CBSE ने प्रश्नपत्रों में QR कोड को लेकर जारी की सलाह, भ्रामक व्याख्याओं से आगाह किया
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने हाल ही में अपने प्रश्नपत्रों में मौजूद QR कोड को लेकर एक महत्वपूर्ण परामर्श जारी किया है। इस सलाह में बोर्ड ने छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से इन कोडों के संबंध में फैल रही गलत सूचनाओं से सावधान रहने को कहा है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि ये QR कोड आंतरिक व्यवस्था का हिस्सा हैं और इनका उपयोग किसी बाहरी वेबसाइट से जुड़ने के लिए नहीं किया गया है।
QR कोड का वास्तविक उद्देश्य
CBSE द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रश्नपत्रों पर लगे QR कोड मुख्य रूप से प्रमाणीकरण, ट्रैकिंग और परीक्षा की अखंडता सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। बोर्ड ने बताया कि जब इन कोडों को स्कैन किया जाता है, तो वे किसी वेब लिंक पर नहीं ले जाते, बल्कि केवल वही पाठ प्रदर्शित करते हैं जो उनमें एन्कोड किया गया है। हालांकि, यदि कोई उपयोगकर्ता उस पाठ को मैन्युअल रूप से सर्च इंजन में डालता है, तो अलग-अलग परिणाम सामने आ सकते हैं, जो भ्रामक हो सकते हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि मानक ब्राउज़रों पर इस प्रकार की कोई समस्या नहीं आती है।
गुमराह करने वाली जानकारी से सावधानी
बोर्ड ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि कुछ लोग जानबूझकर QR कोड से जुड़े पाठ को अलग-अलग व्यक्तियों या संस्थाओं से जोड़कर गलत अर्थ निकाल रहे हैं। CBSE के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने चेतावनी दी कि इस तरह की गतिविधियां बोर्ड की छवि को नुकसान पहुंचाने के इरादे से की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सर्च इंजन के परिणाम एल्गोरिदम पर आधारित होते हैं और उनका CBSE या उसकी परीक्षा प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है। इसलिए, ऐसे परिणामों के आधार पर कोई निष्कर्ष निकालना पूरी तरह से गलत और भ्रामक है।
जिम्मेदारी से जानकारी साझा करने की अपील
इस परामर्श में CBSE ने सभी हितधारकों से अनुरोध किया है कि वे बिना सत्यापन के किसी भी दावे या अटकलों को साझा न करें। बोर्ड ने निम्नलिखित दिशा-निर्देश दिए हैं:
- किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसे CBSE के आधिकारिक संचार से सत्यापित करें।
- ऐसी सामग्री को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत न करें जो संस्थान की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकती है।
- भ्रामक और अफवाहों पर आधारित खबरों को फैलने से रोकने में सहयोग करें।
परीक्षा प्रक्रिया में अनुशासन की आवश्यकता
यह पहली बार नहीं है जब CBSE ने ऐसे मामलों में सख्ती दिखाई है। इससे पहले भी बोर्ड ने दसवीं और बारहवीं कक्षा के मूल्यांकन कार्य में लगे शिक्षकों को सोशल मीडिया पर गलत सूचना फैलाने पर कड़ी चेतावनी दी थी। बोर्ड ने पाया था कि कुछ मूल्यांकनकर्ता अपने अनुभव और राय ऑनलाइन साझा कर रहे थे, जिससे छात्रों और अन्य हितधारकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही थी।
CBSE ने अपनी सलाह के अंत में कहा कि सार्वजनिक संस्थानों की अखंडता बनाए रखने के लिए जिम्मेदारीपूर्वक जानकारी साझा करना आवश्यक है। बोर्ड ने सभी से आग्रह किया है कि वे किसी भी अनसुलझी जानकारी को फैलाने से बचें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।