनमें शिक्षकों और छात्रों को सीटी और एआई से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सरल भाषा में दी जाएगी।
  • क्षेत्रीय स्तर: तीसरी गतिविधि के तहत क्षेत्रीय स्तर पर कार्यशालाएं और ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इससे स्कूलों में एआई आधारित शिक्षण वातावरण विकसित होगा और शिक्षकों के कौशल में सुधार होगा।

इन गतिविधियों से स्कूलों में एक नया शिक्षण माहौल तैयार होगा, जहां शिक्षक और छात्र मिलकर तकनीकी रूप से सशक्त बन सकेंगे। सीबीएसई का यह कदम शिक्षा को आधुनिक और रोजगारोन्मुखी बनाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है।