BSEB 10वीं कंपार्टमेंटल 2026: स्क्रूटनी और परीक्षा का कार्यक्रम घोषित, एक अप्रैल से आवेदन शुरू
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने मैट्रिक की वार्षिक परीक्षा 2026 के परिणाम जारी कर दिए हैं। जो विद्यार्थी अपने प्राप्तांक से संतुष्ट नहीं हैं या परीक्षा में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं, उनके लिए सुधार का एक अवसर प्रस्तुत किया गया है। बोर्ड ने स्क्रूटनी और कंपार्टमेंटल परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया की तिथियां निर्धारित कर दी हैं। इच्छुक छात्र एक अप्रैल 2026 से इनके लिए आवेदन कर सकेंगे।
स्क्रूटनी और कंपार्टमेंटल परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया
बिहार बोर्ड ने उन परीक्षार्थियों के लिए राहत की खबर दी है जो मैट्रिक परीक्षा 2026 में अपने अंकों को लेकर असंतुष्ट हैं। यदि किसी विद्यार्थी को लगता है कि किसी विशेष विषय या सभी विषयों में उसे कम अंक मिले हैं, तो वह स्क्रूटनी के लिए आवेदन कर सकता है। साथ ही, एक या दो विषयों में अनुत्तीर्ण छात्रों को भी मौका दिया जाएगा। ऐसे छात्र कंपार्टमेंटल परीक्षा में शामिल होकर पुनः उत्तीर्ण हो सकते हैं।
स्क्रूटनी के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 7 अप्रैल 2026 तक जारी रहेगी। कंपार्टमेंटल परीक्षा में भाग लेने के इच्छुक विद्यार्थी भी इसी अवधि में अपना आवेदन पत्र भर सकेंगे। छात्रों को बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन दर्ज करना होगा। बोर्ड ने संकेत दिया है कि इस संबंध में विस्तृत निर्देश बाद में जारी किए जाएंगे।
स्क्रूटनी प्रक्रिया में क्या जांचा जाता है?
जब विद्यार्थी स्क्रूटनी के लिए आवेदन करते हैं, तो बोर्ड मुख्य रूप से तीन बिंदुओं की जांच करता है:
- क्या सभी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन हुआ है?
- क्या अंकों के योग में कोई त्रुटि है?
- क्या मुख्य पृष्ठ पर अंक सही ढंग से दर्ज किए गए हैं?
इस प्रक्रिया के माध्यम से कई बार छात्रों के अंकों में वृद्धि होती है, जिससे उनके कुल प्रतिशत और श्रेणी में भी सुधार संभव है। विद्यार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि की प्रतीक्षा किए बिना समय पर अपना आवेदन जमा कर दें।
कंपार्टमेंटल परीक्षा का परिणाम और लाभ
कंपार्टमेंटल परीक्षाओं के परिणाम 31 मई 2026 तक घोषित करने की योजना है। बोर्ड का मानना है कि यदि मई के अंत तक नतीजे आ जाते हैं, तो उत्तीर्ण विद्यार्थी बिना किसी विलंब के सत्र 2026-27 में ही उच्च माध्यमिक विद्यालयों या महाविद्यालयों में प्रवेश ले सकेंगे। इससे छात्रों का एक वर्ष बर्बाद होने से बच जाएगा और वे अपने सहपाठियों के साथ आगे की पढ़ाई जारी रख पाएंगे।