एनसीईआरटी को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा: शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक फैसला
केंद्र सरकार ने शिक्षा जगत को एक बड़ी सौगात देते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा प्रदान कर दिया है। यह निर्णय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की सिफारिशों के बाद लिया गया है, जिससे अब NCERT को एक स्वायत्त विश्वविद्यालय की तरह कार्य करने की अनुमति मिल गई है। हालांकि, इस दर्जे के साथ कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी जुड़ी हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होगा।
कैसे मिली यह मान्यता?
NCERT ने UGC अधिनियम 1956 की धारा 3 के तहत डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने के लिए आवेदन किया था। यह आवेदन UGC के ऑनलाइन पोर्टल पर प्रस्तुत किया गया था। जांच के बाद, 2023 में UGC ने कुछ शर्तों के साथ NCERT को ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ (LOI) जारी किया, जिसमें तीन साल के भीतर सभी मापदंडों को पूरा करने का निर्देश दिया गया। NCERT ने 2025 में सभी शर्तों को पूरा करने की रिपोर्ट सरकार को सौंपी। इसके बाद UGC की विशेषज्ञ समिति ने रिपोर्ट की गहन जांच की और इसे संतोषजनक पाया। जनवरी 2026 में UGC आयोग ने अपनी बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसके बाद केंद्र सरकार ने इसे अंतिम रूप दे दिया।
किन संस्थानों को किया गया शामिल?
इस प्रस्ताव के तहत NCERT के छह प्रमुख संस्थानों को डीम्ड यूनिवर्सिटी में शामिल किया गया है। इनमें शामिल हैं:
- अजमेर (राजस्थान) स्थित क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान
- भोपाल (मध्य प्रदेश) स्थित क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान
- भुवनेश्वर (ओडिशा) स्थित क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान
- मैसूर (कर्नाटक) स्थित क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान
- शिलांग (मेघालय) स्थित क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान
- भोपाल का पंडित सुंदरलाल शर्मा व्यावसायिक शिक्षा संस्थान
इन सभी संस्थानों को एक साथ जोड़ते हुए NCERT को एक विशेष श्रेणी में विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है।
किन शर्तों के साथ मिला यह दर्जा?
सरकार ने यह दर्जा कुछ सख्त शर्तों के साथ दिया है, ताकि संस्थान की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनी रहे। प्रमुख शर्तें इस प्रकार हैं:
- NCERT अपनी संपत्ति या फंड को बिना सरकार और UGC की अनुमति के किसी अन्य संस्थान को हस्तांतरित नहीं कर सकेगा।
- संस्थान किसी भी प्रकार की लाभ कमाने वाली गतिविधियों में शामिल नहीं होगा।
- सभी पाठ्यक्रम UGC और अन्य शैक्षिक नियामक संस्थाओं के नियमों के अनुरूप ही संचालित करने होंगे।
- नए पाठ्यक्रम, ऑफ-कैंपस सेंटर या विदेशी कैंपस खोलने के लिए भी निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
- छात्रों के प्रवेश, सीटों की संख्या और फीस से जुड़े सभी नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।
शोध और गुणवत्ता पर विशेष जोर
डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने के बाद NCERT को शोध और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी होगी। संस्थान को पीएचडी कार्यक्रमों और नए शैक्षणिक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देना होगा। साथ ही, गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने के लिए NAAC और NBA जैसी मान्यता प्राप्त संस्थाओं से मान्यता लेना अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त, NCERT को हर साल NIRF रैंकिंग में भाग लेना होगा, ताकि उसके शैक्षणिक प्रदर्शन और गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जा सके। यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में NCERT को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।