सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं में एआई आधारित डिजिटल मूल्यांकन की शुरुआत
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव करते हुए 10वीं बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन की घोषणा की है। इस नई प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग किया जाएगा, जो छात्रों की खराब लिखावट को भी आसानी से समझ सकेगी और उन्हें सही अंक प्रदान करेगी। यह कदम मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
एआई मूल्यांकन की सटीकता और विश्वसनीयता
डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत इसकी सटीकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एआई आधारित मूल्यांकन में शुद्धता 95 प्रतिशत तक होती है, जबकि मानव शिक्षकों द्वारा किए गए मूल्यांकन में यह आंकड़ा 92 प्रतिशत रहता है। इसका मतलब है कि एआई से जांच में गलती की संभावना लगभग न के बराबर हो जाती है। यह तकनीक न केवल सही उत्तरों को पहचानने में सक्षम है, बल्कि यह शिक्षकों द्वारा की जाने वाली अनजाने में हुई गलतियों को भी पकड़ सकती है।
डिजिटल मूल्यांकन की दो-स्तरीय प्रक्रिया
सीबीएसई की नई मूल्यांकन प्रणाली दो चरणों में काम करेगी। पहले चरण में एआई तकनीक से उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में शिक्षक भी इन उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कर सकेंगे। यदि कोई शिक्षक किसी उत्तर के अंक काटता है, तो एआई उस गलती को चिह्नित कर सकता है और सवाल उठा सकता है कि अंक गलत तरीके से काटे गए हैं। यह प्रक्रिया ऑनलाइन कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं और ऑफलाइन पेन-पेपर परीक्षाओं दोनों पर लागू होगी।
खराब लिखावट की समस्या का समाधान
अब तक की परीक्षा प्रणाली में छात्रों की लिखावट एक बड़ी चुनौती रही है। अक्सर ऐसा देखा गया है कि जिन छात्रों की लिखावट साफ और सुंदर होती है, उन्हें बिना किसी कठिनाई के अच्छे अंक मिल जाते हैं। वहीं, जिन छात्रों की लिखावट खराब या अस्पष्ट होती है, शिक्षकों को उनके उत्तर समझने में परेशानी होती है, जिससे उनके अंक कट जाते हैं। एआई तकनीक इस समस्या का समाधान करेगी, क्योंकि यह गंदी लिखावट को भी बेहतर ढंग से पढ़ और समझ सकती है।
शिक्षकों के व्यवहार का प्रभाव खत्म
मूल्यांकन प्रक्रिया में शिक्षकों का व्यवहार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कुछ शिक्षक छात्रों की लिखावट और उत्तर लिखने के तरीके से प्रभावित होकर अच्छे अंक दे देते हैं, जबकि कुछ शिक्षक गंदी लिखावट या अलग तरीके से लिखे गए उत्तरों पर अंक काट देते हैं। एआई आधारित मूल्यांकन में यह व्यक्तिगत पूर्वाग्रह पूरी तरह खत्म हो जाएगा। एआई केवल उत्तर की सामग्री और सटीकता के आधार पर अंक प्रदान करेगा, चाहे वह किसी भी तरीके से लिखा गया हो।
शिक्षा जगत में डिजिटल मूल्यांकन का विस्तार
सीबीएसई से पहले कई शैक्षणिक संस्थान डिजिटल मूल्यांकन की तैयारी कर रहे हैं। आईआईटी, एनआईटी और अन्य प्रतिष्ठित संस्थान छोटे समूहों में इस तकनीक का परीक्षण कर रहे हैं। आईआईआईटी बंगलूरू ने इसे पहले ही लागू कर दिया है। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) भी जेईई मेन, नीट, सीयूईटी जैसी राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं में डिजिटल मूल्यांकन का उपयोग कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य मूल्यांकन में पारदर्शिता लाना और छात्रों को उनके सही उत्तरों के लिए उचित अंक सुनिश्चित करना है।
एआई मूल्यांकन पर चल रही बहस
डिजिटल मूल्यांकन की घोषणा के बाद देशभर में इस पर बहस छिड़ गई है। एक वर्ग का मानना है कि यह तकनीक शिक्षकों की नौकरियों के लिए खतरा पैदा कर सकती है। वहीं, दूसरा वर्ग इसे शिक्षा प्रणाली में एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देखता है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि एआई तकनीक शिक्षकों को पूरी तरह से बदलने के बजाय उनके काम को आसान और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगी। यह प्रणाली शिक्षकों और तकनीक के बीच एक संतुलन स्थापित करने का प्रयास है, जिससे छात्रों को सबसे अधिक लाभ होगा।